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लकीर बड़ी करने में विश्वास : डॉ. रमन सिंह

दीपक रस्तोगी - MAY 10 , 2016
लकीर बड़ी करने में विश्वास : डॉ. रमन सिंह
लकीर बड़ी करने में विश्वास : डॉ. रमन सिंह
दीपक रस्तोगी

तीन नए राज्य एक साथ आस्तित्व में आए थे। बाकी दोनों- झारखंड और उत्तराखंड की तुलना में छत्तीसगढ़ में राजनीतिक स्थिरता दिखती है। इसका राज क्या है? सीधी-साधी जनता या कमजोर विपक्ष?

हमारी सरकार में जनता का भरोसा है। हम योजनाओं के क्रियान्वयन पर जोर देते रहे हैं और लोग स्वत: हम पर विश्वास करते रहे। एक टर्म सरकार चलाने के बाद अक्सर यह सवाल खड़ा होता है कि आप `एंटी इन्कम्बेंसीÓ को कैसे काउंटर करेंगे। हमने सिर्फ विकास और जनहित के कार्यक्रमों पर ध्यान दिया और यह सवाल स्वत: खत्म हो गया। जन वितरण प्रणाली से भ्रष्टाचार खत्म हो जाए और सरकार की एक रुपए किलो जैसी योजना का लाभ सीधे लोगों तक पहुंचे, इसके लिए तकनीक की मदद ली गई। देश में हम पहला ऐसा राज्य हैं, जिसने इस योजना को जीपीएस से जोड़ा। कौशल विकास योजनाओं पर हमारा ध्यान है। जमीन के आवासीय पट्टे जारी किए गए। सोशल सेक्टर के 22-25  कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जो राज्य के सुदूरवर्ती ग्रामीण और गरीब लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाए गए। इन योजनाओं पर खर्च बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन ये योजनाएं लोगों में बड़ा परिवर्तन ला रही हैं। योजनाओं का सटीक क्रियान्वयन ही हमारा सबसे बड़ा मंत्र है।

अगले दो साल में चुनाव होंगे। `लोक सुराज अभियान' जैसी कवायद से चुनाव में किस कदर लाभ की उम्मीद रखते हैं आप? आपको क्या लगता है, किस तरह की प्रशासनिक और राजनीतिक चुनौतियां सामने आ सकती हैं?

हमारे राज्य के अफसर लगातार नई योजनाओं पर काम करते हैं और मुझे दौड़ाते रहते हैं। मैं इसके लिए हमेशा तैयार हूं। मैं सिर्फ विकास की बात सोचता हूं। लोगों को ध्यान में रखकर काम करता हूं। मैं किसी राजनीतिक जोड़-तोड़ के बारे में नहीं सोचता। अब हम विकास के अगले दौर की योजनाओं पर काम कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ में रोड कनेक्टिविटी बढ़ानी है। इसके लिए 42 हजार करोड़ रुपए की योजना बनाई गई है। 12 हजार किलोमीटर लंबा रेल नेटवर्क खड़ा करने के लिए राज्य सरकार ने एनएमडीसी, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया, इरकॉन के साथ मिलकर एमओयू किया है। अभी हमारे पास 1,180 किलोमीटर का नेटवर्क है। खनिज वाले इलाकों को जोडऩे के लिए हमने तीन रेल कॉरिडोर परियोजनाओं के मद्देनजर काम शुरू किए हैं।

मेरा आशय यह है कि क्या पार्टी में और पार्टी के बाहर विरोधी शून्यता की स्थिति का राजनीतिक लाभ आपको मिलने की उम्मीद है?

मैं राजनीतिक समीकरणों के बारे में नहीं सोचता। अपना काम कर रहा हूं। छत्तीसगढ़ 12 साल पहले क्या था और अब क्या है, आगे मुझे क्या करना चाहिए- अपनी योजना लेकर जनता के पास जा रहा हूं। मैं पार्षद हुआ करता था और जनता ने मुझे अब मुख्यमंत्री बनाया है। मैं जानता हूं कि लोगों की जरूरतें क्या हैं। इसलिए मैं राजनीति को लेकर कम सोचता हूं।

लेकिन अजीत जोगी और आपके बीच कथित नजदीकियों को लेकर आप क्या कहेंगे? उनके खिलाफ चल रहे मामलों में राज्य सरकार के ठंडे रवैए से कई सवाल उठ रहे हैं।

देखिए... मैं अपनी लकीर बड़ी करने में विश्वास करता हूं। लकीर छोटी करके आप ज्यादा आगे नहीं जा सकते। मेरी विपक्ष या अपनी पार्टी के तमाम नेताओं से अच्छे संबंध हैं। अभी अंबिकापुर डंपिंग ग्राउंड में आप विपक्ष के नेता टी. एस. सिंहदेव से मिलकर आए। मेरे उनसे घरेलू ताल्लुकात हैं। रही बात मामलों की तो अदालतों में मामले हैं, अदालतें तय करेंगी।

अंतागढ़ टेपकांड के बारे में क्या कहेंगे, जिससे नजदीकियां जाहिर होती हैं?

यह उनलोगों के आपसी द्वंद्व का नतीजा है। कोई भी चाहे, कैसा भी टेप जारी कर दे। मैं इन बातों की ओर ध्यान नहीं देता।

छत्तीसगढ़ अरसे से नक्सली हिंसा प्रभावित राज्य रहा है। हिंसा के बीच पीडीएस या आपकी सोशल सेक्टर की कुछ योजनाएं तारीफ पा रही हैं। आप नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में मानवाधिकार उल्लंघन की घटनाओं पर क्या टिप्पणी करेंगे?

शिकायतों पर प्रशासन ने निष्पक्ष होकर काम किया है। लोगों का भरोसा लौटाने में हम सक्षम हुए हैं। 2004 में अंबिकापुर के लोग इलाका छोड़कर भाग गए थे। आज आपने खुद देखा कि यह किस कदर विकसित शहर बन गया है। बस्तर के 80 फीसद लोगों तक हम विकास योजनाओं को लेकर पहुंचने में कामयाब हुए हैं। दंतेवाड़ा, सुकमा में यही हाल है। पुलिस की भूमिका सौ फीसद पॉजिटिव है।

लेकिन अभी हाल पत्रकारों के उत्पीड़न की बातें सामने आईं, पुलिस और प्रशासन के दो बड़े अफसरों के बुरे बर्ताव की शिकायतों पर एडिटर्स गिल्ड की जांच टीम भी दौरे पर आई थी। आप क्या कहेंगे?

हमने एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाई है, जिसमें पुलिस, प्रशासन और पत्रकार हैं। यह सुनिश्चित किया है कि इस कमेटी से पूछकर ही पुलिस किसी मीडिया वाले के खिलाफ मिलने वाली शिकायतों पर कार्रवाई करेगी। 

आप कह रहे हैं कि विकास योजनाओं पर आपका फोकस है। सोशल सेक्टर पर आपका जोर रहा है। औद्योगिक विकास की क्या स्थिति है। 1.92 लाख करोड़ रुपए के एमओयू हुए हैं और 40 हजार करोड़ रुपए की परियोजनाएं धरातल पर दिख रही हैं। क्या यह सटीक आंकड़ा है?

हम राष्ट्रीय औसत से आगे हैं। हम ग्रामीण क्षेत्र, जनहित के साथ ही औद्योगिक विकास पर भी पूरा ध्यान दे रहे हैं। किसानों के लिए 670 करोड़ रुपए की योजना बनाई है। एनएमडीसी का बड़ा प्रोजेक्ट रावघाट में ला रहे हैं। नगरनार में स्टील प्लांट ला रहे हैं। भिलाई के दल्ली-राजपुरा में हमारी नई योजनाएं हैं। अब हम औद्योगिक विकास के दूसरे चरण की ओर ध्यान दे रहे हैं, जिसमें खाद्य प्रसंस्करण, रक्षा उत्पाद, ड्रोन निर्माण, कोल गैसीफिकेशन, कंप्युटर, इलेक्ट्रॉनिक्स, सौर ऊर्जा उपकरण, एलईडी, सेमी कंडक्टर, मोबाइल कॉम्पोनेंट निर्माण शामिल हैं।

छत्तीसगढ़ खनिज संपदा से भरपूर राज्य है। खदानों की नीलामी प्रक्रिया को कैसे पारदर्शी बना रहे हैं?

खनिज कानूनों में संशोधन के बाद सफलता पूर्वक नीलामी करने वाला देश का पहला राज्य है छत्तीसगढ़। हमने ई-ऑक्शन कराया। पहले चरण में चार चूनापत्थर और एक सोने की खदान की नीलामी प्रक्रिया शुरू की गई। इनमें से दो चूना पत्थर और एक स्वर्ण ब्लॉक की नीलामी पूरी हो गई है। इससे राज्य को रॉयल्टी के रूप में पांच हजार करोड़ रुपए अतिरिक्त मिलने की संभावना है।

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