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भोपाल: 60 साल से रह रहे थे ईरानी, एक झटके में सबकुछ उजाड़ दिया

शमशेर सिंह - NOV 29 , 2020
भोपाल: 60 साल से रह रहे थे ईरानी, एक झटके में सबकुछ उजाड़ दिया

File Photo

पिछले साठ साल से ईरान से आकर भोपाल में बसे ईरानी लोगों की भोपाल प्रशानसन ने अतिक्रमण हटाने के नाम पर रोजी-रोटी¬छीन ली है। अब उन्हेंबेघर करने की तैयारी की जा रही है। भोपाल नगर निगम नेभारी पुलिस बल के साथ आकर ईरानी डेरे पर बुलडोजर चला दिया। उनकी दुकानों को नेस्तनाबूत कर दिया।

भोपाल रेलवे स्टेशन के पास करीब 12,000 वर्गफीट में ईरानी डेरे है। इसमें करीब 1000 लोग रहते है, साथ ही कई दुकानें भी चलाते है। नगर निगम के अनुसार ईरानी डेरा पूरी तरह अवैध कब्जा कर बनाया गया है। वर्ष 2017 में यहां की हुसैनी कल्याण समिति न्यायालय में केस भी हार गई है। उसके बाद ही यह कार्यवाही की जा रही है।

सुबह से शुरू हुई नगर निगम की कार्रवाई में यहांका  रखा  हुआ सामान जब्त कर सारी दुकाने गिरा दी गई। प्रशासन का कहना है कि न्यायालय के फैसले के बाद भी यहां के लोग हट नहीं रहे थे। इसलिये यहां बुलडोजर चलाना पड़ा। यहां पर करीब 500 पुलिस कर्मी, जिसमें करीब 100 महिला पुलिस, ने सुबह सेही मोर्चा संभाल लिया था। इस क्षेत्र को चारो तरह से बैरिकेट लगाकर बंद कर दिया गया। और उसके बाद कार्यवाही की गई।  इस पूरी कार्रवाई में किसी घर को नहीं तोड़ा गया। दुकानों के पीछे ईरानी डेरे वालों के घर है,जिसे जल्द गिराने की तैयारी हो रही है।

भोपाल रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 6 के बाहर ईरानी डेरा है। इसमें करीब 900 लोग रहते हैं। यह डेढ़ एकड़ में फैला हुआ है। रहवासी एरिया चारोंतरफ से बाउंड्री वॉल से घिरा हुआ है, जबकि इस बाउंड्री वॉल के बाहर की तरफ दुकानें बनी हुई थी। साठ के दशक में भोपाल आये

ईरानी डेरे में रहने वाले आपस में आज भी फारसी में बात करते है। यहां के लोग बताते है कि उनके पूर्वज  ईरान  से यहां आए थे। वे मूलत: सियामुस्लिम हैं। तब यहां जंगल था।  उन्हें यहां पर एक राठौर फैमिली ने बसाया था। उन्होंने यह जगह उन्हें दी थी। यह सरकारी जगह नहीं थी। वह खानाबदोश थे। फिर यहां पर सड़क बनी और यहां पर दुकानें बन गई।  वह 60 साल से अपने परिवार के साथ रह रहे हैं। उनका आधार कार्ड वोटर कार्ड सब कुछ है। सिर्फ वोट डालने का अधिकार है।

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