इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से उल्टी-दस्त होने के कारण छह लोगों की मौत हो गई है। प्रशासन के एक शीर्ष अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी।
जिलाधिकारी शिवम वर्मा ने दूषित पानी पीने से फैले उल्टी-दस्त के प्रकोप के पीड़ितों की ताजा स्थिति के बारे में ‘पीटीआई-वीडियो’ से कहा, ‘‘फिलहाल शहर के 41 अस्पतालों में कुल 203 मरीजों का इलाज जारी है और छह लोगों की मौत हो चुकी है।"
उन्होंने बताया कि अब तक कुल 13 हजार 444 घरों का सर्वेक्षण किया जा चुका है। चौबीस घंटे डॉक्टरों को ड्यूटी तय की गई। रेफेरल के लिए 10 एम्बुलेंस तैनात है, अस्पतालों में नि:शुल्क उपचार के लिए बेड्स चिन्हांकित किए गए हैं। शिकायत के निवारण के 24X7 कॉल सेंटर सक्रिय है, सहायता डेस्क भी स्थापित की गई है।
दूषित पानी पीने से हुई मौतों को लेकर कलेक्टर वर्मा ने कहा कि डॉक्टर की टीम जो बताते हैं उसे लिया जा रहा है। आधिकारिक तौर पर 6 की मौत की पुष्टि हुई हैं। उन्होंने बताया कि इलाके में रिंग सर्वें भी किया जा रहा हैं। जांच के लिए मेडिकल कॉलेज के सीनियर डॉक्टर का पैनल बनाया गया है।
इधर, इंदौर की घटना को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुक्रवार को बड़ी बैठक की, जिसमें 16 नगर निगम के अधिकारी और जनप्रतिनिधियों मौजूद रहे। बैठक में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मध्यप्रदेश के तमाम जल स्रोतों के पानी की जांच करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इंदौर जैसी घटना की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए। सभी जल स्रोतों के पानी के नमूने की जांच की जाए, लोगों को साफ पेयजल उपलब्ध कराएं। टंकियों की साफ-सफाई, जलप्रदाय के लिए एसओपी भी जारी किया जाए, 20 वर्ष पुरानी पाइप लाइन का चिन्हांकन करें और उनकी जांच करें। उन्होंने कलेक्टरों को जिला स्तर पर निगरानी कमेटी बनाकर पूरी व्यवस्था देखने के निर्देश दिए।