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डीयू चुनाव: धन-बल और राजनीतिक प्रभाव के आगे फीके पड़े छात्रहित के मुद्दे

दिल्ली विश्वविद्यालय में 12 सितंबर को होने वाले छात्र संघ (डूसू) चुनाव का प्रचार पूरे चरम पर...
डीयू चुनाव: धन-बल और राजनीतिक प्रभाव के आगे फीके पड़े छात्रहित के मुद्दे

दिल्ली विश्वविद्यालय में 12 सितंबर को होने वाले छात्र संघ (डूसू) चुनाव का प्रचार पूरे चरम पर है। एबीवीपी अपने काम और छात्रहित के मुद्दों के अलावा राष्ट्रवादी विचारधारा और केंद्र सरकार की उपलब्धियों का बखान कर छात्रों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश में लगी है। अगर उनके उम्मीदवारों की बात करें तो धन-बल, राजनीतिक रुतबे और रसूख का प्रदर्शन ज्यादा दिखाई पड़ रहा है। यहां की सड़कों पर फैले-चिपके पोस्टर और पर्चियां प्रधानमंत्री के स्वच्छता अभियान की धज्जियां उड़ा रही हैं, वहीं प्रचार में इस्तेमाल महंगी गाड़ियां छात्र राजनीति का मजाक उड़ाती दिख रही हैं। हालांकि ऐसा करने में एनएसयूआई भी कमजोर नहीं है, लेकिन उसने अपने साथ छात्रहित के मुद्दों और बदलाव की राजनीति को जोड़ा हुआ है।

कांग्रेस समर्थित एनएसयूआई ने 11 साल के बाद अध्यक्ष पद के लिए एक महिला उम्मीदवार को खड़ा किया है। उसके प्रतिद्वंद्वी एबीवीपी ने 2011 में एक महिला उम्मीदवार को मैदान में उतारा था। एनएसयूआई यूनिवर्सिटी में बदलाव की बात कर रही है। उसे उम्मीद है कि देश की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए युवा छात्र उसे ही चुनेंगे। आपको बता दें कि चुनाव प्रचार 11 सितंबर को सुबह 11 बजे तक बंद हो जाएगा।

यह हैं एबीवीपी के उम्मीदवार

इन चुनावों में जाट और गुर्जर समुदाय का दबदबा ज्यादा रहता है। यह उम्मीदवारों की सूची से भी पता चलता है। एबीवीपी ने अध्यक्ष पद के लिए बॉक्सिंग खिलाड़ी अक्षित दहिया को उतारा है। वे दिल्ली के जाट समुदाय से हैं और कानून के छात्र हैं। उपाध्यक्ष पद के लिए देशबंधु कालेज के एमए हिंदी के छात्र प्रदीप तंवर अपनी किस्मत आजमाएंगे। एबीवीपी ने सेक्रेटरी पद के लिए योगित राठी को मैदान में उतारा है जो बागपत के जाट समुदाय से हैं। ज्वाइंट सेक्रेटरी पद के लिए शिवांगी खरवाल को उतारा है। वे बुद्धिस्ट स्टडीज की छात्रा हैं, जो दिल्ली के राजपूत परिवार से हैं।

यह हैं एनएसयूआई के उम्मीदवार

दूसरी तरफ एनएसयूआई ने अध्यक्ष पद के लिए शहीद भगत सिंह कॉलेज की तैराकी की खिलाड़ी और छात्रा चेतना त्यागी (19) को मौका दिया है। बीए तृतीय वर्ष की स्टूडेंट चेतना मूल रूप से दिल्ली से हैं। उपाध्यक्ष पद के लिए बुद्धिस्ट स्टडीज के छात्र अंकित भारती को मौका दिया है। वे अनुसूचित समाज से आते हैं। सेक्रेटरी पद के उम्मीदवार आशीष लांबा इंटरनेशनल हाकी खिलाड़ी हैं। राजस्थान के चूरू से आने वाले आशीष किसान परिवार से हैं। वहीं ज्वाइंट सेक्रेटरी पद के लिए अभिषेक चपराना गुर्जर समुदाय से हैं। वे बुद्धिस्ट स्टडीज के छात्र हैं और हरियाणा के फरीदाबाद से आते हैं।

व्यक्तिगत प्रभाव है पार्टी से ऊपर

वैसे आम छात्रों का चुनाव प्रचार के प्रति रुझान काफी कम दिखा। आउटलुक से बातचीत में कुछ छात्रों ने बताया कि चुनाव प्रचार में उम्मीदवार अपनी-अपनी पार्टी की विचारधारा तो दर्शाते ही हैं, उनका व्यक्तिगत प्रभाव उनकी पार्टी से ऊपर रहता है। इसी बीच सड़क से गुजर रहा हवा में पर्चियां उड़ाता महंगी गाड़ियों का काफिला दिखा, तो एक छात्र ने काफिले की तरफ इशारा करते हुए कहा- अब चुनाव बस ये ही रह गया है। यह पूछने पर कि यह किसका काफिला है, उनमें से एक छात्र ने बताया कि यह एबीवीपी के उपाध्यक्ष पद के उम्मीदवार प्रदीप तंवर का है।

इन छात्रों के साथ हुई बातचीत से यह साफ है कि दोनों संगठनों में टक्कर है। हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि एबीवीपी का प्रचार एनएसयूआई के मुकाबले ज्यादा दिख रहा है, जिसकी वजह छात्रों ने केंद्र में भाजपा की सरकार और उनका मजबूत छात्र संगठन बताया। वहीं उन्होंने बताया कि एनएसयूआई से जुड़े छात्र जमीनी स्तर पर हर मतदाता छात्र-छात्रा से मिलने की कवायद में जुटे हैं।

 

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