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पंजाब में जनाधार बहाल करने को भाजपा से भी गठबंधन तोड़ सकता है शिअद

कृषि अध्यादेशों के विरोध में केंद्रीय मंत्रीमंडल से हरसिमरत कौर के इस्तीफे के साथ ही शिरोमणी अकाली...
पंजाब में जनाधार बहाल करने को भाजपा से भी गठबंधन तोड़ सकता है शिअद

कृषि अध्यादेशों के विरोध में केंद्रीय मंत्रीमंडल से हरसिमरत कौर के इस्तीफे के साथ ही शिरोमणी अकाली दल(शिअद) ने पंजाब की सियासत में खिसकते अपने जनाधार को बहाल करने की कोशिश की है। हरसिमरत के इस्तीफे के साथ ही शिअद के सियासी हलकों से यह संकेत भी मिल रहे हैं कि प्रदेश के किसानों का पक्षधर साबित करने के लिए शिअद भाजपा से गठबंधन भी तोड़ सकता है। दरअसल मार्च 2022 में पंजाब में विधानसभा चुनाव है जिनके लिए शिअद अभी से अपनी सियासी जमीन तैयार कर रहा है। वैसे भी पंजाब में उसके सहयोगी गठबंधन दल भाजपा का कोई व्यापक जनाधार नहीं है। लोकसभा में कृषि अध्यादेश पेश होने से पहले तक इन अध्यादशों के विरोध में खुलकर न आने वाला शिअद पंजाब की सियासत में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के मुकाबले अलग-थलग पड़ गया था। 14 सिंतबर से संसद का सत्र शुरु होने के चार दिन पहले से ही कृषि अध्यादेशों के विरोध में दबाव बनाने के लिए पंजाब की सड़कों, मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिदंर सिंह के पटियाला और बादल गांव स्थित पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के निजी आवास के समक्ष धरना-प्रदशर्न कर रहे किसानों के बीच साफ संदेश जा रहा था कि अध्यादेशों के खिलाफ उनके साथ सत्तारुढ कांग्रेस व आम आदमी पार्टी खड़ी है जबकि केंद्र की एनडीए सरकार में भागीदार शिअद का स्टैंड स्पष्ट नहीं है। हरसिमरत के इस्तीफे के साथ ही शिअद अब खुलकर किसानों के विरोध प्रदर्शनों में शामिल होगा। 25 सितंबर को शिअद अध्यक्ष सुखबीर बादल अपनी पार्टी के सांसदों व विधायकों के साथ पंजाब बंद में शामिल होंगे। 

28 अगस्त को एक दिन के विधानसभा सत्र में कांग्रेस की कैप्टन सरकार ने जहां इन कृषि अध्यादेशों को राज्य मंे लागू न करने के लिए विधेयक पारित किया तो शिअद की विधानसभा में गैर हाजिरी से भी किसानों में संदेश गया कि केंद्र की सत्ता में भागीदार शिअद उनके साथ नहीं है। लोकसभा में कृषि अध्यादेश पेश किए जाने से पहले शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की अगुवाई में शिअद सांसदों के दल ने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से भी मुलाकात कर अध्यादेश वापस लिए जाने की मांग की थी। ऐसा न होने के संकेत मिलने पर संसद सत्र के पहले दिन जब कृषि अध्यादेश पेश किए गए तो सुखबीर बादल और उनकी पत्नी हरसिमरत कौर की संसद में गैरहाजिरी से भी किसानों में संदेश गया कि शिअद उनके साथ नहीं है।

प्रकाश सिंह बादल ने लिखी इस्तीफे की पटकथा: किसानों से घर(निजी आवास और प्रदेश में पार्टी की सियासत) घिरा देख शिअद के वयोवर्द्ध नेता पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने एनडीए सरकार में मंत्री अपनी बहु हरसिमरत कौर बादल पर इस्तीफे का दबाव बनाया ताकि किसान हितेषी होने का दावा करने वाली उनकी पार्टी का जनाधार  किसानों में बना रहे। दरअसल बादल की छवि एक किसान नेता है जिसका सियासी फायदा शिअद को मिलता रहा है। शिअद सूत्रों ने आउटलुक को बताया कि ससुर के दबाव के चलते हरसिमरत ने सदन का सत्र शुरु होने के चार दिन पहले ही तैयार कर लिया था। 10 सितंबर को शिअद के चंडीगढ़ मुख्यालय में हरसिमरत कौर ने शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के मीडिया सलाहकार जंगवीर सिंह की मदद से चार पन्नों का इस्तीफा तैयार किया। इस बीच शिअद सांसदों का केंद्रीय कृषि मंत्री और भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के जरिए बनाया गया दबाव काम नहीं आया तो इस्तीफा दे दिया। 

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