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मुस्लिम से शादी करने वाली हिन्दू महिला पर भी लागू रहेगा तीन तलाक

APR 21 , 2017

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति अनु मल्होत्रा की पीठ ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ में बदलाव संबंधी तीन तलाक का मामला पहले ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है इसलिए वह इस मामले में सुनवाई नहीं करेगी। पीठ ने कहा कि इस बात को लेकर कोई विवाद नहीं है कि इस मामले की सुनवाई के लिए एक संवैधानिक पीठ का गठन किया गया है। इसलिए इसके द्वारा बनाया गया कानून समाज की सभी महिलाओं एवं बच्चों पर लागू होगा। कोर्ट ने यह भी कहा, सभी महिलाओं को कानून के तहत समान सुरक्षा पाने का हक है।

पीठ ने कहा, इसके (सुप्रीम कोर्ट के मामले पर विचार करने) मद्देनजर हम इस मामले पर सुनवाई नहीं करेंगे। याचिका को खारिज किया जाता है।

वकील विजय कुमार शुक्ला के ओर से दायर इस जनहित याचिका में तीन तलाक से प्रभावित हिंदू महिलाओं की दुर्दशा का जिक्र किया गया है। इस याचिका में विशेष विवाह कानून या विवाह पंजीकरण अनिवार्यता कानून के तहत अंतर-जातीय विवाह के पंजीकरण को इस उपधारा के साथ अनिवार्य बनाने के लिए केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है कि यदि अंतरजातीय विवाह का पंजीकरण नहीं कराया जाता है तो दंड दिया जाएगा।

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गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट की एक संविधान पीठ 11 मई से उन याचिकाओं के समूह की सुनवाई करेगी जिनमें तीन तलाक और बहुविवाह को असंवैधानिक एवं महिलाओं के प्रति भेदभावपूर्ण बताते हुए इन्हें चुनौती दी गई थी।

शीर्ष अदालत ने पहले कहा था कि मुस्लिमों में पाए जाने वाला तीन तलाक, निकाह हलाला और बहुविवाह बेहद अहम मुद्दे हैं और इनसे भावनाएं जुड़ी हैं। याचिका में दावा किया गया था कि चूंकि निकाहनामा (विवाह अनुबंध) उर्दू में लिखा होता है इसलिए हिंदू महिला तीन तलाक या बहुविवाह से जुड़े प्रावधानों को समझाने में विफल रहती हैं।

याचिकाकर्ता ने अदालत से अनुरोध किया था कि मौलवियों को निकाहनामा में वर्णित तलाक या बहुविवाह से जुड़े प्रावधान हिंदू महिलाओं को उनकी मातृभाषा में समझाने चाहिए। याचिका में कहा गया, ऐेसा निर्देश जारी कीजिए कि हिंदू लड़की की मुस्लिम लड़के से शादी होने की स्थिति में पति को तीन तलाक या बहु विवाह के प्रावधान का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं हो।


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