Home देश मुद्दे मुस्लिम महिलाओं को मस्जिद में प्रवेश देने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को दिया नोटिस

मुस्लिम महिलाओं को मस्जिद में प्रवेश देने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को दिया नोटिस

आउटलुक टीम - APR 16 , 2019
मुस्लिम महिलाओं को मस्जिद में प्रवेश देने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को दिया नोटिस
मुस्लिम महिलाओं को मस्जिद में प्रवेश देने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को जारी किया नोटिस
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मुस्लिम महिलाओं को नमाज अदा करने के लिए मस्जिदों में प्रवेश की अनुमति देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई है। इसे लेकर शीर्ष अदालत ने केन्द्र को नोटिस भी जारी किया है।

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, न्यायमूर्ति एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र को नोटिस जारी किया कर पुणे की एक दम्पति द्वारा दायर याचिका पर जवाब देने के लिए कहा है।

इसलिए सुनवाई को तैयार है कोर्ट

पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील से कहा कि वह केरल के सबरीमाला मंदिर के मामले में शीर्ष अदालत के फैसले के कारण इस मामले की सुनवाई करेगा। पीठ ने कहा, "एकमात्र कारण जो हम आपको सुन सकते हैं, वह है सबरीमाला मंदिर मामले में हमारा फैसला।"

पुणे के मुस्लिम दम्पति ने दाखिल की है याचिका

पुणे के मुस्लिम दम्पति ने सुप्रीम कोर्ट में महिलाओं के मस्जिद में प्रवेश को लेकर याचिका दायर की है। दंपती ने सर्वोच्च अदालत में याचिका दायर कर मांग की है कि महिलाओं को मस्जिद में प्रवेश की अनुमति मिले और उन्हें प्रार्थना करने का भी अधिकार मिले। याचिकाकर्ता की दलील है कि पवित्र कुरआन और मोहम्मद साहेब ने महिलाओं के मस्जिद में प्रवेश का कभी विरोध नहीं किया।

महिलाओं को मस्जिद में प्रवेश नहीं देना लैंगिक भेदभाव

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया, 'पुरुषों की ही तरह महिलाओं को भी अपनी धार्मिक मान्यता के आधार पर प्रार्थना का अधिकार है। इस वक्त उन मस्जिदों में तो महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी जाती है जिनका प्रबंधन जमात-ए-इस्लामी के अधीन है लेकिन सुन्नी मत के अन्य पंथों की मस्जिदों में महिलाओं का प्रवेश वर्जित है। जिन मस्जिदों में महिलाओं को प्रवेश की इजाजत है वहां भी उनके प्रवेश और निकास के लिए अलग दरवाजे हैं और इन मस्जिदों में उनके लिए अलग से नमाज पढ़ने की व्यवस्था होती है। इन मस्जिदों में भी पुरुषों के साथ नमाज की उनको अनुमति नहीं दी जाती है। इस तरह का लैंगिक भेदभाव नहीं होना चाहिए। पवित्र शहर मक्का में भी महिलाओं और पुरुषों के बीच इस तरह का कोई भेदभाव नहीं होता है।'

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