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जेएनयू फीस बढ़ोतरी आंदोलन में एबीवीपी ने अलग पकड़ी राह, बोली-वाम संगठनों के साथ नहीं

आउटलुक टीम - NOV 19 , 2019
जेएनयू फीस बढ़ोतरी आंदोलन में एबीवीपी ने अलग पकड़ी राह, बोली-वाम संगठनों के साथ नहीं
जेएनयू छात्र आंदोलन: एबीवीपी ने लेफ्ट संगठन से अलग की अपनी राह
आउटलुक टीम

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के हजारों छात्र छात्रावास शुल्क वृद्धि को पूरी तरह वापस लिए जाने की मांग को विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों के प्रदर्शन और छात्रावास शुल्क वृद्धि का मामला संसद में भी गर्माया हुआ है। हर तरफ इसकी चर्चा हो रही है। इसी कड़ी में आज अखिल भारतीय छात्र संगठन (एबीवीपी) की जेएनयू इकाई ने जेएनयू परिसर में एक प्रेस कॉन्फ्रैंस रखी। एबीवीपी ने अपनी इस प्रेस कॉन्फ्रैंस में दिल्ली पुलिस के गलत तरह से बैरिकेड्स लगाने और जेएनयू छात्रों के साथ बदसलूकी करने का विरोध किया। साथ ही एबीवीपी ने वाम एकता के आंदोलन के साथ अपनी असहमति भी व्यक्त की और कहा कि अब वे इस आंदोलन में उनका साथ नहीं देंगे और अपना आंदोलन अलग जारी रखेंगे जिसमें हमारा मुख्य उद्देश्य छात्रों के हित होंगे और हम अपनी मांगे माने जाने तक अडिग रहेंगे।

आंदोलन का राजनीतिकरण कर रहे हैं

एबीवीपी का कहना है कि हमने आंदोलन में उसका साथ दिया लेकिन बावजूद इसके वे लगातार संघ और एबीवीपी के खिलाफ प्रचार कर रहे हैं और इस आंदोलन को छात्र मुद्दों से हटाकर इसका राजनीतिकरण करने में लगे हैं। एबीवीपी ने बताया कि छात्रों के मुद्दो से हटकर अब लेफ्ट यूनिटी मोदी सरकार पर नारे लगाने लगी है। साथ ही बाबरी मस्जिद और धारा 370 पर नारे लगा रहे हैं।

स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा के अपमान की निंदा की

उन्होंने कहा कि लेफ्ट यूनिटी का कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं था। उन्होंने छात्रों को पुलिस की कार्रवाई से बचाने के लिए कोई उपयुक्त रणनीति या सावधानी नहीं बनाई थी। आगे उन्होंने लेफ्ट यूनिटी पर निशाना साधते हुए कहा कि लेफ्ट ने कभी भी एबीवीपी के संघर्ष और प्रयासों को सराहना नहीं की जिसके चलते यूजीसी ने 6.7 करोड़ की राशि का वादा किया था। साथ ही इस संघर्ष को आगे बढ़ाने और हमारी मांगों को मजबूत करने के लिए इनमें से किसी भी तथ्य को स्वीकार नहीं किया गया। लेफ्ट यूनिटी ने स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा के अपमानित करने की भी स्पष्ट निंदा की।

यह है मुद्दा  

आपको बता दें पहले जेएनयू हॉस्टल के सिंगल सीटर रूम का किराया मात्र 20 रुपए था। जिसे मैनेजमेंट ने बढ़ाकर 600 रुपए कर दिया था। लेकिन, विरोध के बाद अब इसे 300 कर दिया गया है, जो पहले की फीस से 15 गुना ज्यादा है। इसी तरह जेएनयू हॉस्टल के डबल सिटर रूम का किराया पहले मात्र 10 रुपए था, जिसे मैनजमेंट ने बढ़ाकर 300 रुपए कर दिया था। लेकिन, विरोध के बाद इसमें 150 रुपए की कटौती कर दी गई। इसके बाद भी मौजूदा किराया पहले के किराए से 15 गुना ज्यादा है। 

इसी तरह वन टाइम मेस सिक्योरिटी पहले 500 रुपए वसूली जाती थी, जिसे बढ़ाकर 12 हजार कर दिया गया था। लेकिन, छात्रों ने विरोध किया तो इसे फिर 500 कर दिया गया। वहीं, पहले हॉस्टल में रहने वालों को बिजली और पानी के कोई पैसे नहीं देने पड़ते थे। लेकिन, नए फीस मैन्युअल में पैसे देने का प्रावधान है। 

पहले छात्रों से सर्विस चार्ज के तौर पर कोई रकम नहीं ली जाती थी, जिसे बढ़ाकर 1700 रुपए या इस्तेमाल के मुताबिक किया गया। लेकिन, अब बिल का 50 फीसदी सर्विस चार्ज छात्रों को देना होगा। इसी तरह पहले जेएनयू हॉस्टल में रहने वाले छात्रों से यूटिलिटी चार्ज के तौर पर पैसे नहीं लिए जाते थे। लेकिन, अब बिल की 50 फीसदी फीस भरनी होगी। हालांकि, छात्र बढ़ी हुई फीस में आशिंक कटौती पर राजी होने को तैयार नहीं हैं। उनकी मांग है कि जो फीस पहले थी वही फीस दोबारा कर दी जाए।

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