Home देश मुद्दे लोकलाइजेशन की कमी से 50 करोड़ लोगों से दूर है इंटरनेट, डिजिटल इंडिया में अड़चन

लोकलाइजेशन की कमी से 50 करोड़ लोगों से दूर है इंटरनेट, डिजिटल इंडिया में अड़चन

आउटलुक टीम - NOV 18 , 2019
लोकलाइजेशन की कमी से 50 करोड़ लोगों से दूर है इंटरनेट, डिजिटल इंडिया में अड़चन
भाषांतर कार्यक्रम के जरिए क्षेत्रीय भाषाओं को इंटरनेट से जोड़ने पर बल
आउटलुक टीम

भले ही मोदी सरकार डिजिटल इंडिया की बात कर रही हो और इसके जरिए अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचने की बात कर रही हो लेकिन यह तब तक मुमकिन नहीं है जब तक सभी लोगों तक इंटरनेट ना पहुंच सके। अगर इंटरनेट पहुंच भी जाए तो वो अगर उनकी स्थानीय भाषा में उपलब्ध न हो तो उसका फायदा भी नहीं है। भारत में 50 करोड़ ऐसे लोग हैं जो स्थानीय भाषा न होने की वजह से इंटरनेट दूर हैं। यह बात आज फिक्की-इंडियन लैंग्वेज इंटरनेट एलायंस (फिक्की-आईएलआईए) भाषांतर नाम के एक कार्यक्रम में सामने आई। जिसमें मौजूद विशेषज्ञों ने बताया कि अगर इंटरनेट को स्थानीय भाषांओं से जोड़ा जाए तो भारत एक ट्रिलियन डॉलर डिजिटल अर्थव्यवस्था बन सकती है।

इंटरनेट पर इंडिक कंटेंट उपयोगकर्ताओं की संख्या बढ़ रही है

डिजिटल अर्थव्यवस्था पर भारतीय भाषाओं के प्रभाव के बारे में बोलते हुए भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के सचिव श्री अजय प्रकाश साहनी ने कहा कि भारतीय भाषा के उपयोगकर्ताओं में बेतहाशा वृद्धि हो रही है जोकि इंटरनेट के खजाने के माध्यम से भारतीय भाषा के कंटेंट का इस्तेमाल अपनी सुविधानुसार करने के लिए उत्सुक हैं। इंटरनेट पर इंडिक कंटेंट उपयोगकर्ताओं की बढ़ती संख्या को सहयोग करने के लिए उस अनुपात से नहीं बढ़ा है। ज्यादातर भारतीयों  के पास अपनी संबंधित भाषाओं में इंटरनेट पर उपयोगी कंटेंट तक पहुंच का अवसर नहीं है।

डिजिटल सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा

उन्होनें कहा कि मैं फिक्की-आईएलआईए द्वारा उठाई गई पहलों का स्वागत करता हूं जोकि देशभर के प्रमुख हितधारकों को एकसाथ लेकर आई है। ये सभी साथ मिलकर एक मजबूत इंडिक इकोसिस्टम  बनाएंगे जोकि इंडिक में पेश की जाने वाली अधिक इंटरनेट सेवायें मुहैया कराएगा और वासतव में भारत के डिजिटल सशक्तिकरण को बढ़ावा देगा।

इंटरनेट की पहुंच बढ़ रही है

इसका एकमात्र उद्देश्य स्थानीय भाषा इंटरनेट है जो एक ट्रिलियन डॉलर डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए भारत की प्रगति की कुंजी है। जिसमें प्रतिभागियों ने सभी के लिए इंटरनेट पर विचार-विमर्श किया ताकि अगले 50 करोड़ उपयोगकर्ताओं के लिए भारतीय भाषाओं में इंटरनेट मुहैया कराया जा सके। इस कार्यक्रम का संचालन अजय डाटा ने किया जो फिक्की आईसीटी और डिजिटल अर्थव्यवस्था समिति के सह-अध्यक्ष हैं। उन्होनें कहा कि भारत में इंटरनेट की पहुंच बढ़ रही है और लगभग 500 मिलियन नए इंटरनेट उपयोगकर्ता अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों से गैर-अंग्रेजी बोलने वाले होंगे।

एक ट्रिलियन डॉलर डिजिटल अर्थव्यवस्था बनने की क्षमता को साकार करना है

साथ ही उन्होनें बताया कि सभी के लिए इंटरनेट के डिजिटल इंडिया मिशन को पूरा करने के लिए इंटरनेट पर देशी भाषा सामग्री की उपलब्धता बढ़ाने और गांवों व ग्रामीण क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी समाधान की प्रयोज्यता बेहतर बनाने की आवश्यकता है। हमारा उद्देश्य सामग्री रचनाकारों, सामग्री की उपलब्धता मुमकिन बनाने वालों, विज्ञापन करने वालों और भारतीय परितंत्र के अन्य हितधारकों के विकास की अगली लहर को बढ़ावा देने और भारत में निहित एक ट्रिलियन डॉलर डिजिटल अर्थव्यवस्था बनने की क्षमता को साकार करने की राह सुगम बनाने के लिए सरकारों के 'डिजिटल इंडिया' विजन के समर्थन  के अपने प्रयासों का निरंतर विस्तार करना है।

इस पहल की तात्कालिक जरूरत थी

गृह मंत्रालय, भारत सरकार के राजभाषा विभाग में सचिव, श्रीमती अनुराधा मित्रा ने भी परिसंवाद के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यह देखकर अच्छा लग रहा है कि फिक्की और आईटी मंत्रालय ने सभी भारतीयों के लिए ऑनलाइन कंटेंट एवं जानकारी उपलब्ध कराने की तात्कालिक जरूरत को संबोधित करने के लिए पहलों को शुरू किया है। यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाना महत्वपूर्ण है कि सूचना एवं संचार उपकरणों पर इस्तेमाल की जाने वाली सभी 22 आधिकारिक भाषाओं का उपयोग करने के लिए आधुनिक तकनीक की सेवा का लाभ उठाया जा रहा है।

हमारी भाषाओं में काफी विविधता है

आगे उन्होनें कहा कि भारत में देश के अलग-अलग हिस्सों में बोली और लिखी जाने वाली भाषाओं के लिहाज से काफी विविधता है। यह भारत को दुनिया में अनूठा देश बनाता है। मैं फिक्की-आईएलआईए को पेशेवर एवं स्थायी भाषा उद्योग का निर्माण करने के लिए भाषांतर का आयोजन करने के लिए बधाईयां देती हूं। एक मजबूत एवं बहुभाषाई इंडिक इंटरनेट से भारत में लगभग आधे अरब लोग इंटरनेट का प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने में सक्षम होंगे।

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