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क्या पर्रिकर की घर वापसी का शिवराज पर होगा असर

MAR 13 , 2017
मनोहर पर्रिकर की गोवा वापसी का रास्ता साफ हो गया है। उनके गोवा जाने के बाद नए रक्षा मंत्री की नियुक्ति पर कवायद होने लगी है। यदि गोवा में स्पष्ट बहुमत आता तो बात और थी। लेकिन जोड़ तोड़ के लिए विधायकों के आने की शर्त इस पर है कि पर्रिकर यदि मुख्यमंत्री की कमान संभाले तो वे साथ आएंगे। ऐसे में कई हथियार सौदे और रक्षा खरीद की प्रक्रिया को सरल बनाने वाले रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर की जगह कौन लेगा।

गोवा में सत्ता का लड्डू अपने हाथ में ही रखने के लिए पर्रिकर गोवा जा रहे हैं। यदि सूत्रों की मानें तो उनकी जगह मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को रक्षा मंत्री बनाया जा सकता है। पार्टी नेतृत्व ने इस पर विचार मंथन भी किया और शिवराज के कामकाज उनकी कमजोरियों-खामियों पर भी चर्चा हुई। रविवार शाम को संसदीय बोर्ड की बैठक के दौरान दिल्ली में ही मौजूद चौहान उनकी मंशा भी पूछी गई थी। हालांकि उनका जवाब क्या रहा यह पता नहीं चला है। लेकिन मोदी मर्जी पूछ कर कुछ नहीं करते यह सभी जानते हैं।

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लेकिन इस ड्रामे के पीछे बहुत पहले से ही एक पटकथा तैयार है जिसका अंत मोदी अपनी शैली में लिखना चाहते हैं। व्यापमं घोटाले के बाद से ही शिवराज को प्रदेश से हटाए जाने की चर्चा जोरों पर थी। ऐसे में सूत्रों का कहना है कि ऐसे में शिवराज के गले में रक्षा मंत्री के नाम की माला डाल कर उन्हें सम्मानजनक रूप से केंद्र में लाया जा सकता है। कहने को तो यह भी कहा जा रहा है कि मनोहर पर्रिकर की जगह किसी कद्दावर नेता को ही लाया जा सकता है। ऐसे कद्दावर नेता शिवराज ही हैं। शिवराज को अपनी ही तारीफ कराना महंगा पड़ गया है। लोकसभा चुनाव से पहले सन 2014 में शिवराज के समर्थकों ने केंद्र तक यह सूचनाएं पहुंचाई थीं कि शिवराज मोदी से भी बेहतर मुख्यमंत्री रहे हैं और भाजपा नेताओं ने भी उन्हें मोदी से बड़ा चेहरा बताया था।

यदि मोदी की यह योजना सिरे चढ़ती है तो अगला निशाना राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे होंगी। शिवराज सिंह चौहान के साथ-साथ उन्हें भी बहुत दिनों से हटाने की चर्चाएं चल रही हैं। वसुंधरा की भी मोदी से टकराहट की यदा-कदा खबरें आती रहती हैं। भाजपा से जुड़े नेताओं का मानना है कि मोदी राजस्थान और मध्यप्रदेश के अगले विधानसभा चुनाव किसी नए चेहरे के साथ लड़ना चाहते हैं ताकि जीत का श्रेय वह खुद ले सकें।  


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