प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की शुक्रवार से शुरू हो रही दो देशों की चार दिवसीय यात्रा में जापान के साथ व्यापार और निवेश संबंधों को बढ़ावा देने तथा चीन के साथ संबंधों को सामान्य बनाने के कदमों पर मुख्य ध्यान रहने की संभावना है।
प्रधानमंत्री मोदी की जापान और चीन की यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार और शुल्क नीतियों के कारण भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव पैदा हो गया है।
प्रधानमंत्री ने जापान और चीन के दौरे पर रवाना होने से पहले बृहस्पतिवार रात को विश्वास जताया कि यह यात्रा राष्ट्रीय हितों एवं प्राथमिकताओं को आगे ले जाएंगी।
मोदी ने रवाना होने से पहले वक्तव्य में कहा, ‘मुझे विश्वास है कि जापान और चीन की मेरी यात्राएं हमारे राष्ट्रीय हितों और प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाएंगी तथा क्षेत्रीय और वैश्विक शांति, सुरक्षा और सतत विकास को आगे बढ़ाने में सार्थक सहयोग के निर्माण में योगदान देंगी।’
मोदी 29-30 अगस्त को जापान यात्रा के दौरान जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा के साथ वार्षिक शिखर वार्ता करेंगे।
उनकी यात्रा के पहले दिन होने वाली वार्ता में जापान द्वारा भारत में अपने निवेश लक्ष्य को दोगुना करने का वादा किए जाने की उम्मीद है तथा दोनों पक्षों द्वारा रक्षा और प्रौद्योगिकी सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाने की संभावना है।
जापान से मोदी 31 अगस्त से दो दिवसीय यात्रा पर चीन के शहर तियानजिन जाएंगे।
रविवार को प्रधानमंत्री चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ वार्ता करेंगे, जिसमें पूर्वी लद्दाख सीमा विवाद के बाद द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने के लिए आगे के कदमों पर ध्यान केंद्रित करने की संभावना है।
प्रधानमंत्री ने जापान यात्रा पर कहा, ‘‘हम अपनी विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी के अगले चरण को आकार देने पर ध्यान केंद्रित करेंगे। दोनों देशों के बीच साझेदारी ने पिछले 11 वर्षों में लगातार और महत्वपूर्ण प्रगति की है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम अपने सहयोग को नयी उड़ान देने, आर्थिक व निवेश संबंधों के दायरे एवं महत्वाकांक्षाओं का विस्तार करने, कृत्रिम मेधा (एआई) व सेमीकंडक्टर सहित नयी और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग को आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे।’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह यात्रा भारत-जापान सभ्यतागत और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने का भी एक अवसर होगी।
यात्रा के दूसरे चरण में, प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त और एक सितंबर को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन के शहर तियानजिन की यात्रा करेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘मैं शिखर सम्मेलन के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य नेताओं से मिलने के लिए भी उत्सुक हूं।’’
मोदी ने एससीओ के साथ नयी दिल्ली के जुड़ाव का भी ज़िक्र किया और कहा कि भारत इस समूह का एक ‘सक्रिय और रचनात्मक’ सदस्य है। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘अपनी अध्यक्षता के दौरान, हमने नए विचार पेश किए हैं और नवाचार, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्रों में सहयोग की पहल की है।’ उन्होंने कहा, ‘भारत साझा चुनौतियों का समाधान करने और क्षेत्रीय सहयोग को गहरा करने के लिए एससीओ सदस्यों के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।’