Home देश भारत स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी की पिछली घोषणाओं से कितनी बदली देश की तस्वीर

स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी की पिछली घोषणाओं से कितनी बदली देश की तस्वीर

आउटलुक टीम - AUG 14 , 2019
स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी की पिछली घोषणाओं से कितनी बदली देश की तस्वीर
स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी की पिछली घोषणाओं से कितनी बदली देश की तस्वीर
आउटलुक टीम

दोबारा प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी गुरुवार को स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से देश को एक बार फिर संबोधित करेंगे। यह मोदी के दूसरे कार्यकाल का पहला और दोनों कार्यकालों को मिलाकर छठवां संबोधन होगा। पिछले पांच संबोधनों में प्रधानमंत्री ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। जानिए आज इन घोषणाओं की जमीनी वास्तविकता क्या है।

2014

जनधन योजना

सभी नागरिकों को बैंकिंग सेवा पहुंचाने के लिए जनधन योजना की घोषणा की गई। इसमें इस साल जून तक 36.1 करोड़ बैंक खाते खोले गए। इनमें एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा धनराशि जमा हुई। 28.5 करोड़ ग्राहकों को रुपे कार्ड भी जारी किए गए। जीरो बैलेंस जनधन खातों का अनुपात भी शुरुआत में 77 फीसदी था जो घटकर 20 फीसदी रह गया।

स्किल इंडिया

कुशल बनाकर रोजगार पाने योग्य बनाने के लिए स्किल इंडिया में 2022 तक 40 करोड़ युवाओं को ट्रेनिंग देने की लक्ष्य रखा गया। कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय का दावा है कि अब तक तीन करोड़ युवाओं को ट्रेनिंग की गई है। लेकिन सरकार ने इससे रोजगार पाने वालों की कोई सटीक जानकारी नहीं दी है। तथ्य यह है कि बेरोजगार की दर 40 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। बेरोजगारी की स्थिति से इस पहल का सकारात्मक प्रभाव कहीं नजर नहीं आता है।

मेक इन इंडिया

मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में निवेश बढ़ाकर और ग्लोबल हब बनाकर आर्थिक विकास दर सुधारने और रोजगार अवसर के नए अवसर पैदा करने के लिए यह घोषणा की गई। मैन्यूफैक्चरिंग की ग्रोथ रेट 12-14 फीसदी तक बढ़ाने, जीडीपी में इसकी हिस्सेदारी 2022 तक 16 फीसदी से बढ़ाकर 25 फीसदी करने और 10 करोड़ रोजगार पैदा करने का लक्ष्य रखा गया। लेकिन ये लक्ष्य अभी भी दूर दिखाई देते हैं। ग्लोबल निर्यात में भारत की हिस्सेदारी अभी भी दो फीसदी से कम है। रोजगार के मोर्चे पर भी कोई अच्छी तस्वीर नहीं दिखती है।

डिजिटल इंडिया

इस पहल के तहत सरकार की ओर से दी जाने वाली सेवाएं डिजिटल मोड में प्रदान करने की पहल की गई। उमंग मोबाइल एप के जरिये आधार, डिजिलॉकर, भारत बिल पेमेंट, पैन, ईपीएफओ, बिल पेमेंट, एजूकेशन, जॉब सर्च, रेलवे टिकट बुकिंग जैसी केंदर् और राज्य सरकार की 1200 से ज्यादा सेवाएं जोड़ी गईं। इससे लोगों को कुछ राहत अवश्य मिली लेकिन जानकारी के अभाव और सरकारी विभागों की सुस्त प्रणाली के कारण नागरिकों के जीवन में कोई उल्लेखनीय सहूलियत का अनुभव नहीं हो रहा है। इंटरनेट की सुस्त स्पीड और सरकारी बाबुओं के उलझाऊ कार्यप्रणाली के कारण भी सेवाओं का स्तर बहुत नहीं सुधरा। डिजिटल पेमेंट की बात करें तो मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में इसमें दस गुना वृद्धि हुई लेकिन जीडीपी के मुकाबले नकदी प्रचलन सिर्फ आधा फीसदी घटकर 11.5 फीसदी हो पाया। नोटबंदी से पहले यह अनुपात 12 फीसदी था।

स्वच्छ भारत अभियान

स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए शुरू किए गए इस अभियान में इस साल दो अक्टूबर तक 1.96 लाख करोड़ रुपये खर्च करके हर घर में और सार्वजनिक स्थानों पर नौ करोड़ शौचालय बनाने का लक्ष्य तय किया गया ताकि खुले में शौच से मुक्ति मिल सके। जबकि पिछले साल 8.6 करोड़ शौचालय बनाने का दावा किया गया। खुले में शौच जाने वालों की संख्या 55 करोड़ से घटकर 15 करोड़ रह गई। हालांकि गांवों में बड़ी संख्या में लोग शौचालय घर में बनने के बावजूद खुले मैदान में ही शौच जाना पसंद करते हैं। शहरों में भी स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ी है लेकिन अभी भी जगह-जगह गंदगी दिखना आम बात है। इसके पीछे कई कारण हैं।

सांसद आदर्श ग्राम योजना

इस योजना में गोद लिए गए गांवों के समग्र विकास के लिए तीन चरण चलाए गए। वैसे तो गोद लिए गए गांवों के विकास में अपेक्षित सफलता नहीं मिल पायी। लेकिन सांसदों द्वारा गांव गोद लेने का अनुपात भी समय के साथ घटा है। पहले चरण (2014-16) में लोकसभा के 543 सांसदों में से 500 और राज्यसभा के 253 में से 203 सांसदों ने गांव गोद लिए। दूसरे चरण (2016-18) में लोकसभा से सिर्फ 326 और राज्य सभा के 121 सांसदों ने गांव गोद लिए। तीसरे चरण में लोकसभा के 97 और राज्यसभा के 27 सांसदों ने विकास के लिए गांवों को अपनाया।

2015

स्टार्ट अप इंडिया-स्टैंड अप इंडिया

देश की आवश्यकता का तकनीकी समाधान देते हुए उद्यमिता विकास के लिए यह स्कीम शुरू की गई ताकि टेक्नोलॉजी क्षेत्र के उद्यमियों को नया वेंचर शुरू करने में आसानी हो। 2016 से 15,113 मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स शुरू हुए। इनमें से 45 फीसदी स्टार्टअप्स टियर-2 और टियर-3 शहरों में शुरू हुए। इनसे करीब डेढ़ लाख रोजगार पैदा हुए। 25 राज्यों ने अपनी स्टार्टअप पॉलिसी बनाई। लेकिन स्टार्टअप्स ने वेंचर कैपिटल फंडों से निवेश मिलने में परेशानियां होने की शिकायतें सरकार से कीं। आयकर की धारा 56 के तहत एंजेल निवेशकों को 30 फीसदी टैक्स देना पड़ता था। हाल में सरकार ने बजट में उन्हें इस नियम से राहत देने की घोषणा की। स्टार्टअप्स को निवेशकों और बैंकों से पूंजी मिलने में परेशानी अभी भी मुद्दा बनी हुई है।

गांवों का विद्युतीकरण

सरकार ने पिछले साल 100 फीसदी गांवों के विद्युतीकरण की घोषणा की। दरअसल 18452 गांवों ऐसे मिले जहां बिजली नहीं थी। 15 अगस्त 2015 को इन सभी गांवों में 1000 दिनों में बिजली पहुंचाने की घोषणा की। लेकिन वास्तविकता यह है कि गांवों के 90 फीसदी घरों में बिजली नहीं पहुंची है। अनुमान है कि करीब तीन करोड़ घर बिजली के कनेक्शन से वंचित हैं। गांव ही नहीं बल्कि शहरों में भी बिजली की अनिश्चित सप्लाई किसी से छिपी नहीं है।

निचली भर्तियों में इंटरव्यू का खात्मा

सरकार ने केंद्र और राज्य सरकार में भर्तियों में भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए ग्रुप सी और डी में इंटरव्यू खत्म करने की पहल की। केंद्र सरकार और उसके उपक्रमों में यह व्यवस्था लागू हो गई। 20 राज्यों ने भी इस दिशा में काम किया। लेकिन हरियाणा, नगालैंड, ओडिशा, त्रिपुरा, मेघालय, मिजोरम, सिक्किम, जम्मू कश्मीर, पश्चिम बंगाल सहित नौ राज्य इस मामले में सुस्त रहे। अभी भी देश में यह व्यवस्था पूरी तरह लागू नहीं हो पायी है।

वन रैंक, वन पेंशन स्कीम

लंबे समय से पूर्व सैनिकों द्वारा की जा रही इस मांग को पूरा करने की घोषणा की। इसमें किसी एक रैंक के सैनिकों को एक समान पेंशन मिलेगा, भले ही उन्हें कभी भी रिटायर किया गया हो। लेकिन इसे लागू करने में परिभाषा को लेकर पूर्व सैनिकों में असंतोष रहा। पूर्व सैनिकों और रिटायर्ड सैन्य अधिकारियों ने सरकार पर वायदा खिलाफी करने का आरोप लगाया और धरना-प्रदर्शन भी दिया।

प्राकृतिक संसाधनों की आवंटन नीति

कोयला, खनिज और स्पेक्ट्रम के आवंटन के लिए सरकार ने नीलामी की विस्तृत व्यवस्था तैयार की। सरकार का दावा है कि पारदर्शी नीति लागू करने से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा और सरकारी खजाने को अधिकतम राजस्व मिलेगा। 85 कोयला खदानों में 25 खदानें इलेक्ट्रॉनिक नीलामी के जरिये आवंटित की गईं जबकि 60 खदानें सरकारी कंपनियों को सीधे तौर पर आवंटित की गई। स्पेक्ट्रम की नीलामी में सरकार को ज्यादा सफलता नहीं मिल पाई।

2016

प्रधानमंत्री ने कोई नई घोषणा करने के बजाय पिछली घोषणाओं और वायदों पर हुए काम के बारे में बात की। उन्होंने दावा किया कि पिछले दो साल में हुए कार्यों के बारे में विस्तार से बताना शुरू करें तो उन्हें पूरे हफ्ते बोलना होगा। उन्होंने लोगों की संतुष्टि के लिए सरकार के कार्यों का असर जमीन दिखने पर जोर दिया।

2017

न्यू इंडिया

मोदी ने तीसरी बार के भाषण में न्यू इंडिया की बात की जिसमें 2022 तक गरीबों को पक्का मकान और किसानों की दोगुनी आय होगी। इसके अलावा युवा और महिलाओं के लिए पर्याप्त अवसर, भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, आतंकवाद, सांप्रदायिकता और जातिवाद के खात्मे का वायदा किया गया। इसके अलावा गैलेंट्री अवार्ड विनर्स सैनिकों की वीरगाथाओँ से लोगों को अवगत कराने के लिए वेबसाइट लांच की गई।

2018

पिछली सरकार के कार्यकाल में स्वतंत्रता दिवस के आखिरी संबोधन में प्रधानमंत्री ने पिछली योजनाओं के प्रदर्शन, विभिन्न मुद्दों पर सरकार के दृष्टिकोण और आगे के विजन पर बात की।

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