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नीतीश और राजनाथ अब भी निभाते हैं मेल-जोल की पुरानी परंपरा

केंद्र में सत्ताशीन भारतीय जनता पार्टी और विपक्ष के नेताओं के बीच तनाव और कड़वाहट की खबरें मीडिया में आए दिन सुर्खियां बनती रहती हैं। लेकिन कभी-कभार ऐसे मौके दिख जाते हैं, जब राजनीतिक नेता निजी संबंधों को अहमियत देने की परंपरा निभाते नजर आते हैं। हाल में दिल्ली में कुछ ऐसे राजनीतिक आयोजन हुए, जिनमें कट्टर विरोधी एक-दूसरे से हंसते-बोलते दिखे। शुरुआत बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने की, जो दो दिनों के लिए दिल्ली दौरे पर आए और केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह एवं केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद समेत तमाम राजनीतिक दलों के नेताओं से बाहें खोलकर मिले-बतियाए।
नीतीश और राजनाथ अब भी निभाते हैं मेल-जोल की पुरानी परंपरा

दिल्ली में एक निजी आयोजन में नीतीश कुमार, उनकी पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव, राष्ट्रीय लोकदल के नेता अजित सिंह, राजीव शुक्ला समेत कांग्रेस के तमाम नेता, केन्द्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, रविशंकर प्रसाद, भाजपा नेता सुधांशु मित्तल एक – दूसरे के साथ हंसते- बोलते दिखे। हालांकि, नीतीश कुमार के शराबबंदी अभियान को लेकर प्रतिपक्ष, खासकर भाजपा नेताओं की जैसी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है, उस स्थिति में इन नेताओं के हंसते-बोलते दिखने की कल्पना ही दूभर है। इसी तरह, शरद यादव के यहां इफ्तार पार्टी में भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी का शामिल होना या जदयू के नेता केसी त्यागी के घर पर एक निजी आयोजन में सत्ता पक्ष और प्रतिपक्ष की तमाम हस्तियों का हंसते-बोलते दिखना राजनीति की एक पुरानी स्वस्थ परंपरा की याद दिलाता रहा। श्री त्यागी के यहां उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद, भाकपा नेता ए. राजा जुटे थे।

दरअसल, राजनीति में अटल बिहारी वाजपेयी, इंदिरा गांधी की परंपरा पर चल रहे पुराने स्कूल के आज के कई नेता राजनीति और निजी संबंधों को आज भी अलग रखते हैं। ऐसे नेता अतीत के कुछ उदाहरण बताते हैं। एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, 1977 में जब जनता पार्टी की सरकार बनी और अटल बिहारी वाजपेयी पटना गए, तब पूर्ववर्ती जनसंध के एक नेता के घर गए। वहां उनके परिवार के एक सदस्य ने इंदिरा गांधी के लिए अशिष्ट शब्दों का प्रयोग किया। तब वाजपेयी ने उनको नसीहत देते हुए कहा था, उनके साथ हमारा राजनीतिक विरोध रहा है, पर ऐसी भाषा का इस्तेमाल कतई नहीं करना चाहिए। इसी तरह का एक उदाहरण संपूर्ण क्रांति के पुरोधा जयप्रकाश नारायण का है। 1977 में जनता पार्टी की सरकार बनने के कुछ समय बाद जेपी दिल्ली पहुंचे और गांधी शांति प्रतिष्ठान में ठहरे। उन्होंने इंदिरा गांधी से मिलने का तय किया। तब जेपी से मिलने पहुंचे संघ से जुड़े कुछ नेताओं ने उनके इस कार्यक्रम को लेकर आपत्ति की। उनलोगों ने जेपी से कहा, आप इंदिरा गांधी के पास कैसे जा सकते हैं? जेपी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, मैं पूर्व प्रधानमंत्री नहीं, अपने मित्र जवाहरलाल नेहरू की बेटी इंदू से मिलने जा रहा हूं। 

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