Home देश भारत मुंबई ब्लास्ट केस में रिहा हुए वाहिद शेख ने जेल के अनुभवों पर लिखी किताब- 'बेगुनाह कैदी'

मुंबई ब्लास्ट केस में रिहा हुए वाहिद शेख ने जेल के अनुभवों पर लिखी किताब- 'बेगुनाह कैदी'

आउटलुक टीम - MAR 14 , 2019
मुंबई ब्लास्ट केस में रिहा हुए वाहिद शेख ने जेल के अनुभवों पर लिखी किताब- 'बेगुनाह कैदी'
मुंबई ब्लास्ट केस में रिहा हुए वाहिद शेख
आउटलुक टीम

साल 2006 में मुंबई हमलों में गिरफ्तारी के बाद 2015 में बरी किए गए एक स्कूल टीचर वाहिद शेख ने अब एक लेखक की भूमिका निभाई हैं। उन्होंने एक किताब लिखी है जिसे बाजार में भी अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। यह किताब शेख की जेल के अनुभव पर आधारित हैं। यही नहीं वाहिद शेख ने एलएलबी की डिग्री भी हासिल कर ली है। उन्होंने कहा कि वे कानूनी रूप से जरूररतमंदों की मुफ्त में मदद करेंगे।

जेल में रहते हुए वाहिद शेख ने जो किताब लिखी है वह है ‘बेगुनाह कैदी’। इस किताब को बाजार में अच्छा रिस्पांस मिल रहा है। 11 जुलाई 2006 को मुंबई की लोकल ट्रेन में सिलसिलेवार धमाके हुए थे, जिसमें 189 लोगों की मौत हुई थी, मामले के आरोप में गिरफ्तार किए गए थे वाहिद शेख।  

जेल से निकलने के बाद पूरी की कानून की पढ़ाई

शेख को 2006 में हुए मुंबई आतंकी ब्लास्ट मामले में गिरफ्तार किया गया था। लेकिन, उनके खिलाफ कोई भी सबूत नहीं मिले और उन्हें साल 2015 में दोषमुक्त करार देते हुए रिहा कर दिया गया। बरी होने के बाद उन्होंने टीचिंग पेशे को फिर से शुरू किया और कानून की पढ़ाई भी पूरी की। लेकिन, एक सरकारी स्कूल में शिक्षक होने की वजह से उन्हें भारत के बार कमीशन द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुसार कानून का अभ्यास करने की अनुमति नहीं हैं।

जेल में रहकर लिखी किताब

वाहिद शेख ने जेल में रहने के दौरान वहां के अनुभवों को एक किताब के माध्यम से दुनिया के सामने रखा है। 'बेगुनाह कैदी' नाम की इस किताब को शेख ने जेल में रहने के दौरान लिखी। कुछ दिनों पहले इसे पब्लिश करवाने में सफलता पाई। दिल्ली के एक प्रकाशक ने दो भाषाओं - हिंदी और उर्दू में पुस्तक पब्लिश की है। अब तक पुस्तक की एक हजार प्रतियां बेची जा चुकी हैं।

'निर्दोष लोगों की मदद करेगी यह किताब'

इस किताब को लिखने के पीछे शेख ने कहा- "मुझे उम्मीद है कि यह पुस्तक और मेरा अनुभव, अन्य निर्दोष लोगों की मदद करेंगे, जिन्हें बिना किसी कारण के जेल में बंद कर किया गया है।" हाल ही में, दिल्ली के एक प्रकाशक ने दो भाषाओं- हिंदी और उर्दू में यह पुस्तक निकाली है। अब तक पुस्तक की एक हजार प्रतियां पहले ही बेची जा चुकी हैं।

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