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दादा ने लड़ी आजादी की लड़ाई, तो बेटा इंटरनेशनल शूटर, तो मुख्तार कैसे बन गया डॉन

पंजाब की रोपड़ जेल में बंद मुख्तार अंसारी को लेकर उत्तर प्रदेश पुलिस आज सुबह 4 बजकर 34 मिनट पर बांदा जेल...
दादा ने लड़ी आजादी की लड़ाई, तो बेटा इंटरनेशनल शूटर, तो मुख्तार कैसे बन गया डॉन

पंजाब की रोपड़ जेल में बंद मुख्तार अंसारी को लेकर उत्तर प्रदेश पुलिस आज सुबह 4 बजकर 34 मिनट पर बांदा जेल पहुंची। इसके बाद 4 डॉक्टरों की टीम ने मुख्तार अंसारी का मेडिकल चेकअप किया। पहले तो मुख्तार को सामान्य बैरक में रखा गया था, मगर बाद में उसे जेल के अंदर बैरक नंबर 15 में शिफ्ट किया गया। फिर अचानक ही हुए उसे बैरक नंबर-16 में शिफ्ट कर दिया गया है। जिस मुख्तार अंसारी की चर्चा एक कुख्यात बाहुबली के तौर पर होती है उसके परिवार के लोगों की छवि इससे बेहद उलट है। उनके दादा से लेकर नाना तक देश की नामचीन हस्ती रहे हैं। आइए जानते हैं उनके परिवार से जुड़ी कुछ हैरान करने वाली बातें-

पूर्वांचल के डॉन कहे जाने वाले मुख्तार अंसारी पर भले ही दर्जनों मुकदमे दर्ज हों मगर उनका पारिवारिक इतिहास काफी गौरवशाली रहा है।  मुख्तार अंसारी के दादा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके हैं। उनके दादा का नाम भी मुख्तार ही था जिन्होंने देश की आजादी के लिए अहम भूमिका निभाई थी।  दादा की तरह मुख्तार के चाचा ने भी देश के लिए अपनी सेवाएं दी थीं। मुख्तार के चाचा हामिद अंसारी देश के उप राष्ट्रपति थे। जबकि  मुख्तार के भाई अफजल अंसारी इस समय गाजीपुर से सांसद हैं। उनके नाना का भी नामचीन हस्तियों में शामिल था।

मुख्तार अंसारी के परिवार के गौरवशाली इतिहास के कारण मऊ में परिवार की काफी सम्मान है।  मुख्तार अंसारी के दादा डॉ. मुख्तार अहमद अंसारी स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन के दौरान 1926-27 में इंडियन नेशनल कांग्रेस के अध्यक्ष रहे हैं। उनका नाम महात्मा गांधी के करीबियों में शामिल था।

जबकि मुख्तार अंसारी के पिता सुब्हानउल्लाह अंसारी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता थे। अपनी साफ सुथरी छवि के कारण 1971 में उन्हें नगर पालिका चुनाव में निर्विरोध चुना गया था। अंसारी परिवार की इसी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया था मुख्तार के चाचा हामिद अंसारी ने। बाद में वे भारत के उपराष्ट्रपति बने। उपराष्ट्रपति होने से पहले वह विदेश सेवा में थे।

वहीं मुख्तार के अन्य परिवार के सदस्यों की तरह नाना का भी नाम प्रतिष्ठित हस्तियों में शुमार था। ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान, जिन्हें अपनी सेवाओं के लिए महावीर चक्र दिया गया था, वह मुख्तार के नाना थे। 1947 में इन्होंने न केवल भारत की तरफ से नौशेरा की लड़ाई लड़ी थी बल्कि हिंदुस्तान को जीत भी दिलाई थी। हालांकि, इस जंग में वह खुद शहीद हो गए थे।

मुख्तार अंसारी के पूर्वज ही नहीं बल्कि उनकी संतान भी उनकी छवि से उलट नजर आती है।  मुख्तार के बेटे अब्बास अंसारी शॉट गन शूटिंग के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी रह चुके हैं। टॉप शूटरों में शामिल अब्बास ने दुनियाभर में कई पदक जीते हैं।

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