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इन 18 मजबूत सबूतों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने दिया ऐतिहासिक फैसला, जानें क्या दी दलील

बहुचर्चित राम जन्मूभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आज ऐतिहासिक फैसला...
इन 18 मजबूत सबूतों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने दिया ऐतिहासिक फैसला, जानें क्या दी दलील

बहुचर्चित राम जन्मूभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आज ऐतिहासिक फैसला सुनाया। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच ने फैसला सुनाया कि विवादित जमीन राम जन्मभूमि न्यास को दी गई है। मस्जिद के लिए अयोध्या में ही अलग से पांच एकड़ जमीन दी जाएगी। सबसे पहले चीफ जस्टिस ने शिया वक्फ बोर्ड की याचिका खारिज की। इसके बाद निर्मोही अखाड़े का भी दावा खारिज हो गया। यह फैसला सभी जजों की सहमति से हुआ है। फैसला सुनाने के दौरान सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने सबूतों का भी हवाला दिया, जो पुरात्व विभाग ने मंदिर होने के सबूत के तौर पर पेश किए।

जानिए किन बिंदुओं के आधार पर दिया गया अयोध्या मामले में ऐतिहासिक फैसला

- कोर्ट ने भारतीय पुरातत्विक सर्वेक्षण यानी आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) की रिपोर्ट के आधार पर यह भी कहा है कि मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनाई गई थी। विवादित जमीन के नीचे का ढांचा इस्लामिक मूल का नहीं था।

- मुस्लिम गवाहों ने भी माना कि दोनों पक्ष पूजा करते थे। मस्जिद कब बनीं साफ नहीं है। एएसआई की रिपोर्ट के मुताबिक खाली जमीन पर मस्जिद नहीं बनाई गई थी।

- पीठ ने कहा कि हिंदू अयोध्या को राम जन्मस्थल मानते हैं और रंजन गोगोई ने कहा कि कोर्ट के लिए थिओलॉजी में जाना उचित नहीं है, लेकिन पुरातत्व विभाग यह भी नहीं बता पाया कि मंदिर गिराकर मस्जिद बनाई गई थी।

- कोर्ट ने कहा कि सबूतों के आधार पर पता चला है कि 1528 में बाबर के सेनापति मीर बाकी ने मस्जिद बनवाई थी।

- रंजन गोगोई ने कहा कि आखिरी नमाज दिसंबर 1949 को पढ़ी गई थी, हम सबूतों के आधार पर फैसला करते हैं।

- रिकॉर्ड में दर्ज साक्ष्य बताते हैं कि विवादित जमीन का बाहरी हिस्सा हिंदुओं के अधीन था।

- एएसआई की रिपोर्ट में 12वीं सदी के मंदिर होने का जिक्र किया गया है।

- अयोध्या में रामजन्म के दावे का किसी ने विरोध नहीं किया।

- अंग्रेजों के जमाने से पहले बाहरी अहाते में हिंदू पूजा करते थे।

- हिंदू सीता रसोई में पूजा करते थे।

- हिंदू 1885 से बाहरी चबूतरे पर पूजा करते थे।

इस वजह से किया गया मुस्लिम पक्ष के दावे को खारिज

- 12वीं से 16वीं सदी तक वहां क्या था इसका कोई सबूत नहीं दिया गया।

- मुस्लिम के पास जमीन पर विशेष कब्जा होने का कोई प्रमाण नहीं मिला।

- मुस्लिम पक्ष जमीन पर अपना एकाधिकार साबित नहीं कर पाया।

- 18वीं सदी तक विवादित जगह पर नमाज का कोई रिकॉर्ड नहीं मौजूद है।

- अंग्रेजों के समय तक नमाज का कोई सबूत नहीं है।

- बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनी थी।

- एएसआई ने अपनी रिपोर्ट में मस्जिद का जिक्र नहीं किया।

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