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आईएमए ने की केंद्र सरकार से 'जागने' की अपील, लगाए कई आरोप, कहा- जल्द लगाएं लॉकडाउन

आउटलुक टीम - MAY 09 , 2021
आईएमए ने की केंद्र सरकार से 'जागने' की अपील, लगाए कई आरोप, कहा- जल्द लगाएं लॉकडाउन
प्रतीकात्मक तस्वीर
आउटलुक टीम

देश में कोरोनावायरस महामारी का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। इस बीच इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने शनिवार को कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को ‘जग’ जाना चाहिए और कोविड-19 महामारी से पैदा हो रही चुनौतियों से निपटने के लिए कदम उठाना चाहिए।

डॉक्टरों के संगठन ने एक बयान में यह भी आरोप लगाया कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोविड-19 की दूसरी लहर से निपटने के लिए उपयुक्त कदम नहीं उठाए। बयान में कहा गया, ‘‘आईएमए मांग करता है कि स्वास्थ्य मंत्रालय को निद्रा से जग जाना चाहिए और कोविड-19 महामारी की वजह से बढ़ती जा रहीं चुनौतियों से निपटने के लिए कदम उठाना चाहिए।’’

एसोसिएशन ने कहा कि यह देखने को मिला है कि आईएमए और अन्य योग्य पेशेवर सहयोगियों द्वारा सामूहिक चेतना की अपील, सक्रिय संज्ञान और अनुरोधों को 'कूड़ेदान' में डाल दिया जाता है और फैसले 'जमीनी हकीकत को समझे बिना' लिए जाते हैं।

बयान के मुताबिक, ‘‘कोविड-19 महामारी की दूसरी खौफनाक लहर के कारण पैदा संकट से निपटने में स्वास्थ्य मंत्रालय की ढिलाई और अनुचित कदमों को लेकर आईएमए बिलकुल चकित है।’’

इसमें कहा गया कि आईएमए पिछले 20 दिनों से स्वास्थ्य ढांचा बेहतर करने और साजो-सामान तथा कर्मियों को फिर से तैयार करने के लिए पूर्ण और सुनियोजित राष्ट्रीय लॉकडाउन पर जोर दे रहा है।

यह जिक्र करते हुए कि 'छिटपुट रात के कर्फ्यू ने कोई अच्छा नतीजा नहीं दिया है', आईएमए ने जोर देकर कहा, जीवन अर्थव्यवस्था की तुलना में ज्यादा कीमती है। आईएमए ने कहा, नींद से जागिए और कोविड महामारी में बढ़ती चुनौतियों को कम करने के लिए हरकत दिखाइए। आईएमए द्वारा 6 अप्रैल से वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर 18 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए न्यायसंगत, सुलभ और सस्ते टीकाकरण की मांग की गई थी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश को लगातार आश्वस्त किए जाने के बाद टीकाकरण अभियान 1 मई से शुरू किया गया।आईएमए ने कहा, यह दुर्भाग्यपूर्ण है, मंत्रालय आवश्यक रोडमैप बनाने और वैक्सीन स्टॉक सुनिश्चित करने में विफल रहा है, जिसके परिणामस्वरूप 18 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के लिए टीकाकरण नहीं हो सका है। डॉक्टरों के संगठन ने कहा, जब प्रधानमंत्री की अधिसूचना को स्पष्ट रूप से लागू नहीं किया जाता है, तो किसे दोषी ठहराया जाए?