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राम मंदिर पर नहीं कर सकते कोर्ट के फैसले का इंतजारः विहिप

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राम मंदिर पर दिए गए बयान पर असहमति जताते हुए विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने...
राम मंदिर पर नहीं कर सकते कोर्ट के फैसले का इंतजारः विहिप

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राम मंदिर पर दिए गए बयान पर असहमति जताते हुए विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने बुधवार को कहा कि मंदिर की लड़ाई को हिंदू समाज लंबे समय से लड़ रहा है, यह लोकतंत्र की लड़ाई है। हम मंदिर के लिए और इंतजार नहीं कर सकते। सरकार जल्द से जल्द इस पर कानून बनाए।

बुधवार को एक प्रेस कॉंफ्रेस में विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री का श्रीराम जन्मभूमि के बारे में बयान देखा। जन्मभूमि का मामला गत 69 वर्षों से अदालतों में चल रहा है तथा इसकी अपील सुप्रीम कोर्ट में वर्ष 2011 से लंबित है। यह मामला उनकी प्राथमिकता में नहीं है।

उन्होंने कहा कि अब यह सुनवाई 4 जनवरी को हो रही है, लेकिन जिस बेंच को सुनवाई करनी थी, उसका गठन नहीं हुआ है। अब यह फिर से सीजेआई की कोर्ट में आ गया है। प्रतीक्षा की यह एक लम्बी अवधि है। हिन्दू समाज अनंत काल तक इंतजार नहीं कर सकता।

लटकाया जाता रहा है मामला

उन्होंने कहा कि कांग्रेस के वकीलों की कोशिश है कि यह मामला कोर्ट में लटकता रहे। संसद के पास कानून लाने का अधिकार है, इसलिए वो पहले कानून लाएं। उन्होंने कहा कि वो कई सांसदों से मिले हैं, और अधिकांश सांसदों ने इसका समर्थन किया है कि संसद में कानून लाकर मंदिर बनाने का मार्ग प्रशस्त किया जाए।

विहिप अध्यक्ष ने कहा कि हमारे पास दोनों मामले खुले हैं कि संसद में कानून बने या सुप्रीम कोर्ट लगातार सुनवाई करे। बेशक प्रधानमंत्री ने हमारा समर्थन नहीं किया है लेकिन हमें उनसे उम्मीद है। हमने उनसे मिलने का समय मांगा है।

धर्म संसद में होगा फैसला

आलोक कुमार ने कहा कि प्रयागराज के कुंभ में 31 जनवरी और 1 फरवरी को संत समाज मिलकर धर्म संसद में मंदिर के मुद्दे पर आगे की रणनीति पर फैसला करेगा।

उन्होंने कहा कि हम मंदिर निर्माण के लिए कोर्ट के आदेश का इंतजार नहीं कर सकते। उचित यह होगा कि संसद द्वारा कानून बनाकर भगवान की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का मार्ग अभी प्रशस्त किया जाए। परिषद इस मांग के पूरा होने तक लगातार आवाज उठाती रहेगी।

पीएम ने दिया न्यायिक प्रक्रिया हवाला

मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक समाचार एजेंसी को दिए इंटरव्यू में कहा था कि सरकार अध्यादेश लाने पर कोई भी फैसला न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही करेगी। साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाने के वास्ते हर संभव कोशिश करने के लिए तैयार है।

 

 

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