Home देश सामान्य किसान आंदोलन के समर्थन में आए ट्रांसपोर्टर, 8 दिसंबर से जरूरी चीजों की सप्लाई रोकने की दी धमकी

किसान आंदोलन के समर्थन में आए ट्रांसपोर्टर, 8 दिसंबर से जरूरी चीजों की सप्लाई रोकने की दी धमकी

आउटलुक टीम - DEC 02 , 2020
किसान आंदोलन के समर्थन में आए ट्रांसपोर्टर, 8 दिसंबर से जरूरी चीजों की सप्लाई रोकने की दी धमकी
किसान आंदोलन के समर्थन में आए ट्रांसपोर्टर, 8 दिसंबर से जरूरी चीजों की सप्लाई रोकने की दी धमकी
PTI
आउटलुक टीम

किसान आंदोलन के समर्थन में उतरे ट्रांसपोर्टरों ने आगामी 8 दिसंबर से देशव्यापी हड़ताल पर जाने का आह्वान किया है। ट्रांसपोर्ट यूनियनों ने कहा है कि अगर सरकार किसानों की मांगों को नहीं मानती, तो अखिल भारतीय मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे देश में सामानों की आवाजाही और उसकी सप्लाई रोक देगी।

ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएटीसी) ट्रांसपोर्टर्स की शीर्ष संस्था है, जो लगभग 95 लाख ट्रक ड्राइवरों और अन्य संस्थाओं का प्रतिनिधित्व करती है। ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने किसानों के आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा है कि किसान हमारा अन्नदाता है और वह भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी की तरह है।. ऐसे में उनकी मांगों की अनदेखी करना सही नहीं है। हमारे देश में ग्रामीण इलाके के करीबन 70 फ़ीसदी परिवार किसानी और खेती से जुड़े हुए हैं। ऐसे में यह किसान हमारे देश के अन्नदाता हैं और इनकी मांगों को गंभीरता से लेना जरूरी है।

ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के अध्यक्ष कुलतारन सिंह अटवाल ने कहा कि 8 दिसंबर से हम उत्तर भारत में अपने सभी काम बंद कर देंगे और सभी वाहनों को उत्तर भारतीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों दिल्ली, हरियाणा, यूपी, पंजाब, हिमाचल और जम्मू में रोक देंगे। हमने तय किया है कि अगर सरकार ने अब भी प्रदर्शनकारी किसानों की मांगें नहीं मानीं तो हम पूरे भारत में ‘चक्का जाम’ के लिए आह्वान करेंगे। उन्होंने कहा कि उत्तर भारत और पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर से आने वाले हजारों ट्रक प्रभावित हुए हैं। हम उनका समर्थन करते हैं, क्योंकि, 65 फीसदी ट्रक कृषि से जुड़ी चीजों को लाने में लगे हुए हैं।

बता दें कि केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसान विशेषकर पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। हजारों किसान दिल्ली से लगती सीमाओं के प्रवेश मार्गों पर बुधवार को लगातार सातवें दिन भी डटे हुए हैं। किसानों को आशंका है कि इन कानूनों के कारण न्यूनतम समर्थन मूल्य समाप्त हो जाएगा।

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