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कर्नाटक में राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार तीन कश्‍मीरी छात्र हुए रिहा, लगाए थे देश विरोधी नारे

कर्नाटक के हुबली में एक निजी इंजीनियरिंग कॉलेज में पुलवामा की बरसी पर कथि‍त रूप से पाकिस्‍तान...
कर्नाटक में राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार तीन कश्‍मीरी छात्र हुए रिहा, लगाए थे देश विरोधी नारे

कर्नाटक के हुबली में एक निजी इंजीनियरिंग कॉलेज में पुलवामा की बरसी पर कथि‍त रूप से पाकिस्‍तान समर्थित और आजादी के नारे लगाने पर तीन कश्‍मीरी छात्रों को देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था जिन्हें रिहा कर दिया गया है। वहीं, छात्रों को छोड़ने से पहले सीआरपीसी की धारा-169 के तहत बॉन्ड भी भरवाया गया।

हुबली के पुलिस कमिश्‍नर रामास्‍वामी दिलीप ने बताया कि पाकिस्तान समर्थक और आजादी के नारे लगाने की शिकायतों को लेकर तीनों संदिग्धों से पूछताछ की जा रही थी। आरोप है कि छात्रों ने पुलवामा आतंकी हमले की पहली बरसी पर पाकिस्तान समर्थित नारे लगाए थे। बेंगलुरू से 410 किलोमीटर उत्‍तर पश्चिम में स्थित हुबली की घटना के आरोपियों की पहचान आमिर, बासित और तालिब के तौर हुई थी। तीनों छात्र कश्‍मीर के शोपियां जिले के रहने वाले हैं। केएलई इंजीनियरिंग कॉलेज  में पढ़ाई कर रहे  तीनों छात्रों के खिलाफ आइपीसी की धारा 124 के तहत देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया था। 

पुलवामा की बरसी पर देशविरोधी नारे लगाने का आरोप

कॉलेज के प्रिंसिपल बसवराज अनामी ने पुलिस को दी शिकायत में बताया है कि पहले साल के इन छात्रों को केंद्र सरकार के कोटे के तहत दाखिला मिला था। यह घटना उस समय हुई जब शुक्रवार को कॉलेज में पुलवामा आतंकी हमले के शहीदों को श्रद्धांजलि दी जा रही थी। एफआइआर के मुताबिक, कार्यक्रम में भाग लेने के बजाय तीनों छात्र छात्रावास में पाकिस्‍तान के समर्थन में नारेबाजी करते हुए वीडियो बना रहे थे। शिकायत में कहा गया है कि प्र‍िंसिपल को इस वाकये का पता उस वक्‍त चला जब शनिवार को इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो गया।

कॉलेज ने किया निलंबित

आरोपियों ने खुद घटना का वीडियो अपने मित्रों के व्‍हट्सएप ग्रुप पर शेयर किया। कॉलेज ने आरोपी छात्रों को निलंबित कर दिया है। हुबली के रहने वाले राज्‍य के उद्योग मंत्री जगदीश शेट्टार ने इस घटना पर कहा कि सरकार देश विरोधी ऐसी घटनाओं को बर्दाश्‍त नहीं करेगी। वहीं, बाद में छात्रों से सीआरपीसी के तहत बान्ड भरवाकर छोड़ दिया गया ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें समन किया जा सके।

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