Advertisement

कश्मीर में पाबंदियों पर SC ने फैसला रखा सुरक्षित, नेता-पत्रकार और वकील ने दायर की हैं याचिकाएं

  केंद्र की मोदी सरकार द्वारा अनुच्छेद-370 हटाने के बाद जम्मू कश्मीर में सुरक्षा के मद्देनजर लगाई गई...
कश्मीर में पाबंदियों पर SC ने फैसला रखा सुरक्षित, नेता-पत्रकार और वकील ने दायर की हैं याचिकाएं

 

केंद्र की मोदी सरकार द्वारा अनुच्छेद-370 हटाने के बाद जम्मू कश्मीर में सुरक्षा के मद्देनजर लगाई गई पाबंदियों के खिलाफ दर्ज याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। ये याचिकाएं कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद, अनुराधा भसीन समेत कई अन्य लोगों ने दाखिल की हैं। केंद्र सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मसला है। लेकिन इन याचिकाओं की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट में अपनी दलीलें पेश की। सिब्ब्ल ने कहा कि आखिर धारा 144 में नेशनल सेक्युरिटी का जिक्र कहां है। सेक्शन 144 में राष्ट्रीय सुरक्षा का जिक्र नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद-370 के हटने के बाद संचार और अन्य प्रतिबंधों के संबंध में कश्मीर टाइम्स के संपादक अनुराधा भसीन और कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद द्वारा दायर याचिकाओं पर आज एक बैंच ने सुनवाई कर फैसला सुरक्षित रख लिया है। याचिकाओं पर न्यायमूर्ति एन वी रमना, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ ने सुनवाई की।

सिब्बल बोले- धारा 144 पर सरकार के तर्क गलत

सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने याचिकाकर्ता गुलाम नबी आजाद की ओर से कहा कि सरकार का कहना है कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है। उन्होंने कहा कि धारा 144 में राष्ट्रीय सुरक्षा का उल्लेख कहां है? धारा 144 राष्ट्रीय सुरक्षा में किसी भी तरह की समस्या को प्रतिबिंबित नहीं करता है। सरकार द्वारा दिया गया तर्क गलत है। सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता गुलाम नबी आजाद का प्रतिनिधित्व करने वाले कपिल सिब्बल ने कहा कि आप लोगों को हिरासत में ले सकते हैं। आप कह सकते हैं कि धारा 144 लगाई गई है। लेकिन आप राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर 7 मिलियन लोगों को हिरासत में नहीं ले सकते।

इससे पहले पीठ ने कहा था कि न्यायमूर्ति एनवी रमना के नेतृत्व वाली पीठ ने प्रशासन की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा था कि प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली याचिकाओं में व्यापक पैमाने पर तर्क दिए गए हैं और उन्हें सभी सवालों का जवाब देना होगा। इसने कहा था, ‘मिस्टर मेहता, आपको याचिकाकर्ताओं के हर सवाल का जवाब देना होगा जिन्होंने विस्तार में तर्क दिए हैं। आपके जवाबी हलफनामे से हमें किसी नतीजे पर पहुंचने में कोई मदद नहीं मिली है। यह संदेश न दें कि आप इस मामले पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रहे हैं।’

वकील वृंदा ग्रोवर ने इन धाराओं को 'असंवैधानिक' करार दिया

वहीं, कश्मीर टाइम्स की संपादक अनुराधा भसीन की ओर से पेश वकील वृंदा ग्रोवर ने इन धाराओं को 'असंवैधानिक' करार दिया और कहा कि प्रतिबंधों को अनुपात की कसौटी पर खरा उतरना है।

देश के अंदर ही दुश्मनों के साथ लड़ाई नहींबल्कि सीमा पार भी दुश्मनों से जूझना है

वहीं, जम्मू-कश्मीर प्रशासन की तरफ से पेश हुए सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस एन वी रमण, जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस आर सुभाष रेड्डी को बताया कि देश के अंदर ही दुश्मनों के साथ लड़ाई नहीं है बल्कि सीमा पार भी दुश्मनों से जूझना है। इतना ही नहीं मेहता ने अनुच्छेद 35-ए और अमुच्छेद 370 के हटने के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं, जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के सार्वजनिक भाषणों और सोशल मीडिया पोस्ट का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि अपरिहार्य परिस्थिति है जहां असाधारण उपाय की जरूरत होती है क्योंकि, निहित हित वाले लोग मनोवैज्ञानिक साइबर युद्ध छेड़ रहे हैं। 

भीसन और गुलाम नबी आजाद ने लगाए थे ये आरोप

भसीन और कांग्रेस नेता ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद संचार और अन्य अवरोधक लगाने का आरोप लगाया। वहीं, मंगलवार को जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद वहां पर इंटरनेट पर लगाई गई पाबंदी को सही ठहराया था। उन्होंने कहा कि अलगाववादी, आतंकवादी और पाकिस्तान सेना सोशल मीडिया पर लोगों को जेहाद के लिए भड़काते रहते हैं।

अब आप हिंदी आउटलुक अपने मोबाइल पर भी पढ़ सकते हैं। डाउनलोड करें आउटलुक हिंदी एप गूगल प्ले स्टोर या एपल स्टोर से
Advertisement
Advertisement
Advertisement
  Close Ad