Home देश सामान्य समझौता ट्रेन धमाके में असीमानंद समेत चार आरोपियों पर फैसला 18 मार्च तक टला

समझौता ट्रेन धमाके में असीमानंद समेत चार आरोपियों पर फैसला 18 मार्च तक टला

आउटलुक टीम - MAR 14 , 2019
समझौता ट्रेन धमाके में असीमानंद समेत चार आरोपियों पर फैसला 18 मार्च तक टला
समझौता ट्रेन धमाके में असीमानंद समेद चार आरोपियों पर एनआईए आज सुनाएगी फैसला
आउटलुक टीम

2007 में पानीपत के दीवाना स्टेशन के पास समझौता एक्सप्रेस में हुए ब्लास्ट के मामले में पंचकूला की स्पेशल एनआईए कोर्ट आज फैसला सुनाएगी। सोमवार को अदालत ने इस पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। 12 साल पहले हुए इस धमाके में 68 लोगों की जान चली गई थी। मरने वालों में ज्यादातर पाकिस्तान के थे। एनआईए कोर्ट में ऐन वक्त पर उस वक्त फैसला टल गया जब पाकिस्तान की एक पीड़िता ने और लोगों की गवाही के लिए अर्जी दाखिल कर दी। अब अदालत ने सुनवाई के लिए 18 मार्च का दिन तय किया है। उसी दिन तय होगा कि अदालत पाकिस्तानी लड़की  राहिला की अर्जी को मुकदमे की कार्रवाई में शामिल करेगी या फिर पहले की सुनवाई के आधार पर ही फैसला सुनाएगी।

असीमानंद है मुख्य आरोपी

धमाकों में स्वामी असीमानंद को मुख्य आरोपी बनाया गया है। स्वामी असीमानंद के साथ लोकेश शर्मा, कमल चौहान और राजिंद्र चौधरी शामिल हैं। पूरे मामले में कुल 8 आरोपी थे, जिनमें से 1 की मौत हो चुकी है, जबकि तीन भगोड़ा घोषित है। एनआईए ने 224 गवाह पेश किए थे जबकि बचाव पक्ष ने कोई भी गवाह पेश नहीं किया। एक पाकिस्तानी नागरिक राहिला वकील ने एक याचिका दायर कर कुछ अन्य चश्मदीदों के बयान रिकॉर्ड करने की भी अपील की थी। अदालत ने कहा है कि चश्मदीद 6 बार समन भेजने पर भी नहीं आए हैं। जबकि राहिला का कहना है कि जो पाकिस्तानी नागरिकों बयान दर्ज कराना आना चाह रहे हैं, उन्हें समन नहीं मिला है। 

लाहौर जा रही थी समझौता एक्सप्रेस

समझौता एक्सप्रेस 18 फरवरी को दिल्ली से लाहौर जा रही थी। उस दिन पानीपत के दीवाना  रेलवे स्टेशन के पास धमाका हुआ और दो बोगियों में आग लग गई थी। इसमें 68 लोगों की जान चली गई थी जिनमें, 33 वयस्क पुरुष, 19 वयस्क महिलाएं, 10 बच्चे और 6 बच्चियां शामिल थीं। पुलिस को मौके से दो सूटकेस बम भी मिले थे जो फट नहीं पाए थे।

इंदौर से गिरफ्तार हुए थे दो संदिग्ध

इस मामले में पहली गिरफ्तारी 15 मार्च 2007 को हुई थी। हरियाणा पुलिस ने इंदौर से दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया था। पुलिस सूटकेस के कवर के सहारे आरोपियों तक पहुंची थी। सूटकेस कवर इंदौर के एक बाजार से कुच दिन पहले ही खरीदे गए थे।

2011 में दायर हुई पहली चार्जशीट

एनआइए ने 26 जून 2011 को पांच लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। पहली चार्जशीट में नाबा कुमार उर्फ स्वामी असीमानंद, सुनील जोशी, रामचंद्र कालसंग्रा, संदीप डांगे और लोकेश शर्मा का नाम था। आरोपियों पर आईपीसी की धारा (120 रीड विद 302) 120बी साजिश रचने के साथ 302 हत्या, 307 हत्या की कोशिश करना समेत, विस्फोटक पदार्थ लाने, रेलवे को हुए नुकसान को लेकर कई धाराएं लगाई गई। जबकि 2012 में कमल चौहान उर्फ बद्रीनारायण उर्फ विजय और अमित उर्फ अशोक उर्फ प्रिंस नाम के दो लोगों के खिलाफ पूरक आरोप पत्र दायर किया गया था। चार्जशीट में आरोप लगाया गया है कि सभी आतंकवादी इस्लामिक आतंकवादी समूहों द्वारा हिंदू मंदिर स्थलों और कस्बों पर किए गए हमलों को लेकर उत्तेजित थे। हिंदू मंदिरों का बदला लेने के लिए आरोपियों ने मुस्लिम आबादी को निशाना बनाने की साजिश रची। जांच में स्पष्ट रूप से स्थापित किया गया कि समझौता एक्सप्रेस, मक्का मस्जिद, अजमेर शरीफ में हुए विस्फोटों को आरोपी व्यक्तियों ने आपराधिक साजिश के तहत अंजाम दिया था।

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