Home देश सामान्य अनुच्छेद 370 के तहत विशेष दर्जा खत्म होने के बाद कश्मीर में 765 लोग गिरफ्तार, सभी पत्थरबाजी के मामले

अनुच्छेद 370 के तहत विशेष दर्जा खत्म होने के बाद कश्मीर में 765 लोग गिरफ्तार, सभी पत्थरबाजी के मामले

आउटलुक टीम - NOV 19 , 2019
अनुच्छेद 370 के तहत विशेष दर्जा खत्म होने के बाद कश्मीर में 765 लोग गिरफ्तार, सभी पत्थरबाजी के मामले
अनुच्छेद 370 हटने के बाद कश्मीर में गिरफ्तार किए गए 765 पत्थरबाजः गृह मंत्रालय
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आउटलुक टीम

जम्मू-कश्मीर में गत 5 अगस्त को विशेष दर्जा खत्म होने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने 15 नवंबर तक पत्थरबाजी के 190 मामले दर्ज किए और 765 लोगों को गिरफ्तार किया। यह जानकारी मंगलवार को लोकसभा में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए केंद्रीय गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी ने दी। उनका कहना है कि ये लोग पत्थरबाजी और कानून व्यवस्था को प्रभावित करने की घटनाओं में शामिल रहे हैं। 

गृह राज्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने पत्थरबाजी को रोकने के लिए सरकार ने बहुस्तरीय नीति शुरु की है। उन्होंने कहा कि खासी संख्या में परेशानी पैदा करने वालों, भड़काने वालों, भीड़ इकट्ठा करने वालों की पहचान की गई है और उनके खिलाफ विभिन्न एहतियाती उपाय किए गए हैं।

'हुर्रियत से जुड़े थे पत्थरबाज'

उन्होंने बताया कि जांच से यह पता चला है कि कश्मीर घाटी में पत्थरबाजी की घटनाओं में हुर्रियत से जुड़े विभिन्न अलगाववादी संगठन और कार्यकर्ता शामिल रहे हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए ने ऐसे कुल 18 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया है।

'घटनाओं में आई है कमी'

गृह राज्यमंत्री ने बताया कि पत्थरबाजी की घटनाओं और लोक शांति भंग करने की घटना में शामिल रहने के कारण इन सभी लोगों को गिरफ्तार किया गया है। सरकार ने जम्मू-कश्मीर में पत्थरबाजी की घटनाओं को रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसमें काफी हद कमी आई है।

उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर में बीते 6 महीने में कुल 34 लाख 10 हजार 219 पर्यटक आए हैं, जिसमें 12 हजार 934 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। इस अवधि में राज्य को पर्यटन के क्षेत्र से करीब 25.12 करोड़ रुपये की आमदनी भी हुई है।

5 अगस्त को हटाया था अनुच्छेद 370

अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा हासिल था। केंद्र सरकार ने 5 अगस्त को अनुच्छेद 370 को खत्म करने जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित क्षेत्रों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित करने की घोषणा की थी, जो 31 अक्टूबर को अस्तित्व में आए। दोनों में अंतर सिर्फ इतना है कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश है जिसका मुख्यमंत्री भी होगा, लेकिन लद्दाख में विधानसभा नहीं होगी।

इस फैसले के बाद राज्य में कई नेताओं को हिरासत में लिया गया या फिर उन्हें नज़रबंद कर दिया गया। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, उमर अब्दुल्ला, फारुक अब्दुल्ला भी शामिल हैं।

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