Home देश सामान्य चैत्य भूमि जा रहे भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद को मुंबई पुलिस ने हिरासत में लिया

चैत्य भूमि जा रहे भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद को मुंबई पुलिस ने हिरासत में लिया

आउटलुक टीम - DEC 29 , 2018
चैत्य भूमि जा रहे भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद को मुंबई पुलिस ने हिरासत में लिया
चैत्य भूमि जा रहे थे भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद
ANI
आउटलुक टीम

शुक्रवार को मुंबई पहुंचे भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद को वहां पुलिस ने दिनभर नजरबंद रखा फिर देर शाम हिरासत में ले लिया। चंद्रशेखर ने बताया कि पुलिस ने करीब आठ घंटे तक उन्हें होटल में नजरबंद रखा और शाम को दादर स्थित चैत्यभूमि जाने की इजाजत दी लेकिन वहां पहुंचने से पहले ही उन्हें फिर हिरासत में ले लिया गया।    

भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद को मुंबई पुलिस ने तब हिरासत में लिया, जब वो दादर के चैत्य भूमि जा रहे थे। चैत्य भूमि मुंबई के दादर स्थित डॉ भीमराव आंबेडकर की समाधि स्थली और बौद्ध धर्म के लोगों का आस्था का केंद्र है।

क्या महाराष्ट्र का बहुजन समाज इस अपमान को बर्दाश्त करेगा?

भीम आर्मी प्रमुख ने ट्वीट कर कहा, 'महाराष्ट्र राष्ट्रपिता फुले, शाहू जी महाराज की भूमि है। बाबा साहेब ने इसी भूमि से हमें अपने अधिकारों के लिए लड़ना सिखाया, आज पहली बार इस भूमि के दर्शन को आया तो चैत्य भूमि के गेट से मुझे गिरफ्तार कर लिया गया। क्या महाराष्ट्र का बहुजन समाज इस अपमान को बर्दाश्त करेगा?'

शुरुआत फडणवीस सरकार ने की, लेकिन इनका अंत मैं करूंगा

इससे पहले उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा था, 'हमारी पवित्र भूमि चैत्य भूमि के गेट से पुलिस ने गिरफ्तार करके बेशर्मी की सारी हदें पार कर दी है। शुरुआत फडणवीस सरकार ने की है। लेकिन इनका अंत मैं करूंगा, हमारी भीम आर्मी की स्टेट टीम को पुलिस ने नहीं छोड़ा है। जब तक उन्हें रिहा नहीं किया जाता तब तक मैं महाराष्ट्र छोड़ने वाला नहीं हूं।'

भीमा-कोरेगांव और आसपास के इलाकों में अलर्ट

गौरतलब है कि एक बार फिर भीमा-कोरेगांव और आसपास के इलाकों में अलर्ट जारी कर ‌दिया गया है। एक जनवरी, 2018 को पुणे के पास स्थित कोरेगांव-भीमा में भड़की जातीय हिंसा मामले को एक साल होने को है। महाराष्ट्र के लिए साल की शुरूआत हिंसा से हुई थी और अगले कुछ महीने तक यह मामला कुछ न कुछ कारणों से लगातार चर्चा में बना रहा। भीमा-कोरेगांव संघर्ष की 200वीं वर्षगांठ के पहले तनाव व्याप्त हो गया था क्योंकि कुछ दक्षिणपंथी संगठनों ने आयोजन का विरोध किया था।

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