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शारदा चिटफंड मामले में सीबीआई ने पूर्व सांसद और कोलकाता पुलिस कमिश्नर से की संयुक्त पूछताछ

आउटलुक टीम - FEB 11 , 2019
शारदा चिटफंड मामले में सीबीआई ने पूर्व सांसद और कोलकाता पुलिस कमिश्नर से की संयुक्त पूछताछ
शारदा चिटफंड मामले में सीबीआई ने पूर्व सांसद और कोलकाता पुलिस कमिश्नर से की संयुक्त पूछताछ
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शारदा चिटफंड घोटाला मामले में सीबीआई ने सोमवार को कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार और तृणमूल कांग्रेस के पूर्व सांसद कुणाल घोष से संयुक्त पूछताछ की। पुलिस कमिश्नर पर घोटाले में सबूतों को नष्ट करने का आरोप है। 

रविवार को जांच एजेंसी ने राजीव कुमार से अकेले और फिर घोष के साथ पूछताछ की थी। यह पूछताछ आठ घंटे से भी ज्यादा समय तक चली थी।

तृणमूल कांग्रेस के पूर्व सांसद को 2013 में शारदा पौंजी घोटाले में गिरफ्तार किया गया था और 2016 से वह जमानत पर हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार सीबीआई ने दोनों से पूछताछ की। सीबीआई ने राजीव कुमार से शनिवार को जरूरी सबूतों से छेड़छाड़ करने में उनकी कथित भूमिका को लेकर करीब नौ घंटे तक पूछताछ की थी। 

एसआईटी का किया था नेतृत्व

शारदा घोटाले की जांच के लिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री द्वारा गठित एसआईटी का नेतृत्व राजीव कुमार ने किया था। बाद में मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी। घोष ने इससे पहले भाजपा नेता मुकुल रॉय और 12 अन्य लोगों पर शारदा घोटाले में शामिल होने का आरोप लगाया था। मुकुल रॉय एक समय पर बनर्जी के खास थे। बाद में वह भाजपा में शामिल हो गए।  

सबूतों को नष्ट करने का है आरोप

सुप्रीम कोर्ट ने राजीव कुमार को सीबीआई के समक्ष पेश होने और मामलों की जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया था। अदालत ने ही पूछताछ के लिए शिलांग का चयन किया था ताकि सभी अनावश्यक विवाद से बचा जाए। साथ ही कुमार को गिरफ्तार नहीं करने का भी आदेश दिया था।

सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में आरोप लगाया था कि शारदा चिटफंड घोटाले की एसआईटी जांच के अगुआ रहे राजीव कुमार ने इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के साथ छेड़छाड़ की और जो दस्तावेज सौंपे, उनमें से भी कुछ में छेड़छाड़ की गई थी।

पुलिस ने रोक दिया था सीबीआई टीम को

इससे पहले पिछले रविवार 3 फरवरी को भी सीबीआई की टीम पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से पूछताछ करने कोलकाता पहुंची थी लेकिन कोलकाता पुलिस ने सीबीआई टीम को राजीव कुमार के आवास में दाखिल होने से न सिर्फ रोक दिया बल्कि जांच दल के सदस्यों को हिरासत में भी ले लिया। हालांकि बाद में गृह मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद उन्हें छोड़ दिया गया लेकिन तब तक मामला मोदी सरकार और ममता सरकार के बीच ठन गया।

विरोध में ममता बनर्जी ने दिया धरना

ममता बनर्जी स्वयं कमिश्नर आवास पर पहुंच गईं और उन्होंने केंद्र पर संघीय ढांचे से खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए 3 फरवरी की रात से ही धरने पर बैठने का ऐलान कर दिया। उन्होंने धरने के लिए वही जगह चुनी जहां 13 साल पहले सिंगूर आंदोलन की शुरुआत की थी।

कोर्ट के आदेश को अपनी नैतिक जीत बताते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 48 घंटे बाद आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के कहने पर अपना धरना खत्म किया।

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