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प्रसव के वक्त साथ रह सकेंगी बर्थ कंपेनियन

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत बर्थ कंपेनियन योजना को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत लेबर रूम में गर्भवती के साथ परिवार की एक महिला रह सकेगी। यदि परिवार की महिला न हों तो ग्रामीण इलाकों में आशा वर्कर यह काम करेंगी।
प्रसव के वक्त साथ रह सकेंगी बर्थ कंपेनियन

बच्चे को जन्म देते वक्त किसी भी महिला को चिकित्सा सुविधाओं के साथ परिवार के किसी सदस्य की हिम्मत भी दवा की तरह काम करती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने प्रसव के दौरान बर्थ कंपेनियन यानी जन्म के वक्त साथ को मंजूरी दी है। इस बर्थ कंपेनियन में वही महिलाएं प्रसव के वक्त साथ रह सकेंगी जिन्हें प्रसव और शिशु जन्म के मामले में अनुभव होगा। बर्थ कंपेनियन प्रसव के दौरान होने वाली मां को भावनात्मक समर्थन देने के साथ मां और शिशु का खयाल भी रखेंगी। इस प्रस्ताव पर इसी साल फरवरी में मुहर लगी थी। अब इसके आदेश की प्रतियां सभी राज्यों के सरकारी और निजी अस्पतालों को भेजी जा रही हैं। ताकि साथ आने वाली महिला को जानकारी दी जा सके और ज्यादा से ज्यादा महिलाएं इस योजना का लाभ उठाएं। 

यह योजना सरकारी के साथ निजी अस्पतालों के लिए भी लागू होगी। बर्थ कंपनेनियन बनने वाली महिला को लेबर रूम में जाने से पहले अपनी सफाई का खयाल रखना होगा, अस्पताल द्वारा दिए गए कपड़े पहनने होंगे। महिला चिकित्सक को टोकेगीं नहीं और बिना समझे हंगामा नहीं करेंगी। डॉक्टर खुद भी मानते हैं कि यदि प्रसव के वक्त परिवार की कोई महिला हो तो महिला को संबल मिलता है और वह घबराती नहीं है। किसी के करीब होने के अहसास से हार्मोन रीलिज होते हैं और नार्मल डिलीवरी की संभावना बढ़ जाती है।

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