Home देश सामान्य किसान बोले, कृषि कानून रद्द नहीं हुए तो दिल्ली को कर देंगे चारों तरफ से बंद, सरकार के साथ आज फिर होगी मीटिंग

किसान बोले, कृषि कानून रद्द नहीं हुए तो दिल्ली को कर देंगे चारों तरफ से बंद, सरकार के साथ आज फिर होगी मीटिंग

आउटलुक टीम - DEC 02 , 2020
किसान बोले, कृषि कानून रद्द नहीं हुए तो दिल्ली को कर देंगे चारों तरफ से बंद, सरकार के साथ आज फिर होगी मीटिंग
किसान आंदोलन
ANI
आउटलुक टीम

कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन जारी है। दिल्ली की सीमाओं पर पिछले सात दिनों से किसान आंदोलन कर रहे हैं। कल सरकार ने किसानों के साथ बैठक में एक कमेटी बनाने का प्रस्ताव दिया था जिसे किसानों ने नकार दिया है। अब गुरुवार को सरकार और किसानों के बीच एक दौर की और बातचीत होगी। इस बीच किसान संगठनों ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके एक बार फिर साफ कर दिया है कि सरकार लंबी चर्चा करके टरकाने की कोशिश कर रही है। किसानों ने मांग की कि सरकार संसद का विशेष सत्र बुलाकर कृषि कानूनों को रद्द करे। अन्यथा उनका आंदोलन जारी रहेगा। हम दिल्ली की सड़कों को अवरुद्ध करेंगे। वहीं, केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किसानों से अनुरोध किया है कि आंदोलन का रास्ता छोड़कर चर्चा से हल निकालें।

किसानों नेताओं ने कहा कि केंद्र से बातचीत के लिए किसानों की छोटी कमेटी नहीं बनेगी। हम सात या दस पेज का मसौदा सरकार को भेजेंगे, सरकार नहीं मानेगी तो आंदोलन जारी रहेगा। किसानों ने मांग की कि संसद का विशेष सत्र बुलाकर कृषि कानूनों को रद्द करे। किसान नेता गुरनाम सिंह चडूनी ने कहा, ''अगर केंद्र ने जल्दी हमारी बात ना मानी तो किसान सख़्त कदम उठा सकते हैं। बगावत जैसी स्थिति उत्पन ना हो इसलिए सरकार किसानों की मांग जलद पूरी करें।''

उन्होंने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा, ''केंद्र क़ानून निरस्त नहीं करता तो दिल्ली को चारों तरफ़ से बंद कर दिया जाएगा। मोदी की भाषा ही उनके अफ़सर और मंत्री बोल रहे हैं। क्या किसान अनपढ़ हैं? क्या कृषि का फ़ायदा नुक़सान किसान नहीं जानता? एक दिन का संसद का विशेष सत्र बुलाना पड़ेगा, अन्यथा यह आंदोलन चलता रहेगा।'' क्रांतिकारी किसान यूनियन के अध्यक्ष दर्शन पाल ने कहा कि हमने 5 दिसंबर को मोदी सरकार और कॉरपोरेट घरानों के विरोध में पूरे देश में पुतले जलाने का आह्वान किया है।

कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने कहा, ''दिल्ली के लोग संयम का परिचय दें. उन्हें तकलीफ है, इसका एहसास सरकार को भी है। किसानों से अनुरोध है कि आंदोलन का रास्ता छोड़कर चर्चा से हल निकालें. चर्चा चल रही है। कल भी किसान नेताओं के साथ बैठक है। हमारी कोशिश है कि जल्दी समाधान हो।''

केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसान विशेषकर पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। हजारों किसान दिल्ली से लगती सीमाओं के प्रवेश मार्गों पर बुधवार को लगातार सातवें दिन भी डटे हुए हैं। किसानों को आशंका है कि इन कानूनों के कारण न्यूनतम समर्थन मूल्य समाप्त हो जाएगा।

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