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ड्रग्स केस: रिया चक्रवर्ती के वकील ने कहा- चार्जशीट में ठोस आधार नहीं, इल्जाम झूठे

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने शुक्रवार को ड्रग्स कनेक्शन मामले में कोर्ट में चार्जशीट फाइल...
ड्रग्स केस: रिया चक्रवर्ती के वकील ने कहा- चार्जशीट में ठोस आधार नहीं, इल्जाम झूठे

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने शुक्रवार को ड्रग्स कनेक्शन मामले में कोर्ट में चार्जशीट फाइल की। (एनसीबी) ने चार्जशीट ने रिया चक्रवर्ती पर 'ड्रग सिंडिकेट' का हिस्सा होने का आरोप लगाया और दावा किया कि वह ड्रग्स की खरीद और आपूर्ति की साजिश का हिस्सा थी।

चार्जशीट के दाखिल होने के बाद अब रिया चक्रवर्ती के वकील सतीश मानशिंदे ने कहा, ''12000 पन्नों की चार्जशीट की उम्मीद थी। एनसीबी ने रिया चक्रवर्ती को किसी ना किसी तरह फंसाने के लिए काफी जोर लगाया है। 33 आरोपियों के पास से जितना 'नशीला पदार्थ 'बरामद' किया गया था वो मुंबई पुलिस के अफसर या नारकोटिक्स सेल या फिर एयरपोर्ट कस्टम या किसी भी एजेंसी द्वारा एक रेड में पकड़े जाने वाले पदार्थ के सामने कुछ भी नहीं है।''

मानेशिंदे सवाल करते हैं, '' ऊपर से नीचे तक का पूरा एनसीबी बॉलीवुड में एक ड्रग एंगल का खुलासा करने में लगा हुआ था। जितने भी जाने-माने चेहरों को पूछताछ के लिए चक्कर लगवाए गए उनके खिलाफ मुश्किल से ही कोई सबूत मिले हैं, ऐसे में मैं सोच रहा हूं कि आखिर ऐसा क्यों? या तो जो इल्जाम लगाए गए हैं वो झूठे हैं या फिर भगवान जाने क्या सच है। चार्जशीट एक नम पलीता है जो सुप्रीम कोर्ट की तूफान सिंह जजमेंट के बाद भी बेवजह के साक्ष्य और एनडीपीएस कानून के सेक्शन 67 के तहत रिकॉर्ड की गईं स्टेटमेंट्स की नींव पर खड़ा है।

रिया चक्रवर्ती को आरोपित किए बिना इस मामले में कोई सार नहीं है। हाई कोर्ट को ड्रग ट्रेड से कमाई करने वाली बात पर कोई सबूत हासिल नहीं हुआ था.। हम ही अंत में इस बात पर हंसेंगे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, एनसीबी ने अब आरोप लगाया है कि नवंबर 2019 में, उसकी सहमति से रिया के घर पर ड्रग्स की डिलीवरी हुई थी, उसने ड्रग्स की खपत के लिए सुशांत सिंह राजपूत, उसके प्रेमी को (घर) की मदद की थी। । रिया चक्रवर्ती ने अपने भाई शोविक चक्रवर्ती की मदद से ड्रग्स की आपूर्ति के एक चैनल की सुविधा दी।

एनसीबी ने पिछले साल जून में 34 वर्षीय सुशांत राजपूत की मौत के बाद जांच शुरू की। उन्होंने रिया चक्रवर्ती और उसके भाई दोनों को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ्तार किया था, लेकिन बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया था। 33 आरोपियों में से आठ अभी भी न्यायिक हिरासत में हैं।

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