Home देश सामान्य बंगालः कोरोना मरीज को अस्पताल ने कर दिया था मृत घोषित, अंतिम क्रिया की रस्म से एक दिन पहले लौटा घर

बंगालः कोरोना मरीज को अस्पताल ने कर दिया था मृत घोषित, अंतिम क्रिया की रस्म से एक दिन पहले लौटा घर

आउटलुक टीम - NOV 22 , 2020
बंगालः कोरोना मरीज को अस्पताल ने कर दिया था मृत घोषित, अंतिम क्रिया की रस्म से एक दिन पहले लौटा घर
बंगालः कोरोना मरीज को अस्पताल ने कर दिया था मृत घोषित, अंतिम क्रिया की रस्म से एक दिन पहले लौटा घर
PTI
आउटलुक टीम

बंगाल में कोरोना मरीज के मामले में एक अस्पताल के स्टाफ की बड़ी लापरवाही सामने आई है। अस्पताल ने जिस मरीज को मृत घोषित कर दिया था, वह एक दिन पहले उस समय परिवार के पास लौट आया, जब हिंदू अनुष्ठानों के अनुसार उनकी अंतिम क्रिया की रस्म की तैयारी चल रही थी। हालांकि, परिवार ने पहले ही अस्पताल को दाह संस्कार के लिए सहमति दे दी थी।

राज्य के स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि शुरुआती रिपोर्ट के आधार पर दो नर्सिंग स्टाफ, एक नर्स प्रभारी और एक डॉक्टर को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। घटना की जांच के लिए चार सदस्यीय समिति का गठन किया है।

75 वर्षीय शिबदास बनर्जी कोरोनोवायरस से संक्रमित पाए गए लेकिन 13 नवंबर को उन्हें मृत घोषित कर और उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया लेकिन बनर्जी शुक्रवार रात बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के बीरती में अपने परिवार के पास लौट आए, जब हिंदू अनुष्ठानों के अनुसार उनके श्राद्ध की तैयारी चल रही थी। यह जिले में स्थित खारदाह के बलाराम बसु अस्पताल में कर्मचारियों की लापरवाही के कारण हुआ, जहां 4 नवंबर को बनर्जी को भर्ती कराया गया था। जिस व्यक्ति की मृत्यु हुई और 13 नवंबर को बनर्जी के बेटे संजीब ने उनका अंतिम संस्कार किया, वह उसी जिले के खारदह निवासी 75 वर्षीय मोहिनीमोहन मुखर्जी और स्थानीय नागरिक निकाय के सेवानिवृत्त कर्मचारी थे। स्वास्थ्य विभाग अब इसकी जांच कर रहा है।

मुखर्जी को भी 4 नवंबर को बलराम बसु अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन उत्तर 24 परगना के बारासात के कोविड -19 अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया था। हालांकि, बारासात अस्पताल में उनके साथ भेजे गए मेडिकल रिकॉर्ड बनर्जी के थे। रिकॉर्ड्स की अदला-बदली हो गई। इस बात का खुलासा तब हुआ जब जब बलराम बसु अस्पताल के कर्मचारियों ने मुखर्जी के परिवार को फोन करके बताया कि वह छुट्टी के लिए तैयार हैं, क्योंकि इलाज के बाद कोविद-19 के टेस्ट में वो निगेटिव पाए गए हैं।

मुखर्जी के बेटे संदीप ने बताया कि जब मैं अस्पताल गया तो व्हीलचेयर में बैठे एक अलग व्यक्ति को देखकर मैं चौंक गया। उन्होंने कहा कि अस्पताल के अधिकारियों को तब लगा कि उनसे गलती हो गई है और उन्होंने तब बनर्जी के परिवार को सूचित किया। बनर्जी का परिवार उन्हें शुक्रवार देर रात घर ले गया। सुदीप ने आरोप लगाया है कि गलत कागजात के कारण भी गलत इलाज हुआ और उनके पिता की अत्यंत चिकित्सा लापरवाही से मौत हो गई।

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