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निर्भया केस के चारों दोषियों को 3 मार्च को होगी फांसी, नया डेथ वारंट जारी

आउटलुक टीम - FEB 17 , 2020
निर्भया केस के चारों दोषियों को 3 मार्च को होगी फांसी, नया डेथ वारंट जारी
निर्भया के दोषियों का नया डेथ वारंट जारी करने पर दिल्ली कोर्ट में आज होगी सुनवाई
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आउटलुक टीम

निर्भया गैंगरेप और हत्या मामले में चारों दोषियों (विनय, अक्षय, पवन और मुकेश) के लिए नए डेथ वारंट की मांग वाली याचिका पर दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने फैसला सुनाया है। कोर्ट ने नया डेथ वारंट जारी कर दिया है, अब चारों दोषियों को 3 मार्च सुबह 6 बजे फांसी होगी। दोषियों के खिलाफ ये तीसरा डेथ वारंट जारी हुआ है। इससे पहले 21 जनवरी और 1 फरवरी के लिए भी डेथ वारंट जारी किया गया था।

मामले की सुनवाई के दौरान तिहाड़ जेल के लॉ ऑफिसर ने कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट सौंपी। विशेष सरकारी अधिवक्ता राजीव मोहन ने कोर्ट को केस की मौजूदा स्थिति के बारे में बताया और कहा कि 4 दोषियों में से 3 ने अपने कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल कर लिया है। 

दोषियों को सभी कानून उपचार लेने के लिए दिया गया गया था 7 दिन का समय

सुनवाई के दौरान तिहाड़ जेल  के वकील राजीव मोहन ने कोर्ट को बताया कि  फिलहाल, किसी भी दोषी की याचिका कहीं पेंडिंग नहीं है। दिल्ली हाईकोर्ट ने दोषियों को सभी कानून उपचार लेने के लिए 7 दिन का समय दिया था, वह भी खत्म हो गया। एक दोषी ने अभी तक न ही क्यूरेटिव याचिका लगाई है और न ही राष्ट्रपति के पास दया याचिका लगाई है। लिहाजा, कोर्ट डेथ वारंट की नई तारीख दे।

साथ ही, सुनवाई के दौरान दोषी मुकेश ने अदालत में कहा कि वह नहीं चाहता कि न्यायाधीश द्वारा नियुक्त न्यायमित्र वृंदा ग्रोवर उसके मामले की पैरवी करें। इसके बाद कोर्ट ने दोषी मुकेश की मांग पर अधिवक्ता रवि काजी को उसके मामले की पैरवी के लिए नियुक्त किया है। वहीं अदालत को बताया गया कि दोषी विनय शर्मा भूख हड़ताल पर है। इसे लेकर अदालत ने जेल अधीक्षक को कानून के मुताबिक उसका ध्यान रखने के निर्देश दिए।  

रवि काजी को कोर्ट ने मुकेश का वकील नियुक्त किया

कोर्ट ने मुकेश की मां से कहा कि वकील नहीं तय करता कि दोषी को उम्रकैद होगी या फांसी। कोर्ट ने दोषी मुकेश का वकील बदल दिया है। अब रवि काजी दोषी मुकेश के वकील होंगे। रवि काजी दोषी पवन के भी वकील हैं।

'फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील नहीं करा पा रही हैं वृंदा ग्रोवर'

दोषी मुकेश की मां ने दूसरे वकील की मांग की। कोर्ट ने पूछा कि आप वृंदा ग्रोवर को क्यों बदलना चाहती हैं। वृंदा ग्रोवर बहुत अच्छा काम कर रही हैं। मेहनत कर रही हैं। दोषी मुकेश की मां ने कहा कि वकील साहब फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील नहीं करा पा रही हैं, फांसी की सजा हमें नहीं चाहिए।

निर्भया के माता-पिता ने दाखिल की थी अर्जी

पीड़ित के माता-पिता और दिल्ली सरकार ने नया डेथ वारंट जारी करने के लिए अर्जी दाखिल की थी। 15 फरवरी को दोषियों को अलग-अलग फांसी देने संबंधी केंद्र की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि केंद्र की याचिका लंबित रहने का ट्रायल कोर्ट द्वारा फांसी के लिए नया डेथ वॉरंट जारी करने पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

सुनवाई की कई तारीखें आ चुकी हैं, लेकिन नया डेथ वारंट जारी नहीं किया गया

सुनवाई से पहले दिल्ली गैंगरेप पीड़िता की मां आशा देवी ने कहा कि वे दोषियों के खिलाफ नए डेथ वारंट की याचिका पर आज होने वाली सुनवाई से उम्मीद लगाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि सुनवाई की कई तारीखें आ चुकी हैं, लेकिन नया डेथ वारंट जारी नहीं किया गया। हम हर सुनवाई से  उम्मीद करते हैं। पता नहीं आज क्या होगा लेकिन मैंने उम्मीद नहीं छोड़ी है।

2 बार जारी हो चुका है डेथ वारंट

निर्भया के चारों दरिंदों मुकेश सिंह, विनय शर्मा, पवन गुप्ता और अक्षय ठाकुर के जघन्य अपराध के बाद शीर्ष कोर्ट ने उनकी फांसी की सजा बरकरार रखी थी। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने पहला डेथ वारंट जारी करते हुए दोषियों को 22 जनवरी को सुबह 6 बजे फांसी देने का कहा था। हालांकि कोर्ट ने बाद में तारीख आगे बढ़ाते हुए नया डेथ वारंट जारी करते हुए दोषियों को 1 फरवरी को फांसी देने का कहा था। बाद में 31 जनवरी को ट्रायल कोर्ट ने इस पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थी।

क्या है मामला

बता दें कि 16 दिसंबर, 2012 की रात 23 साल की एक पैरामेडिकल स्टूडेंट अपने दोस्त के साथ दक्षिण दिल्ली के मुनिरका इलाके में बस स्टैंड पर खड़ी थी। दोनों फिल्म देखकर घर लौटने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इंतजार कर रहे थे। इस दौरान वो वहां से गुजर रहे एक प्राइवेट बस में सवार हो गए। इस चलती बस में एक नाबालिग समेत छह लोगों ने युवती के साथ बर्बर तरीके से मारपीट और गैंगरेप किया था। इसके बाद उन्होंने पीड़िता को चलती बस से फेंक दिया था। बुरी तरह जख्मी युवती को बेहतर इलाज के लिए एयर लिफ्ट कर सिंगापुर ले जाया गया था। यहां 29 दिसंबर, 2012 को अस्पताल में उसकी मौत हो गई थी। घटना के बाद पीड़िता को काल्पनिक नाम ‘निर्भया’ दिया गया था।

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