Home सिनेमा सामान्य किसकी मौत की खबर सुनकर लता ने खरीदा हुआ रेडियो कर दिया था वापस, पढ़े ऐसी अनकही बातें

किसकी मौत की खबर सुनकर लता ने खरीदा हुआ रेडियो कर दिया था वापस, पढ़े ऐसी अनकही बातें

आउटलुक टीम - SEP 28 , 2019
किसकी मौत की खबर सुनकर लता ने खरीदा हुआ रेडियो कर दिया था वापस, पढ़े ऐसी अनकही बातें
जन्मदिन विशेष: कभी एक स्टेज पर गाने के लिए सिर्फ इतने रुपये लेती थीं लता मंगेशकर
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आउटलुक टीम

लता मंगेशकर भारतीय सिनेमा जगत का जाना-माना नाम है। दिग्गज गायिका होने के साथ उनका नाम कई विवादों से भी जुड़ा। लगभग 6 दशकों से अपनी जादुई आवाज के जरिये 20 से अधिक भाषाओं मे 50 हजार से भी ज्यादा गीत गाकर 'गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड' में अपना नाम दर्ज करा चुकीं लता मंगेशकर श्रोताओं के दिलों पर राज करती हैं। छोटी बहन आशा भोसले से अनबन, म्यूजिक कंपोजर्स से झगड़े और इंडस्ट्री में तानाशाही जैसे आरोप लगते रहे हैं। अपनी मधुर आवाज से लोगों को अपना दीवाना बनाने वाली लता के बारे में कुछ ऐसे दिलचस्प फैक्ट्स हैं जिनसे काफी लोग अंजान हैं। आज लता मंगेशकर अपना 90वां बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में जन्मी लता एक मध्यम वर्गीय मराठी परिवार से हैं।

इतनी थी लता की पहली कमाई

स्वर कोकिला लता ने साल 1942 में 'किटी हसाल' के लिए अपना पहला गाना गाया लेकिन उनके पिता दीनानाथ मंगेश्कर को लता का फिल्मों के लिए गाना पसंद नहीं आया और उन्होंने उस फिल्म से लता के गाए गीत को हटवा दिया था। हालांकि इसी साल लता को 'पहली मंगलगौर' में अभिनय करने का मौका भी मिला। लता की पहली कमाई 25 रुपये थी जो उन्हें एक कार्यक्रम में स्टेज पर गाने के दौरान मिली थी।

ये है लता का असली नाम

बहुत कम लोगों को यह पता होगा कि लता का असली नाम हेमा हरिदकर है। बचपन के दिनों से उन्हें रेडियो सुनने का बड़ा ही शौक था। 18 साल की उम्र में उन्होंने अपना पहला रेडियो खरीदा था और रेडियो ऑन करते ही उन्हें के.एल.सहगल की मृत्यु की खबर मिली थी। जिसके बाद उन्होंने वह रेडियो दुकानदार को वापस लौटा दिया। लता को अपने बचपन के दिनों में साईकिल चलाने का काफी शौक था जो पूरा नहीं हो सका। बता दें कि उन्होंने अपनी पहली कार 8000 रुपये में खरीदी थी।

एक दिन में तकरीबन 12 मिर्चे तक खा लेती हैं लता

ऐसा बताया जाता है कि स्पाइसी खाने की शौकीन लता एक दिन में तकरीबन 12 मिर्चे तक खा लेती हैं। उनका मानना है कि मिर्च खाने से गले की मिठास बढ़ती है। लता को किक्रेट देखने का भी काफी शौक रहा है। लार्डस में उनकी एक सीट हमेशा रिजर्व रहती हैं।

सिर्फ एक दिन के लिए गईं स्कूल

ये भी कहा जाता है कि लता महज एक दिन के लिए स्कूल गई थीं। इसकी वजह यह रही कि जब वह पहले दिन अपनी छोटी बहन आशा भोंसले को स्कूल लेकर गयी तो टीचर ने आशा को यह कहकर स्कूल से निकाल दिया कि उन्हें भी स्कूल की फीस देनी होगी। बाद में लता ने निश्चय किया कि वह कभी स्कूल नहीं जाएंगी। इसके बाद उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा घर में ही रहकर अपने नौकर से प्राप्त की। हालांकि बाद में उन्हें न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी सहित छह विश्वविद्यालयों से मानक उपाधि से नवाजा गया।

जब 9 साल की छोटी सी लता बनीं थी नारद

लता के पिता दीनानाथ मंगेशकर मराठी रंगमंच से जुड़े थे। 5 साल की उम्र से ही लता मंगेशकर ने अपने पिता के साथ नाटकों में अभिनय करना शुरू कर दिया था। लता मंगेशकर के पहले नाटक से जुड़ा एक बेहद रोचक किस्‍सा भी है। पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर की नाटक कंपनी का नाम 'बलवन्‍त संगीत मंडली' था। पहली बात लता पिता के जिस नाटक के साथ मंच पर उतरी थीं उसका नाम था- 'सौभद्र'। अर्जुन और सुभद्रा की कथा पर आधारित नाटक 'सौभद्र' में पंडित दीनानाथ मंगेशकर ने स्‍वयं अर्जुन का रूप धरा था और 9 साल की छोटी सी लता बनीं थी नारद।

जब पहली बार नई दिल्‍ली ऑल इंडिया रेडियो से आया आमंत्रण

साल 1940 के आसपास लता मंगेशकर को पहली बार नई दिल्‍ली ऑल इंडिया रेडियो से आमंत्रण आया था। 10 वर्षीय लता मंगेशकर के रिकॉर्डिंग के लिए उनके पिता भी दिल्‍ली आए थे। लता मंगेशकर ने जब ऑल इंडिया रेडिया का माइक संभाला तो उन्‍होंने पहला बार शास्‍त्रीय गायक ‘खंभावती’ गाया था। बावजूद इसके यह राग इसलिए बहुत अहम है क्योंकि असल मायनों में यह पहला और आखिरी राग है जो लता मंगेशकर ने रेडियो के लिए रिकॉर्ड किया था। लेकिन 1942 में लता मंगेशकर के पिता दीनानाथ मंगेशकर का असमय निधन हो गया। उनकी उम्र सिर्फ 41-42 साल की थी। पिता के निधन के बाद लता मंगेशकर के कंधों पर परिवार चलाने की जिम्मेदारी आ गई। इसके बाद उन्होंने रेडियो के लिए कोई रिकॉर्डिंग नहीं की।

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