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सेंसर बोर्ड से पहलाज निहलानी की छुट्टी, प्रसून जोशी उनकी जगह लेंगे

AUG 11 , 2017

केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) के चेयरमैन पहलाज निहलानी को हटाए जाने की खबर है। पहलाज निहलानी फिल्मों में सेंसरशिप को लेकर काफी विवादित रहे हैं। जाने-माने गीतकार प्रसून जोशी सीबीएफसी के अगले चेयरमैन होंगे। 

बता दें कि पहलाज निहलानी के सेंसर बोर्ड के चेयरमैन बनने के बाद से लगातार कई फिल्मों के निर्देशकों और फिल्मों से जुड़ी हस्तियों ने निहलानी के कामकाज करने के तरीकों पर आपत्ति जताई थी। फिल्मों में तरह-तरह की सेंसरशिप की वकालत करने वाले निहलानी हमेशा लोगों के निशाने पर रहे, चाहे वह फिल्म ''उड़ता पंजाब'' का मसला रहा हो या हाल ही में ''बाबूमोशाय बंदूकबाज'' और ''लिपस्टिक अंडर माय बुर्खा'' का।

माना जा रहा है कि निहलानी जरूरत से ज्यादा सरकार के चहेते बनने की कोशिश कर रहे थे, जिसकी वजह से सरकार पर भी सवाल उठ रहे थे। अनुमान है कि यही बात उनके विरोध में भी चली गई। पहलाज निहलानी द्वारा तैयार किए गए एक वीडियो से सरकार को नाराज बताया जा रहा था। इस वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गुणगान किया गया था।

सरकार इससे पहले पुणे फिल्म इंस्टीट्यूट में गजेंद्र चौहान की नियुक्ति पर भी घिरी थी।

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कौन हैं नए चेयरमैन प्रसून जोशी?

प्रसून जोशी को तीन बार बेस्ट गीतकार का फिल्मफेयर अवॉर्ड और दो बार नेशनल अवॉर्ड मिल चुका है। 2014 में उन्हें फिल्म 'भाग मिल्खा भाग' के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला। उन्हें फिल्म तारे जमीं पर, रंग दे बसंती, गजनी जैसी फिल्मों के गीतों के लिए जाना जाता है। 2015 में प्रसून को कला, साहित्य और विज्ञापन की दुनिया में योगदान के लिए पद्म श्री से नवाजा जा चुका है। बता दें कि प्रसून कविता, साहित्य के अलावा विज्ञापन की दुनिया से भी जुड़े हुए हैं।उन्होंने अपने करियर की शुरूआत विज्ञापनों से ही की थी। 'ठंडा मतलब कोका-कोला' की पंच लाइन उन्हीं की देन है।

फिल्मों में उन्होंने पहली बार राज कुमार संतोषी की फिल्म 'लज्जा' (2001) के लिए गीत लिखे। इसके बाद फिल्म हम-तुम, फना, तारे जमीं पर, ब्लैक, दिल्ली 6, रंग दे बसंती के गीत लिखे। वे डायलॉग भी लिखते हैं।

2007 में उन्हें फिल्म फना के गीत 'चांद सिफारिश' के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला। इसके बाद 2008 में 'तारे जमीं पर' के गीत 'मां' के लिए और 'भाग मिल्खा भाग' के लिए भी यह अवॉर्ड मिला। फिल्म 'तारे जमीं पर' और 'चटगांव' के लिए उन्हें दो बार नेशनल अवॉर्ड मिल चुका है।  


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