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मीडिया से विवादः कंगना रनौत को बिग बी और सलमान खान से सीखने की जरूरत

गिरिधर झा - JUL 12 , 2019
मीडिया से विवादः कंगना रनौत को बिग बी और सलमान खान से सीखने की जरूरत
मीडिया से विवादः कंगना रनौत को बिग बी और सलमान खान से सीखने की जरूरत
गिरिधर झा

बॉलीवुड में एक्टर-पत्रकारों के संबंधों के बारे में जो कोई भी थोड़ा-बहुत जानता है, वह बताएगा कि दोनों के बीच हमेशा से मधुर और कटु संबंध रहे हैं...

बतौर ‘जजमैंटल’ खारिज किए जाने के जोखिम पर मैं यह कहना चाहता हूं। कंगना रनौत को बॉलीवुड के किसी समझदार शख्स से सलाह लेने की जरूरत है। वह शख्स उनका भरोसेमंद (अगर कोई है!) हो और बता सके कि उन्हें फिल्म पत्रकारों के खिलाफ अपमानजनक मुहिम शुरू करने की जरूरत नहीं है। तब भी जब पत्रकारों का एक वर्ग उन्हें या उनकी फिल्मों को पसंद नहीं करते हों। अगर कोई फिल्म इंडस्ट्री में एक्टर्स और पत्रकारों के संबंधों से जुड़े घटनाक्रमों से वाकिफ है, तो वह कंगना को बताएगा कि दोनों के बीच मधुर-कटु संबंध रहे हैं और बगैर किसी विकल्प के दोनों को हमेशा इस तड़क-भड़क वाले शहर के इकोसिस्टम में ही रहना है।

भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की स्थापना के बाद हमेशा से ऐसा ही रहा है। यही कारण है कि कंगना को कुछ फिल्मी पत्रकारों को चोट पहुंचाने की बात सुनकर झटका लगा। यहां तक कि उन्हें 'बिकाऊ' सहित तमाम बातें कही गईं। यह एक पेशेवर अभिनेत्री का बेहद अनुचित व्यवहार था, जो न सिर्फ खुद को फिलहाल फिल्म इंडस्ट्री में सबसे अधिक फीस लेने वाली नायिका होने का दावा करती है, बल्कि अपने प्रदर्शन के लिए तीन राष्ट्रीय पुरस्कार भी जीत चुकी है। इतना ही नहीं, इंडस्ट्री के बाहर और भीतर कई लोग उन्हें महिला सशक्तिकरण के प्रतीक के रूप में देखते हैं, क्योंकि हाल के वर्षों में उन्होंने बॉलीवुड में मौजूदा पितृसत्तात्मक व्यवस्था को चुनौती देने की कोशिश की है।

कंगना की बहन रंगोली ने अपने ट्विटर अकाउंट पर एक वीडियो डाला और पत्रकारों के साथ भले ही उनके जो विवाद रहे हों, लेकिन उस वीडियो में कंगना ने जिन शब्दों को इस्तेमाल किया है, उसे माफ नहीं किया जा सकता है। यह सच है कि रिलीज से एक दिन पहले होने वाले विवाद फिल्मों को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं और कंगना की एक बड़ी फिल्म ‘जजमेंटल है क्या’ पर्दे पर आ रही है। लेकिन वह इस तरह के विवाद में उलझने से बच सकती थी, क्योंकि चाहे कितनी भी अच्छी या बुरी फिल्म हो, हर पत्रकार के पास उसकी आलोचना करने का अधिकार होता है।

यह सब मुंबई में उनकी आने वाली फिल्म के प्रमोशनल इवेंट वाले और उसके अगले दिन शुरू हुआ, जहां कंगना ने एक पत्रकार पर अपने खिलाफ छिपा एजेंडा चलाने का आरोप लगाया। तमाम बातों के अलावा, वह बेहद नाराज थीं, क्योंकि उस पत्रकार ने इस साल की शुरुआत में आई उनकी महत्वाकांक्षी फिल्म मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी (2019) की आलोचना की थी। इस पर मुंबई में एंटरटेनमेंट कवर करने वाले पत्रकारों के एक गिल्ड ने तीखी प्रतिक्रिया दी और उनसे मे माफी की मांग के अलावा उन पर पाबंदी भी लगा दी। हालांकि, 32 वर्षीय अभिनेत्री ने अपने दो वीडियो में इसका आक्रामक जवाब दिया।

यह पहली या आखिरी बार नहीं है जब किसी फिल्म स्टार का किसी पत्रकार के साथ विवाद हुआ है। फिल्म इंडिया के मशहूर बाबूराव पटेल की हमेशा से इंडस्ट्री में कई दुश्मन थे, क्योंकि वे उस समय के शीर्ष सितारों सहित फिल्मी हस्तियों पर तीखी टिप्पणी करते थे। बाद के दशकों में, देवयानी चौबल ने स्टार ऐंड स्टाइल मैगजीन के लोकप्रिय गॉशिप कॉलम ‘फ्रैंकली स्पीकिंग’ में कई अभिनेताओं और अभिनेत्रियों को गलत तरीके से इस्तेमाल किया।

एक बार, धर्मेंद्र पर ब्लिट्ज के एक रिपोर्टर से मारपीट करने का आरोप लगाया गया था, क्योंकि उसने कथित रूप से हेमा मालिनी के बारे में साप्ताहिक टेबलॉयड में कुछ अशोभनीय लिख दिया था। लेकिन सबसे लंबे समय तक चलने वाला झगड़ा महानायक अमिताभ बच्चन और एक गॉशिप मासिक पत्रिका के बीच चला, जो सत्तर के दशक में शुरू हुआ और 1980 के दशक के बीच में खत्म हुआ। पर अमिताभ बच्चन ने कभी भी पत्रिका के खिलाफ कोई अशोभनीय शब्द इस्तेमाल नहीं किया, जबकि पत्रिका ने वर्षों तक अपने कॉलम में उनके नाम की जगह “नाराज अधेड़ उम्र का नायक” शब्द का इस्तेमाल किया।

लेकिन उस मीडिया बहिष्कार ने बच्चन की लोकप्रियता में कोई दाग नहीं लगाई। यहां तक कि इसी मीडिया बहिष्कार के दौरान ही उनकी कुछ जबरदस्त हिट्स फिल्में आईं। इसी तरह, किसी भी तरह के मीडिया बैन से कंगना को बॉक्स ऑफिस पर किसी भी समस्या का सामना नहीं करना पड़ सकता है, लेकिन उन्हें फिल्म आलोचकों और समीक्षकों की आलोचनाओं को संभालना सीखना होगा। भले ही कथित तौर पर सलमान खान के साथ उनके संबंध उतने अच्छे नहीं हों, लेकिन उन्हें सलमान से एक सबक लेनी चाहिए। अपनी फिल्म की किसी भी बुरी समीक्षा पर गुस्साने या झुंझलाने की जगह दबंग (2009) स्टार का कहना है कि वह केवल तभी चिंतित हो जाता है, जब कोई समीक्षक उनकी तारीफ करता है।

वे मानते हैं कि एक फिल्म समीक्षक की राय हमेशा दर्शकों की प्रतिक्रिया से भिन्न होती है, जो किसी फिल्म की तकदीर के असली मालिक होते हैं।

कंगना को अपने या अपनी फिल्म के खिलाफ लिखने वाले किसी पत्रकार से गुस्सा जाहिर करने, आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करने या लंबे समय तक दुर्भावना रखने के बजाय इस तरह की हाजिरजवाबी को सीखने की जरूरत है।

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