Home सिनेमा बॉलीवुड भानुरेखा कुछ ऐसे बनीं रेखा, जानिए उनकी जिदंगी से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें

भानुरेखा कुछ ऐसे बनीं रेखा, जानिए उनकी जिदंगी से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें

आउटलुक टीम - OCT 10 , 2019
भानुरेखा कुछ ऐसे बनीं रेखा, जानिए उनकी जिदंगी से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें
भानुरेखा कुछ ऐसे बनीं रेखा, जानिए उनकी जिदंगी से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें
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बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री रेखा आज अपना 65वां जन्मदिन मना रही हैं। इन दिनों फिल्मों से दूर रहने के बावजूद रेखा ने लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाई हुई है। 10 अक्टूबर, 1954 में जन्मीं रेखा ने अपने फिल्मी करियर के दौरान कई उतार-चढ़ाव देखे। करियर के अलावा उनकी जिंदगी में भी कई मोड़ आए, लेकिन आज भी रेखा ने मजबूती से अपनी पहचान बनाई हुई है। उनके अंदाज को देखकर कोई भी उनकी उम्र का अंदाजा नहीं लगा सकता है। खास बात तो यह है कि सदाबहार रेखा आज भी बॉलीवुड की दिग्गज एक्ट्रेस को मात देने की हिम्मत रखती हैं। उनके जन्मदिन के मौके पर आइए जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़ी कुछ खास और अनसुनी बातें-

रेखा का असली नाम भानुरेखा गणेशन है। निजी जिंदगी हो या पेशेवर जिंदगी, रेखा ने दोनों में ही काफी संघर्ष किया है। रेखा का जन्म 10 अक्टूबर, 1954 को मद्रास (अब चेन्नई) में हुआ था। उनके पिता जेमनी गणेशन मशहूर तमिल अभिनेता और मां पुष्पावल्ली तेलुगू अभिनेत्री थीं। रेखा को अपने पिता से शुरुआत से ही कोई लगाव नहीं था। एक साक्षात्कार में रेखा ने कहा था, ‘मेरे लिए 'फादर' शब्द का कोई अर्थ नहीं है. मेरे लिए 'फादर' शब्द का मतलब चर्च का 'फादर' है’।

फिल्म 'रंगुला रत्नम' से की अभिनय की शुरुआत

रेखा ने 1966 में तेलुगू फिल्म 'रंगुला रत्नम' से अभिनय की शुरुआत की थी। फिल्म में उन्होंने बाल कलाकार की भूमिका निभाई थी। रेखा को फिल्मों में आने में दिलचस्पी नहीं थी, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति के कारण उन्हें अभिनय जारी रखना पड़ा।

कुछ दक्षिण भारतीय फिल्मे करने के बाद रेखा ने बंबई की ओर रुख किया और हिंदी फिल्मों के काम करना शुरू किया। बंबई उनके लिए एकदम नया था। सांवला रंग और लड़खड़ाती हिंदी के कारण रेखा को बंबई में भी काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने फिल्म 'सावन भादो' (1970) के साथ आगाज किया और रातों रात मशहूर हो गईं।

हिंदी सिनेमा में अपने पैर जमाए रखने के लिए रेखा ने हिंदी और अपना रंग संवारने पर काफी मेहनत की। सांवली से गोरी हुई रेखा के बारे में कयास लगाए जा रहे थे कि उन्होंने सिंगापुर से गोरे होने वाली क्रीम मंगाई थी, लेकिन एक साक्षात्कार में रेखा ने इसे खारिज करते हुए कहा था कि यह सब योग से संभव हुआ। उन्होंने कोई विशेष क्रीम नहीं मंगाई।

रेखा ने 175 हिंदी और दक्षिण भारतीय फिल्मों में किया काम

अपने करियर में रेखा ने करीब 175 हिंदी और दक्षिण भारतीय फिल्मों में काम किया है जिनमें 'खूबसूरत', 'खून भरी मांग', 'खून और पसीना', 'मुकद्दर का सिकंदर' और 'उमराव जान' उनकी बेहद कामयाब फिल्में हैं। वह तीन फिल्मफेयर और एक राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीत चुकी हैं। रेखा को भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से भी सम्मानित किया जा चुका है।

शादी और प्रेमप्रसंगों को लेकर भी चर्चा में रहीं हैं रेखा

रेखा, शादी और प्रेमप्रसंगों को लेकर भी सुर्खियों में रही हैं। रेखा का नाम लंबे समय तक अभिताभ बच्चन के साथ जुड़ता रहा। दोनों की जोड़ी पर्दे पर भी काफी लोकप्रिय रही। दोनों ने 'ईमान धरम', 'गंगा की सौगंध', 'मुकद्दर का सिकंदर' और 'सुहाग' जैसी फिल्मों में साथ काम किया।

यश चोपड़ा की 'सिलसिला' अमिताभ और रेखा की एक साथ आखिरी फिल्म थी। ऐसा भी कहा जाता है कि ये कहानी असल में दोनों की कहानी से प्रेरित है। रेखा की अभिनेता विनोद मेहरा से भी शादी की खबरें आई थीं लेकिन एक साक्षात्कार में रेखा ने विनोद से शादी की बात से इनकार करते हुए कहा था, ‘कोई कुछ भी कह सकता है’।

रेखा ने मुकेश अग्रवाल से की थी शादी

असफल प्रेम संबंधों के बाद रेखा ने 1990 में दिल्ली के एक व्यवसायी मुकेश अग्रवाल से शादी की थी, लेकिन यहां भी किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। मुकेश ने शादी के एक साल बाद 1991 में आत्महत्या कर ली। हालांकि रेखा आज भी सिंदूर लगाती हैं। वैसे, अपनी शादी से पहले ऋषि कपूर और नीतू सिंह की शादी में वह सिंदूर लगाकर पहुंची थीं। बाद में साल 2008 में एक अवॉर्ड समारोह में भी वह सिंदूर लगाकर पहुंची थीं। वह सिंदूर क्यों लगाती हैं इसका रहस्य आज तक किसी को नहीं पता चल पाया है।

जब रेखा ने बताया था अकेलेपन का मतलब

अकेलेपन के बारे में रेखा कहना है, ‘अकेले रहने का मतलब हमेशा तन्हा रहना नहीं है। हम अपने हिसाब से और अपने खुद के लिए जिंदगी जीते हैं’। भारतीय सिनेमा में रेखा अदाकारी, खूबसूरती की एक मिसाल हैं। रेखा ने व्यक्तिगत तौर पर संघर्ष करते हुए अपनी मेहनत और लगन के दम पर यह मुकाम हासिल किया है और आज भी वह उसी लगन ने निरंतर आगे बढ़ रही हैं।

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