Home सिनेमा बॉलीवुड कैसे सदी के महानायक बन गये अमिताभ, जानिए इसके पीछे की दिलचस्प कहानी

कैसे सदी के महानायक बन गये अमिताभ, जानिए इसके पीछे की दिलचस्प कहानी

आउटलुक टीम - OCT 11 , 2019
कैसे सदी के महानायक बन गये अमिताभ, जानिए इसके पीछे की दिलचस्प कहानी
कैसे सदी के महानायक बन गये अमिताभ, जानिए इसके पीछे की दिलचस्प कहानी
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बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन का आज 77वां जन्मदिन है। कई दशकों से पर्दे पर अपने दमदार अभिनय से करोड़ों लोगों के दिल में बसे हुए अमिताभ पर्दे पर अलग-अलग किरदार को जिवंत बना देते हैं। अमिताभ के असल जीवन की कहानी भी किसी सुपरहिट फिल्म की स्क्रिप्ट से कम नहीं है। हाल ही में महानायक को दादा साहब फाल्के अवॉर्ड दिए जाने की घोषणा हुई है। वैसे तो कई किस्से उनकी जिदंगी के ऐसे हैं जिसे याद कर या जानकर ताज्जुब होता है, लेकिन एक किस्सा जो उनके नाम से जुड़ा है वह काफी दिलचस्प है। अमिताभ शब्द का अर्थ होता है 'अत्यंत तेजस्वी' और उनका नाम सार्थक भी है क्योंकि अपनी तेजस्विता से उन्होंने पूरे कला जगत को गौरवान्वित किया है। क्या आपने कभी सोचा है कि अमिताभ को अमिताभ नाम दिया किसने था? नहीं तो जानिए इस नाम के पीछे की कहानी-

अमिताभ बच्चन हरिवंश राय बच्चन के पुत्र हैं और हरिवंश राय बच्चन छायावाद के एक बड़े स्तंभ थे। इसी छायावाद युग में हिन्दी के एक ऐसे कवि भी थे जिसे लोग 'इंडिया का वर्ड्सवर्थ' कहते थे। इस मशहूर कवि का नाम मशहूर कवि सुमित्रानंदन पंत था। मशहूर कवि सुमित्रानंदन पंत ने ही अमिताभ बच्चन को अमिताभ नाम दिया था।

किसने दिया अमिताभ बच्चन को अमिताभ नाम

दरअसल जब 11 अक्टूबर को अमिताभ का जन्म हुआ तो बचपन में उनकी मां तेजी बच्चन उन्हें मुन्ना कह कर बुलाती थी। बाद में पिता हरिवंश राय बच्चन ने उनका नाम इंकलाब रखा। अब चूकि हरिवंश राय बच्चन स्वयं एक बड़े कवि रहे तो उनके घर अक्सर इलाहाबाद में कवियों की महफिल जमती थी। एक बार ऐसे ही कवि सुमित्रानंदन पंत उनके घर आए। उन्होंने अमिताभ को देखा और पूछा बेटा तुम्हारा नाम क्या है..अमिताभ ने कहा- इंकलाब..पंत इस नाम से खुश नहीं हुए और तुरंत कहा- इसे अमिताभ नाम से बुलाओ..बस फिर क्या था, उसी दिन से इंकलाब अमिताभ बच्चन बन गए। पंत को शायद उस वक्त मालूम नहीं था कि एक दिन अमिताभ वाकयी अपने नाम को सिद्ध कर देंगे और उनको पूरी दुनिया जानने लगेगी।

लगातार फ्लॉप फिल्मों के बाद बॉलीवुड में जमा पांव

हिंदी सिनेमा में 50-60 के दशक का दौर रोमांटिक फिल्मों का था जिसके सबसे बड़े नायक बने राजेश खन्ना दमदार व्यक्तित्व, चॉकलेटी अंदाज, उनकी नटखट अदाओं, और खूबसूरत गानों की बदौलत राजेश खन्ना रुपहले पर्दे पर रोमांटिक फिल्मों के बादशाह बन गए।

इसी समय 'सात हिन्दुस्तानी' फिल्म से शुरूआत करने वाला लंबे कद का दुबला-पतला एक लड़का बॉलीवुड में पांव जमाने की कोशिश कर रहा था। लगातार सात आठ फिल्में फ्लॉप हो चुकी थीं और वो निर्देशकों के ऑफिस के बाहर एक अदद सफलता की तलाश में था, ये थे अमिताभ बच्‍चन, जिन्‍हें दुनिया आज बिग बी के नाम से जानती है।

फैंस को पसंद आया बिग बी का एंग्री यंग मैन वाला किरदार

पांच दशक के अपने लंबे सिनेमाई सफर के दौरान अमिताभ बच्चन ने एक्शन, कॉमेडी, थ्रिलर, हॉरर और न जाने कितनी ही तरह की जॉनर की फिल्मों में काम किया, लेकिन बिग बी का एंग्री यंग मैन वाला किरदार उनके फैंस के लिए सबसे ज्यादा अनमोल है। ‘शोले’ से लेकर ‘दीवार’ और ‘कालिया’ तक में अमिताभ ने जिस एंग्री यंग मैन के किरदार को निभाया वो आज भी याद किया जाता है। इन्हीं किरदारों के कहे डायलॉग आज भी उनके फैंस को याद हैं।

'जंजीर' ने भारतीय सिने जगत को दिया नया सितारा

आखिरकार इंतजार खत्म हुआ और 1970 में रिलीज हुई फिल्म 'जंजीर' ने भारतीय सिने जगत को नया सितारा दिया। ईमानदार और गुस्सैल पुलिस ऑफिसर के किरदार में अमिताभ खूब फबे... नये सितारे को नया नाम मिला... एंग्री यंग मैन...इसके बाद से अमिताभ ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। एक के बाद एक उनकी फिल्मों ने कामयाबी के नए झंडे गाड़े।

फिल्म समीक्षकों की तमाम आलोचनाओं के बावजूद जनता ने फिल्मों को सराहा

जंजीर से शुरू हुआ उनका 'सफर', 'कुली', 'लावारिस', 'कालिया', 'दीवार', 'काला पत्थर', 'रोटी कपड़ा और मकान', 'मुकद्दर का सिंकदर', 'सुहाग', 'खून पसीना', 'नमक हलाल', 'नमक हराम' और 'अग्निपथ' तक लगातार जारी रहा। इन सभी फिल्मों ने सिनेमा जगत के तमाम रिकॉर्ड को तोड़ा। सफलता ऐसी मिली की हर कोई हैरान रह गया।

सवाल यह भी है कि आखिर अमिताभ बच्चन की इन फिल्मों में ऐसा क्या था कि फिल्म समीक्षकों की तमाम आलोचनाओं के बावजूद जनता ने इनको हाथों-हाथ लिया और बॉक्स-ऑफिस पर भी इसने कमाई के सारे रिकॉर्ड तोड़े। इनमें भी अगर शोले को नजरअंदाज कर दिया तो गुस्ताखी होगी। कुछ फिल्म समीक्षकों का मानना कि अमिताभ की फिल्मों की सफलता का राज तब की सोशल कंडीशन में छुपा हुआ है।

अमिताभ की फिल्मों में दिखाई पड़ती है उस दौर के स्थितियों की झलक

दरअसल, जिस दौर में अमिताभ की ये फिल्में रिलीज हुईं वो समय भारत में फैक्ट्रियों के विकास, मिलों के विस्तार, अमीरी-गरीबी के बड़े अंतर, मालिक मजदूर के बीच संघर्ष और मिलों में होने वाली हड़तालों के दौर से गुजर रहा था और इसकी पूरी झलक अमिताभ की फिल्मों में दिखाई पड़ती थी।

इन कारणों ने अमिताभ को बनाया सदी का महानायक

अमिताभ की फिल्में तब के दौर में शुद्ध मसाला एक्शन फिल्में हुआ करती थीं जिसमें ड्रामा, एक्शन, कॉमेडी और रोमांस सब कुछ हुआ करता था। फिल्मों में किसी लीड अभिनेता द्वारा कॉमेडी किए जाने का ट्रेंड भी अमिताभ ने ही सेट किया। उनकी कॉमेडी सिक्वेंस की बात करें तो फिल्म ‘अमर अकबर एंथोनी’ में शराब के नशे में शीशे के सामने खुद से बात करने वाला सीन काफी पॉपुलर हुआ था। वहीं, नमक हलाल में नाले में बहता हुआ जूता उठाने का सीन, सब में अमिताभ खूब जमें, यही वो कारण थे जिसने अमिताभ को सदी का महानायक अमिताभ बनाया।

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