Home अर्थ जगत जमा पूंजी डीजल-पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी का सिलसिला थमा, 22वें दिन नहीं बढ़े दाम

डीजल-पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी का सिलसिला थमा, 22वें दिन नहीं बढ़े दाम

आउटलुक टीम - JUN 28 , 2020
डीजल-पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी का सिलसिला थमा, 22वें दिन नहीं बढ़े दाम
डीजल-पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी का सिलसिला थमा, 22वें दिन नहीं बढ़े दाम
आउटलुक टीम

कोरोना संक्रमण के चलते लगाए गए लॉकडाउन के धीरे-धीरे खुलने के साथ ही पेट्रोल-तथा डीजल की कीमत में बढ़ोतरी बरकरार है। दरअसल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में मामूली तेजी के बीच आज घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमत में लगातार 21वें दिन तक बढ़ोतरी देखने को मिली। 21 दिन से हर रोज डीजल और पेट्रोल की कीमतों में इजाफे का सिलसिला जारी था, जो रविवार को थम गया। रविवार को यानी 22वें दिन डीजल और पेट्रोल के दाम नहीं बढ़े।  देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमत 80 रुपये के पार पहुंच चुकी है। ऐसा पहली बार है, जब डीजल पेट्रोल से ज्यादा महंगा हुआ है और दोनों के दाम 80 रुपये के पार पहुंच गए हैं।

राजधानी दिल्ली में शनिवार को तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद डीजल 80.40 रुपये प्रति लीटर तो वहीं, पेट्रोल 80.38 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से बिक रहा है।  इन 21 दिनों में पेट्रोल 9.12 रुपये और डीजल 11 रुपये प्रति लीटर महंगा हो चुका है।

गौरतलब है कि डीजल-पेट्रोल की कीमतों में लगातार इजाफे को लेकर कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों ने भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ऐसे समय में जब जनता संकट से जूझ रही है, कांग्रेस ने डीजल-पेट्रोल के दाम बढ़ाने की आलोचना की थी।

जानें आपके शहर में क्या है पेट्रोल और डीजल की कीमत

शहर 

पेट्रोल

डीजल

दिल्ली

80.38

80.40

मुंबई

87.14

78.71

कोलकाता

82.05

75.52

चेन्नई

83.59

77.61

सिर्फ दिल्ली में डीजल हुआ आगे

देश के इतिहास में पहली बार डीजल की कीमतों ने पेट्रोल की कीमतों को पीछे छोड़ दिया। हालांकि ये स्थिति सिर्फ दिल्ली में है। देश के बाकी हिस्सों में अभी भी पेट्रोल के मुकाबले डीजल का रेट कम है। दिल्ली में बढ़ी कीमत का एक कारण वैट भी है। दिल्ली सरकार ने लॉकडाउन के दौरान डीजल पर वैट की दर को बढ़ा दिया था।

बढ़ाई गई थी एक्साइज ड्यूटी

छह मई को सरकार के पेट्रोल पर 10 और डीजल पर 13 रुपये प्रति लीटर उत्पाद शुल्क और बढ़ाने के बावजूद इनकी कीमतें स्थिर बनी रही। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के रिकॉर्ड निचले स्तर पर चले जाने से कंपनियों को जो लाभ हुआ उन्होंने इससे सरकार द्वारा बढ़ाए गए उत्पाद शुल्क की बढ़ोतरी की।

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