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विशाल सिक्का को क्यों छोड़नी पड़ी इंफोसिस, उनके इस्तीफे से जुड़ी 5 खास बातें

विशाल सिक्का को आखिरकार इंफोसिस के सीईओ पद से इस्तीफा देना पड़ा। यह एकाएक हुआ हो ऐसा नहीं है। इस्तीफे को लेकर कई अहम बातें सामने आई हैं।
विशाल सिक्का को क्यों छोड़नी पड़ी इंफोसिस, उनके इस्तीफे से जुड़ी 5 खास बातें

भारत की दूसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी इंफोसिस के सीईओ विशाल सिक्का के इस्तीफे ने लोगों को हैरान कर दिया है। सिक्का को 12 जून 2014 की इंफोसिस का सीईओ नियुक्त किया गया था। नियुक्ति के कुछ समय बाद खास तौर पर इंफोसिस के संस्थापक एन आर नारायणमूर्ति के साथ उनके मतभेद सुर्खियां बनी। इसके बाद कंपनी में आंतरिक कलह लगातार चल रही थी। सिक्का की कार्यप्रणाली को लेकर संस्थापकों और अधिकारियों ने भी बगावती तेवर अपनाए थे। आइए कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर गौर करें जिसकी वजह से सिक्का को कंपनी छोड़नी पड़ी।

संस्थापकों से मतभेद

फरवरी 2017 में इंफोसिस के सीईओ विशाल शिक्का के कामकाज को लेकर कंपनी के संस्थापकों ने शिकायत दर्ज कराई थी। एस गोपालकृष्णन और नंदन निलेकणी ने निदेशक मंडल से की गई शिकायत के मुताबिक कंपनी के भीतर कॉरपोरेट गवर्नेंस के मानकों का पालन नहीं हो रहा था। मूर्ति तथा दो अन्य सह-संस्थापकों नंदन नीलेकणि एवं एस गोपालकृष्णन ने कंपनी के निदेशक मंडल को पत्र लिखकर पूछा था कि सिक्का का वेतन क्यों बढ़ाया गया और कंपनी छोड़ने वाले दो शीर्ष अधिकारियों को अलग होने का इतना भारी पैकेज क्यों दिया गया?

नारायणमूर्ति की नाराजगी

इस्तीफे की सबसे बड़ी वजह इनफोसिस के संस्थापक रहे एन आर नारायणमूर्ति रही। फरवरी 2017 में नारायणमूर्ति ने कहा कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से विशाल सिक्का से कोई परेशानी नहीं है, बल्कि कंपनी का गवर्नेंस बोर्ड जिस तरह काम कर रहा है, उससे वे नाराज हैं। उनका कहना है कि जिस मनमाने ढंग से सुविधाएं दी गई। इससे अन्य कर्मचारियों का मनोबल पर बुरा असर पड़ा।

सेवरेंस पे और सिक्का पर सवाल

इकोनॉमिक टाइम्‍स के मुताबिक, पूर्व लीगल हेड केनेडी को 12 महीने और पूर्व सीएफओ राजीव बंसल को 30 महीने का सेवरेंस पे दिया गया। इसके अलावा कुछ कर्मचारियों को मोटी रकम सेवरेंस पे के तौर पर देने से सिक्का पर सवाल उठे।

दरअसल, इंफोसिस में नियम है कि कंपनी के कर्मचारी को तीन महीने का सेवरेंस पे दिया जाए। सेवरेंस पे वह रकम है जो कंपनी किसी कर्मचारी को निर्धारित समय से पहले कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने पर देती है।

नारायणमूर्ति ने भी इस पर नाराजगी जाहिर की थी। इकोनॉमिक टाइम्‍स के मुताबिक, उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को भारी-भरकम सेवरेंस पे देने पर कई इम्‍प्‍लॉइज का मनोबल गिरा है। अलग-अलग इम्‍प्‍लॉई की ओर से उनको 1,800 से ज्यादा मेल मिले।

सैलरी पर सवाल

मूर्ति तथा दो अन्य सह-संस्थापकों नंदन नीलेकणि एवं एस गोपालकृष्णन ने कंपनी के निदेशक मंडल को पत्र लिखकर पूछा था कि सिक्का का वेतन क्यों बढ़ाया गया? सिक्का को पिछले साल मूल वेतन, बोनस और लाभ के रूप में 48.7 करोड़ रुपये दिए गए। वहीं 2015 की आंशिक अवधि में उनका मूल वेतन 4.5 करोड़ रुपये था। न्यूज-18 के मुताबिक, विशाल सिक्का ने कंपनी का टर्नओवर 2021 तक 20 अरब डॉलर कर देने का लक्ष्य दिया था। इस आधार पर उन्हें एक करोड़ दस लाख डॉलर के सालाना पैकेज पर रखा गया था। इसमें से 30 लाख डॉलर तो फिक्स्ड सैलरी थी, लेकिन बाकी आठ लाख उनके परफॉरमेंस के आधार पर दिया जाना तय हुआ था।

तनाव के 100 घंटे

सिक्का ने अपने इस्तीफे में कहा है कि उन पर लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद और झूठे साबित हुए हैं। उनके काम में लगातार बाधाएं डाली गई। उन्होंने कहा कि उन्होंने 100 घंटे से ज्यादा तनाव में बिताए हैं। विशाल सिक्का का कहना है कि उन्होंने शेयरधारकों के हित में इस्तीफा दिया है।

विशाल सिक्का ने अपने इस्तीफे में जिक्र किया कि इंफोसिस की ताकत पर उनका विश्वास अब भी कायम है। कामकाज में लगातार आ रही रुकावट के कारण उन्होंने इस्तीफा दिया है। पिछली कुछ तिमाहियों के दौरान काम में दखलंदाजी बढ़ने और उन पर पर हो रही बयानबाजी से कामकाज में परेशानी आ रही थी।

 

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