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नोटबंदी के दौरान पिछले चार साल में सबसे ज्यादा बढ़ी बेरोजगारी

आउटलुक टीम - JAN 11 , 2019
नोटबंदी के दौरान पिछले चार साल में सबसे ज्यादा बढ़ी बेरोजगारी
नोटबंदी के दौरान चार साल के उच्चतम स्तर पर बेरोजगारी दर

नोटबंदी के दौरान देश में बेरोजगारी दर पिछले चार साल में सबसे अधिक बढ़ी। लेबर ब्यूरो के आंकड़े के मुताबिक, 2016-17 के दौरान जब नोटबंदी का फैसला लिया गया, तो उस दौरान बेरोजगारी दर पिछले चार साल के सबसे उच्चतम स्तर पर थी। लेबर ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार, देश में उस  दौरान ऐसे लोग काफी संख्या में लेबर फोर्स से जुड़े, जिन्हें नौकरियों की तलाश थी। इससे संबंधित लेबर ब्यूरो की छठी वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, 2016-17 में बेरोजगारी दर 3.9 प्रतिशत थी, जबकि 2015-16 में यह 3.7 थी। वहीं, 2013-14 में बेरोजगारी दर 3.4 प्रतिशत थी। बेरोजगारी दर से मतलब है कि एक खास अनुपात में श्रमबल उपलब्ध है, लेकिन उसे नौकरियां नहीं मिल रही हैं।

लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट (एलएफपीआर) काम कर रहे या काम की तलाश करने वाले श्रमबल का अनुपात होता है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह 2015-16 में 75.5 प्रतिशत से 2016-17 में 76.8 प्रतिशत तक पहुंच गया। हालांकि, नौकरियों में महिलाओं की मौजूदगी बढ़ी है। वह भी खासतौर पर देश के ग्रामीण हिस्सों में यह दर बढ़ी है।

एनएसएसओ की रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नौकरियों को लेकर लेबर ब्यूरो का यह आखिरी सर्वे है, क्योंकि इसकी जगह अब नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस (एनएसएसओ) की तरफ से इस तरह के सर्वे किए जाएंगे। एनएसएसओ सर्वे में 2017-18 के आंकड़े शामिल हैं। हालांकि, यह अभी तक जारी नहीं किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, लेबर ब्यूरो की रिपोर्ट को श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष कुमार गंगवार से दिसंबर में ही मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन मंत्रालय ने इसे अभी तक सार्वजनिक नहीं किया है।

मंत्री ने संसद को बताया पिछले साल का आंकड़ा

सूत्रों का कहना है, “मुद्रा योजना से मिले रोजगार और एनएसएसओ द्वारा रोजगार संबंधी रिपोर्ट जारी किए जाने के बाद श्रम मंत्रालय अपनी रिपोर्ट के नतीजे जारी कर सकता है।” दरअसल, संतोष कुमार गंगवार ने संसद की हालिया शीतकालीन सत्र के दौरान रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया था। जब सांसदों ने रोजगार संबंधी सवाल पूछे, तो गंगवार ने लेबर ब्यूरो की पिछले साल की रिपोर्ट का हवाला दिया।

शहरी इलाकों में अधिक बेरोजगारी

2016-17 में बेरोजगारी दर ग्रामीण इलाकों की तुलना में शहरी क्षेत्रों में अधिक देखी गई। रिपोर्ट के अनुसार, शहरी इलाकों में पुरुषों के बीच रोजगार दर ज्यादा कम हुए हैं। पिछले साल की तीन फीसदी की तुलना में इस साल यह 3.8 फीसदी हो गई। हालांकि, महिलाओं के बीच यह 10.8 फीसदी से बढ़कर 11.2 फीसदी हो गई।

हालांकि, लेबर ब्यूरो की रिपोर्ट नवंबर 2016 की नोटबंदी का पूरा प्रभाव का आकलन करने में विफल रही है, क्योंकि सर्वे से संबंधित फील्ड वर्क उस साल 2016 के दौरान अप्रैल और दिसंबर के बीच किए गए थे।

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