Home अर्थ जगत सामान्य कच्चा तेल पानी से भी सस्ता लेकिन पेट्रोल, डीजल की कीमत सिर्फ एक रुपया घटी

कच्चा तेल पानी से भी सस्ता लेकिन पेट्रोल, डीजल की कीमत सिर्फ एक रुपया घटी

के के कुलश्रेष्ठ - MAR 11 , 2020
कच्चा तेल पानी से भी सस्ता लेकिन पेट्रोल, डीजल की कीमत सिर्फ एक रुपया घटी
कच्चा तेल पानी से भी सस्ता लेकिन पेट्रोल, डीजल सिर्फ एक रुपया सस्ता

विश्व बाजार में कच्चे तेल के दाम करीब 30 फीसदी घट चुके हैं और यह पानी से भी सस्ता हो चुका है। लेकिन बड़ा सवाल है कि भारत में उपभोक्ताओं को इसका फायदा कब मिलेगा। सवाल है कि क्या पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमत में इसी अनुपात में राहत मिलेगी या नहीं। और राहत मिलेगी तो कब। दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक शामिल सऊदी अरब और रूस के बीच छिड़े प्राइस वार के कारण कच्चा तेल 9 मार्च को घटकर 31 डॉलर प्रति बैरल रह गया। 9 मार्च को एक दिन में ही कच्चे तेल के मूल्य में 30 फीसदी की भारी भरकम गिरावट आई जो 1991 के खाड़ी युद्ध के बाद की सबसे बड़ी गिरावट थी। अब कच्चा तेल (डब्ल्यूटीआइ) 33.65 डॉलर प्रति बैरल पर बिक रहा है जबकि ब्रेंट क्रूड ऑयल 36.35 डॉलर प्रति बैरल पर है। कच्चे तेल में गिरावट आने के कारण दिल्ली में पेट्रोल के दाम घटकर 70.29 रुपये प्रति लीटर रह गए। डीजल के दाम 63.01 रुपये प्रति लीटर रह गए। एक सप्ताह पहले पेट्रोल 71.44 रुपये और डीजल 64.03 रुपये प्रति लीटर था।

इस वजह से गिरे कच्चे तेल के दाम

विश्व बाजार में कच्चे तेल मूल्य में भारी गिरावट की वजह सऊदी अरब और रूस के बीच की तनातनी रही। तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक में शामिल होने से रूस के इन्कार के बाद सऊदी ने कच्चे तेल के मूल्य में गिरावट कर दी। इसके अलावा उसने उत्पादन बढ़ाने की भी योजना बनाई है। ओपेक दुनिया भर में कच्चे तेल के उत्पादन को नियंत्रित रखने का प्रयास करता है ताकि विश्व बाजार में कच्चे तेल दाम वाजिब स्तर पर स्थिर रहें। उत्पादक देशों के हित में उसकी कोशिश होती है कि कच्चे तेल के मूल्य में ज्यादा गिरावट न आए, जिससे उत्पादक देशों की अर्थव्यवस्था को अस्थिरता से बचाया जा सके। लेकिन ओपेक के उत्पादक देशों का कच्चा तेल उत्पादन दुनिया के कुल उत्पादन में करीब 40 फीसदी है। ओपेक से बाहर के उत्पादक देशों में रूस और अमेरिका प्रमुख हैं।

पेट्रोल-डीजल पर टैक्स बेस प्राइस से भी ज्यादा

कच्चे तेल के दाम पानी से भी कम हो गए हैं। कच्चे तेल का विश्व बाजार में मूल्य करीब 35 डॉलर प्रति बैरल (159 लीटर) भी मान लें तो रुपये में इसका प्रति लीटर मूल्य 15-16 रुपये प्रति लीटर के करीब बैठता है जो वास्तव में पानी से भी सस्ता है। लेकिन दिल्ली में पेट्रोल 70.29 रुपये और डीजल 63.01 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। डॉलर के वर्तमान एक्सचेंज रेट, आयात खर्च, आयात शुल्क और रिफाइनिंग लागत को जोड़कर पेट्रोल का बेस प्राइस अभी भी 32.61 रुपये प्रति लीटर ही है। लेकिन इस पर करीब 35 रुपये वैट और एक्साइज ड्यूटी के अलावा डीलर कमीशन और परिवहन खर्च जोड़कर वास्तविक रिटेल मूल्य ( 70.29 रुपये) बेस प्राइस के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा हो जाता है। इसी तरह डीजल का बेस प्राइस 36.21 रुपये प्रति लीटर है लेकिन अत्यधिक टैक्स (एक्साइज ड्यूटी और वैट मिलाकर 26 रुपये) लगने के कारण इसका रिटेल मूल्य 63 रुपये प्रति लीटर के ऊपर है।

2016 में 26 डॉलर पर बिका था कच्चा तेल

कच्चे तेल के मूल्य ने 2016 में 26.21 डॉलर प्रति बैरल का निचला स्तर छुआ था। 2016 में इसका औसत मूल्य 43.58 डॉलर प्रति बैरल था। 2016 में देश में पेट्रोल का मूल्य 60-65 रुपये प्रति लीटर के आसपास रहा। जबकि डीजल का मूल्य 45 से 55 रुपये प्रति लीटर के बीच रहा। इसी तुलना मे देखें तो पेट्रोल और डीजल के मूल्य में भारी गिरावट आनी चाहिए।

कीमतें एक सप्ताह में घटने की उम्मीद

देश में पेट्रोल और डीजल के मूल्य में गिरावट के सवाल पर अधिकारियों का कहना है कि कच्चे तेल के मूल्य में आने वाले दिनों में गिरावट आएगी। उपभोक्ताओं को विश्व बाजार की पूरी गिरावट का फायदा एक सप्ताह में मिल पाएगा क्योंकि अभी भी भारतीय ऑयल बास्केट का मूल्य विश्व बाजार मूल्य के मुकाबले ज्यादा है। भारतीय ऑयल बास्केट का प्राइस पिछड़े पखवाड़े आयातित कच्चे तेल के प्रभावी औसत मूल्य के आधार पर तय होता है। कच्चे तेल के बास्केट मूल्य में गिरावट आएगी तो इसका फायदा उपभोक्ताओं को मिलेगा। पेट्रोलियम मंत्रालय के पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल के अनुसार 10 मार्च को भारतीय ऑयल बास्केट का मूल्य 34.52 डॉलर प्रति बैरल रह गया। डॉलर के मुकाले रुपये के एक्सचेंज रेट 73.95 पर भारतीय रुपये में कच्चे तेल का मूल्य 2552 रुपये प्रति बैरल (159 लीटर) रह गया है। इस तरह कच्चा तेल भारत में 16 रुपये प्रति लीटर के करीब रह गया है।

अर्थव्यवस्था के लिए अप्रत्याशित फायदा

कच्चे तेल के मूल्य में गिरावट से भारत को अप्रत्याशित फायदा मिल रहा है। भारत कच्चे तेल की आवश्यकता पूरी करने के लिए आयात पर ही ज्यादा निर्भर है। वह 84 फीसदी कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। कच्चे तेल के मूल्य मंें गिरावट आने से भारत की सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था को फायदा मिल सकता है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार चालू वित्त वर्ष में भारत का कच्चा तेल आयात बिल 105.58 अरब डॉलर (7.43 लाख करोड़ रुपये) रहने का अनुमान है। उसका कच्चा तेल आयात 22.5 करोड़ टन तक पहुंच सकता है। पिछले साल भारत ने 111.9 अरब डॉलर (7.83 लाख करोड़ रुपये) का 22.65 करोड़ टन कच्चे तल का आयात किया था। जाहिर है कि कच्चा तेल सस्ता होने से भारत करेंट एकाउंट डिफिशिट (सीएडी) मे कमी आएगी और व्यापार संतुलन भारत के पक्ष में होगा। पेट्रोल और डीजल सस्ता होने से देश में महंगाई पर अंकुश लगाने में सरकार को मदद मिलेगी।

अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिलेगीः कोटक रिसर्च

कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज रिसर्च ने भी कच्चे तेल के मूल्य में गिरावट आने से सुस्त पड़ी भारतीय अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिलने की उम्मीद जताई है। इससे भारत का करेंट एकाउंट डिफिशिट घटेगा, महंगाई पर अंकुश लगेगा और अर्थव्यवस्था में तेजी आएगी। उधर, मूडीज एनालिटिक्स के एनर्जी इकोनॉमिस्ट क्रिस लैफेकिस ने कहा कि कोरोना वायरस के चलते यात्रा और परिवहन क्षेत्र में मांग प्रभावित हो रही है। विश्व बाजार में कच्चे तेल की मांग से ज्यादा सप्लाई हो रही है। यह स्थिति अगले कई महीनों तक बनी रह सकती है। हालांकि भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों को इस स्थिति से बड़ी राहत मिलेगी।

कांग्रेस की मांग- 60 रुपये से नीचे लाएं पेट्रोल की कीमत

इस बीच, कांग्रेस ने सरकार से पेट्रोल, डीजल और एलपीजी के दाम घटाकर 2004 से पहले के स्तर पर लाने की मांग की है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की है कि पेट्रोल की कीमत 60 रुपये प्रति लीटर से नीचे लाई जाए। राहुल ने पीएमओ को ट्वीट करके कहा है कि आप कांग्रेस की चुनी सरकार को अस्थिर करने में व्यस्त हैं। शायद इसलिए आप ध्यान नहीं दे पाए होंगे कि विश्व बाजार में कच्चे तेल के दाम 35 फीसदी घट चुके हैं। क्या वे उपभोक्ताओं को इसका फायदा देने का कष्ट करेंगे और सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए इस अवसर का इस्तेमाल करेंगे। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने भी मांग की कि सरकार को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में उपभोक्ताओं को तुरंत फायदा दिया जाना चाहिए।

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