Home अर्थ जगत सामान्य मोदी सरकार का बड़ा फैसला- बकाया भुगतान के लिए दूरसंचार कंपनियों को 4 साल की मोहलत, 100% FDI को मंजूरी

मोदी सरकार का बड़ा फैसला- बकाया भुगतान के लिए दूरसंचार कंपनियों को 4 साल की मोहलत, 100% FDI को मंजूरी

आउटलुक टीम - SEP 15 , 2021
मोदी सरकार का बड़ा फैसला- बकाया भुगतान के लिए दूरसंचार कंपनियों को 4 साल की मोहलत, 100% FDI को मंजूरी
मोदी सरकार का बड़ा फैसला, टेलिकॉम सेक्टर में 100% एफडीआई को मंजूरी
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केंद्रीय कैबिनेट ने आज यानी बुधवार को दूरसंचार क्षेत्र के लिए राहत पैकेज को मंजूरी दी, जिसका उद्देश्य वोडाफोन आइडिया जैसी कंपनियों को राहत देना है। इन कंपनियों को हजारों करोड़ का पिछला वैधानिक बकाया चुकाना है। केंद्रीय कैबिनेट की अहम बैठक में केंद्र सरकार ने टेलीकॉम सेक्टर में 100 प्रतिशत एफडीआई (फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट) को मंजूरी दे दी है। टेलिकॉम मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फेंस में इसका ऐलान किया।

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अश्विनी वैष्णव ने कहा कि आज टेलिकॉम सेक्टर के ऑटोमेटिक रूट में 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति दी गई है। कैबिनेट ने कुल 9 स्ट्रक्चरल रिफॉर्म को मंजूरी दी है। इसके अलावा 5 प्रोसेस रिफॉर्म को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा टेलीकॉम कंपनियों को एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (एजीआर) पेमेंट पर भी 4 साल की राहत मिलेगी।

इसके अलावा कर्ज में डूबे तमाम टेलिकॉम सेक्टर को राहत देते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने टेलीकॉम द्वारा स्पेक्ट्रम बकाया के भुगतान पर रोक को मंजूरी दे दी है। टेलिकॉम कंपनियों को स्पेक्ट्रम चार्जेज और एजीआर बकाए को लेकर 4 सालों का मोराटोरियम दिया जाएगा।

इसके अलावा टेलिकॉम मिनिस्टर ने बताया कि स्पेक्ट्रम यूजेज चार्ज को भी घटाए जाने की तैयारी है। साथ ही बैंक गारंटी को घटाने की तैयारी चल रही है। वहीं, एजीआर कैलकुलेशन के तरीके को भी बदलने पर विचार चल रहा है। अब एजीआर में नॉन टेलिकॉम रेवेन्यू को शामिल नहीं किया जाएगा।

बता दें कि इस समय वोडाफओन आइडिया को इस राहत पैकेज की सबसे बड़ी जरूरत थी। जून तिमाही में कंपनी पर कुल 1.92 लाख करोड़ रुपए का कर्ज था। इसमें स्पेक्ट्रम चार्जेज, एजीआर बकाया और बैंकों का बकाया शामिल है। इसके अलावा स्पेक्ट्रम चार्जेज करीब 1.06 लाख करोड़ का है। वहीं, एजीआर बकाया करीब 62 हजार करोड़ का है, जबकि फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशन का बकाया 23,400 करोड़ का है। कंपनी के पास कैश फंड 920 करोड़ रुपये का था।

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