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सोमनाथ मंदिर सरकारी योजना में देगा अपना सोना

JAN 18 , 2016

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत इसके न्यासियों ने मंदिर के स्वर्ण भंडार का योजना में निवेश करने की अनुमति दे दी है।

मंदिर न्यास के पास 35 किलो सोना है। मंदिर न्यास इस सोने को योजना में जमा करेगा। यह सोना उसके दैनिक कामकाज में इस्तेमाल नहीं होता। मंदिर के सोने को जमा कराने का यह फैसला हाल ही में दिल्ली में प्रधानमंत्राी आवास पर 12 जनवरी को हुई बैठक में लिया गया यह बात न्यास के सचिव पीके लाहिड़ी ने कही। यह मंदिर गुजरात के गिर-सोमनाथ जिले में है। लाहिड़ी ने कहा, बैठक के दौरान सभी न्यासियों ने इस बात पर सहमति जताई कि रोजमर्रा के काम नहीं आने वाले मंदिर के स्वर्ण भंडार को स्वर्ण मौद्रीकरण योजना में जमा करा दिया जाना चाहिये। 

सोमनाथ मंदिर के अन्य न्यासियों में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल भी शामिल हैं जो न्यास के अध्यक्ष हैं। न्यास में वरिष्ठ भाजपा नेता एलके अडवाणी, हर्षवर्धन न्योतिया और जेडी परमार भी हैं। बैठक के दौरान सभी न्यासी मौजूद थे। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को 12 जनवरी की बैठक के दौरान सातवें न्यासी के तौर पर नियुक्त भी किया गया।

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गुजरात में तीन प्रमुख मंदिर हैं, सोमनाथ मंदिर, देवभूमि में द्वारिकाधीश मंदिर और बनासकांठा जिले का अंबाजी मंदिर। इन सभी का संचालन संबंधित न्यास करते हैं जिनका संचालन गुजरात पवित्र यात्रााधाम विकास बोर्ड करता है।

अन्‍य मंदिरों ने नहीं दिखाई दिलचस्‍पी 

बहरहाल, सोमनाथ मंदिर के अलावा गुजरात के किसी अन्य प्रमुख मंदिर जिनके पास पर्याप्त स्वर्ण भंडार है, ने इस योजना में रचि नहीं दिखाई है। द्वारिकाधीश मंदिर ने इस योजना पर अभी कोई विचार नहीं किया है जबकि अंबाजी मंदिर संचालकों ने फिलहाल योजना के तहत सोना जमा कराने की किसी तरह की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया।

देवभूमि-द्वारिका के जिलाधीश और द्वारिकाधीश मंदिर न्यास समिति के पदेन अध्यक्ष एचके पटेल के मुताबिक अभी इस योजना के तहत सोना जमा करने के संबंध में कोई औपचारिक चर्चा नहीं हुई है। बनासकांठा जिलाधीश और अंबाजी मंदिर न्यास समिति के अध्यक्ष दिलीप राणा ने योजना के तहत मंदिर का सोना जमा करने की किसी संभावना से इनकार किया है।

राणा ने कहा, फिलहाल मुख्य मंदिर को सोने की परत चढ़ाने का काम चल रहा है। हमें फिलहाल जो भी सोना या नकदी मिल रही है वह मंदिर के बाहरी सतह की साज-सज्जा में लग रहा है। इसलिए इस परियोजना के पूरा होने तक स्वर्ण मौद्रीकरण योजना के तहत सोना जमा करने का सवाल ही पैदा नहीं होता।


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