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केंद्रीय बजट 2019ः आपके लिए कितना अच्छा और कितना बुरा

JUL 07 , 2019
केंद्रीय बजट 2019ः आपके लिए कितना अच्छा और कितना बुरा
रॉबिन बनर्जी: मैनेजिंग डायरेक्टर कैप्रिहंस आइ लि. और हू चीट्स एंड हाऊ? के लेखक हैं

रॉबिन बनर्जी
पिछले कई हफ्तों की अटकलों और संभावनाओं के बाद आखिर केंद्रीय बजट 2019-20 सामने आ ही गया। इस बजट का हमारे लिए क्या मायने है। इसमें क्या अच्छी खबर है और किन प्रस्तावों से दिक्कतें आ सकते हैं।

अच्छी खबर
लोकलुभावन नीतियों से ज्यादा अहम राजकोषीय अनुशासन
आय के मुकाबले अधिक व्यय यानी राजकोषीय घाटा तार्किक स्तर पर नियंत्रण में है। सकल घरेलू उत्पादन (जीडीपी) के मुकाबले राजकोषीय घाटा 3.3 फीसदी पर रखने का लक्ष्य किया गया है जो पिछले वित्त वर्ष के 3.4 फीसदी से कम है। महंगाई का दबाव नियंत्रण में रहने की वजह से यह अच्छी खबर है। आपको याद होगा कि हाल में चुनाव के दौरान राजनीतिक पार्टियों ने तमाम तरह की रियायतें देने के वादे किए थे। लोकलुभावन घोषणाओं को नजरंदाज करके समझदारी को तवज्जो मिली।

जीएसटी दरें घटने से बड़ी संख्या में वस्तुएं सस्ती होंगी
संभावनाओं के विपरीत बड़ी संख्या में वस्तुएं सस्ती हुई हैं। बजट में कई वस्तुओं की चर्चा की गई है जिन पर जीएसटी की दर घटेगी। जैसे साबुन और शेंपू पर दर 28 फीसदी से घटकर 18 फीसदी होगा। अनब्रांडेड आयुर्वेदिक और होमियोपैथी दवाइयों पर दर 12 फीसदी से घटाक 5 फीसदी की जाएगी। अब आप डायमंड और अन्य कीमती नग आसानी से गिफ्ट कर सकते हैं क्योंकि इस पर जीएसटी तीन फीसदी से घटाकर 0.25 फीसदी किया जाएगा। कई वस्तुओं को जीएसटी से मुक्त किया गया है। इनमें सेनेटरी नैपकिन भी शामिल है।

छोटा ही खूबसूरत
सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्योगों (एमएसएमई) को पूंजी चाहिए, कम ब्याज पर और जल्दी। इन दोनों जरूरतें पूरी करने का प्रयास किया गया है। जीएसटी पंजीकृत फर्मों को नए कर्ज पर दो फीसदी ब्याज कम देना होगा। इसके अलावे एक पोर्टल के जरिये एक करोड़ रुपये तक का कर्ज सिर्फ एक घंटे में मंजूर हो जाएगा। महिला उद्यमियों की भी समस्याएं दूर करने के प्रयास हुए हैं। प्रत्येक सत्यापित स्वयं सहायता समूहों जिनके पास जन धन बैंक खाता है, को 5000 रुपये तक की ओवरड्राफ्ट सुविधा मिलेगी। अगर किसी समूह में एक महिला भी सदस्य है तो उसे एक लाख रुपये तक कर्ज मिल सकेगा। स्टार्टअप्स के लिए सहूलियत दी है कि अब निवेशकों को शेयर जारी करने पर उनके वैल्यूएशन को लेकर आयकर विभाग कोई सवाल नहीं करेगा।

ईज ऑफ लिविंग
छोटे कारोबारियों को पेंशन देने की योजना शुरू होगी। यह स्कीम 1.5 करोड़ रुपये तक कारोबार वाले व्यापारियों के लिए है। इससे तीन करोड़ व्यापारियों को सामाजिक सुरक्षा मिलेगी। सस्ते मकान खरीदारों की मदद के लिए प्रावधान है कि 45 लाख रुपये तक की कीमत के खरीदे गए मकान या फ्लैट के कर्ज पर 3.5 लाख रुपये ब्याज अदायगी कर मुक्त होगी। पहले दो लाख रुपये तक ब्याज अदायगी पर डिडक्शन मिलता था। अगर का बैंक खाता किसी सार्वजिनक बैंक में है तो आप किसी भी सार्वजनिक बैंक में आम बैंकिंग और ऑनलाइन पर्सनल लोन की सेवा ले सकेंगे। सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाने का प्रस्ताव किया है कि नया किराएदारी कानून बनाया जाएगा जो मकान मालिक और किराएदार दोनों का जीवन आसान कर देगा। मौजूदा कानून दोनों पक्षों के लिए समस्याएं पैदा कर रहा है और वास्तविकताओं से दूर है।

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस
सरकार ने 400 करोड़ रुपये तक कारोबार वाली कंपनियों के लिए कॉरपोरेट टैक्स घटाकर 25 फीसदी करने का प्रस्ताव किया है। इससे 99 फीसदी कंपनियों को कम टैक्स भरना होगा। पहले 250 करोड़ रुपये तक कारोबार वालों को 25 फीसदी टैक्स देना होता था। बड़ी कंपनियों को 30 फीसदी टैक्स देना पड़ता था। उम्मीद है कि कंपनियों को बचत होने से वे आर्थिक गतिविधयां बढ़ाने पर ज्यादा फोकस करेंगी।
कई सरकारी बैंक पहले दिए गए कर्ज फंसने यानी एनपीए होने के कारण वित्तीय संकट में फंस गए थे। सरकार ने इन बैंकों को मजबूत बनाने के लिए 70,000 करोड़ रुपये पूंजी बढ़ाने की योजना बनाई है। इससे वे ज्यादा कर्ज दे सकेंगे और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को ज्यादा पैसा दे सकेंगे।
बजटम में रोड, रेलवे, वाटरवेज, एयरवेज और पोर्ट का निर्माण करके बुनियादी विकास तेज करने का प्रस्ताव किया है। इससे न सिर्फ रोजगार बढ़ेंगे बल्कि कारोबारियों की परिवहन लागत भी घटेगी।

ईज ऑफ एंज्वायमेंट
सरकार ने 100 रुपये से ज्यादा के सिनेमा टिकट पर जीएसटी 28 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी तकने का प्रस्ताव किया है। देश के 17 पर्यटन स्थलों को वर्ल्ड क्लास के ट्यूरिस्ट डेस्टिनेशन की तरह विकसित किया जाएगा। आपको विदेश यात्रा किए बगैर घूमने का खूब मजा आएगा।

अगली बार इलेक्ट्रिक कार
इस बार बजट मं इलेक्ट्रिक वाहनों को खास प्रोत्साहन मिला है। पर्यावरण को डीजल और पेट्रोल की नुकसानदायक गैसों से बचाने और आयात खर्च को कम करने के लिए सरकार ने प्रस्ताव किया है कि अगर आपने इलेक्ट्रिक कार खरीदने के लिए लोन लिया है और उस पर 1.5 लाख रुपये तक ब्याज दे रहे हैं तो आपको आयकर में डिडक्शन मिलेगा। यही नहीं, जीएसटी की दर घटाकर पांच फीसदी किए जाने से ऐसी कारों की कीमत भी कम होगी।
विनिवेश से ज्यादा पैसा जुटाने की तैयारी
ज्यादातर सरकारी कंपनियां अच्छा रिटर्न सरकार को नहीं दे पा रही हैं। उन्हें बेचने की आवश्यकता है। सरकार ने विनिवेश से 1.05 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य बढ़ाकर सही कदम उठाया है।

ये नहीं हैं अच्छी खबरें

सेना का कोई जिक्र नहीं
चुनाव से पहले सीमाओं पर उनकी बहादुरी की खूब चर्चा की गई थीं। लेकिन बजट में उनका कोई नाम तक नहीं लिया गया। रक्षा के बारे में बजट मं सरकार ने एक भी शब्द नहीं बोला।
सुपर रिच आए नजर में
सालाना दो से पांच करोड़ रुपये आय पाने वालों को तीन फीसदी और पांच करोड़ रुपये से ज्यादा आय अर्जित करने वालों को सात फीसदी अतिरिक्त आयकर देना होगा। अमीरों पर टैक्स बढ़ाना वैसे तो तार्किक है लेकिन इससे की सफल उद्यमी देश छोड़कर जाने को प्रोत्साहित होंगे और उन देशों में जा बसेंगे, जहां टैक्स कम है। यह ट्रेंड पूरी दुनिया में देखने को मिल रहा है।
सोने पर ज्यादा टैक्स, तस्करी का अंदेशा
सरकार ने सोने और चांदी सीमा शुल्क 10 फीसदी से बढ़ाकर 12.5 फीसदी कर दिया गया है। इससे तस्करी को बढ़ावा मिल सकता है। इन कीमती धातुओं पर शुल्क घटाने की आवश्यकता थी ताकि तस्करी को नियंत्रित किया जा सकेगा।
सभी तरह के आयात पर शुल्क वृद्धि अच्छी नहीं
मेक इन इंडिया को ध्यान में रखते हुए तमाम वस्तुओं के आयात पर शुल्क बढ़ा दिया गया है। लेकिन कुछ वस्तुओं पर लगता है कि शुल्क लॉबिंग के कारण बढ़ा दिया गया, इसके पीछे कोई तर्क नहीं दिखता है। पीवीसी पर शुल्क 7.5 फीसदी से बढ़ाकर 10 फीसदी कर दिया गया। जबकि मुश्किल से 50 फीसदी देश में निर्मित पीवीसी की खपत होती है। जब आयात आवश्यक है तो शुल्क बढ़ाकर कंपनियों की लागत बढ़ाने से अर्थव्यवस्था को ही नुकसान होगा।
केंद्रीय बजट बनाने के अच्छे या बुरे असर होते ही हैं। राष्ट्रीय बजट बनाने की प्रक्रिया किसी गुब्बारे को शक्ल देने के समान होती है। आप जितना काम करते हैं, उसका आकार उतना ही असमान हो जाता है। मांगें बहुत ज्यादा होती है जबकि संसाधन और विकल्प सीमित होते हैं। अगर तीन चौथाई बजट व्यवस्थाएं लागू हो जाएं तो भारत सुंदर देश बन जाएगा।
(रॉबिन बनर्जी कैप्रिहंस आइ लि. के मैनेजिंग डायरेक्टर और हू चीट्स एंड हाऊ? के लेखक हैं। प्रस्तुत विचार निजी हैं।)

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