Home अर्थ जगत बजट 2022-23: कोरोना से प्रभावित हॉस्पिटैलिटी सेक्टर की क्या हैं सरकार से उम्मीदें?

बजट 2022-23: कोरोना से प्रभावित हॉस्पिटैलिटी सेक्टर की क्या हैं सरकार से उम्मीदें?

राजीव नयन चतुर्वेदी - JAN 12 , 2022
बजट 2022-23: कोरोना से प्रभावित हॉस्पिटैलिटी सेक्टर की क्या हैं सरकार से उम्मीदें?
प्रतीकात्मक तस्वीर

पहले से डूबते हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को भारत में फिर से सामान्य होते हालातों को देखकर एक उम्मीद जगी थी, लेकिन कोरोना की तीसरी लहर ने पहले ही दयनीय होते इस सेक्टर की स्थिति को और बदहाल कर दिया है। अगर एक वाक्य के जरिये इसके दयनीय हालत को समझाया जाए तो वो यही होगा कि 'डूबते को तिनके का सहारा और किस्मत ऐसी कि तिनका भी डूब गया।' जाहिर है कि कोरोना वायरस का सबसे ज्यादा प्रभाव अगर किसी सेक्टर पर पड़ा है तो निसंदेह वो ट्रेवल, टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर ही है।

इस इंडस्ट्री से जुड़े सभी स्टेकहोल्डर्स को उम्मीद थी कि तीसरी लहर उतनी ज्यादा भयावह नहीं होगी और इसका असर भी कम रहेगा। लेकिन अलग-अलग राज्यों में लगती पाबंदियाँ कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं।

आउटलुक से बात करते हुए इम्प्रेसारियो एंटरटेनमेंट एंड हॉस्पिटैलिटी के सीईओ रियाज अमलानी कहते हैं, "ईमानदारी से कहूँ तो हमारी इच्छा बस यही है हम किसी तरह सर्वाइव कर जाएं। क्रिसमस और नए साल में ही सबसे ज्यादा लोग बाहर निकलते हैं और इसी में हम सोच रहे थे कि पिछले दो सालों के नुकसान की भरपाई कर लेंगे, लेकिन इस बार भी ऐसा नहीं हुआ।"

फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एफएचआरएआई) के अनुसार कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के कारण शादी समारोह, क्रिसमस और नए साल की प्री-बुकिंग रद्द होने होने की वजह से होटल, रेस्टोरेंट और दूसरे संबंधित उद्योगों को 200 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। कोरोना के होटल उद्योग पर पड़े प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए माचिस रेस्टोरेंट के मालिक वरुण अग्रवाल कहते है, "मार्केट में जब डर फैलता है तो लोगों की आउटिंग कम हो जाती है, इसका असर हमारे ऊपर सबसे ज्यादा पड़ता है। हम जितना सर्वाइव कर सकते हैं और कर रहे हैं, लेकिन ऐसे ज्यादा देर तक नहीं चल सकता है।

फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एफएचआरएआई) के अनुसार, पहले से ही संगठित क्षेत्र में लगभग 60,000 होटल्स और 5 लाख रेस्तराओं में से लगभग 25 से 30 प्रतिशत दुकानें बंद हो चुकी हैं और अन्य 15 प्रतिशत भी अपनी अंतिम सासें गिन रही हैं। गौरतलब हो कि क्रेडिट रेटिंग एजेंसी आईसीआरए ने भी हॉस्पिटैलिटी उद्योग के ग्रोथ को नेगेटिव में रखा है।

भारत में कोविड के मामलें तीव्रता के साथ बढ़ रहे हैं। दिसम्बर महीने में जहाँ सब कुछ सामान्य होता दिख रहा था, जनवरी में दुनिया एक बार फिर से ठिठुरती नजर आ रही है। तमाम देशों ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर प्रतिबंध और कर्फ्यू लगाना शुरू कर दिया हैं। हालांकि ऐसा तब हो रहा है जब वैज्ञानिक इसे ज्यादा घातक नहीं मान रहे हैं। गौरतलब हो कि इससे पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा था कि यात्रा प्रतिबंध प्रसार को नहीं रोकेंगे और इसलिए प्रतिबंध कोई समाधान नहीं है।

अग्रवाल खुद को इस वक्त अनिश्चिताओं में घिरा हुआ पाते हैं, वो कहते हैं, "जब सभी सेक्टर्स खुले हुए थे उस समय भी हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में 50% ऑक्यूपेंसी के नॉर्म्स लगे हुए थे। ऐसे ही हमारी इंडस्ट्री 10 साल पीछे हो गयी है। आगे क्या होगा भगवान जाने। व्यक्तिगततौर पर कहूँ तो इस महामारी के कारण हमारे आरडी मॉल, ग्रेटर कैलाश और गुड़गांव के स्टोर्स बन्द करने पड़े हैं।"

देश के कई राज्यों की सरकारें होटल्स और रेस्तराओं को फिर से 50% ऑक्यूपेंसी के साथ खोलने के दिशानिर्देश जारी कर चुकी हैं। ऐसे में आने वाले समय हॉस्पिटैलिटी सेक्टर का आउटलुक क्या रहेगा इसपर ट्री ऑफ लाइफ रिजॉर्ट और होटल्स के डायरेक्टर अखिल आनंद कहते हैं, " महामारी जीवन का अब एक हिस्सा बनता जा रहा है। ऐसे वेरिएंट्स आते और जाते रहेंगे, लेकिन हम जीना नहीं छोड़ सकते हैं। हम ध्यानपूर्वक सभी तरह की सावधानियां और कोरोना प्रोटोकॉल को फॉलो कर रहे हैं। बस सरकार हमसे नजरें न चुराए और मदद करे।"

बजट से क्या हैं उम्मीदें?

वित्त मंत्रालय को दिए अपने प्री-बजट सुझाओं में हॉस्पिटैलिटी एसोसिएशन, फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एफएचआरएआई) ने सरकार से कहा है कि "जब जीएसटी लागू हुआ था तब हमारा 'जीएसटी इनपुट क्रेडिट' हटा दिया गया था। इस कठिन समय में इनपुट क्रेडिट को फिर से वापस देना हमारे लिए एक बड़ी रिलीफ होगी। हम भारत के एकमात्र ऐसे उद्योग हैं जिसे खरीद पर किसी भी प्रकार का टैक्स क्रेडिट- इनपुट क्रेडिट नहीं मिलता है।"

आने वाले बजट से हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को सरकार से क्या उम्मीदें है, इस सवाल के जवाब में रियाज कहते हैं, "सबसे पहले तो रेस्तरां और आतिथ्य (हॉस्पिटैलिटी) सेक्टर को क्रेडिट उपलब्ध कराया जाना चाहिए। क्योंकि हमें व्यवसाय फिर से शुरू करने के लिए पूरे पैसे की जरूरत है।" वो आगे क्रेडिट की समस्याओं पर जोर देते हुए कहते हैं कि बैंकों ने रेस्तरां उद्योग को हाई रिस्क की श्रेणी में सूचीबद्ध कर दिया है, जिससे हमारी पैसों की किल्लत और बढ़ रही हैं।"

रियाज की बातों को ही आगे बढ़ाते हुए ट्री ऑफ लाइफ रिजॉर्ट्स और होटल्स के डायरेक्टर अखिल आनंद कहते हैं, "कैश फ्लो सबसे बड़ी समस्या है। कोई नहीं एक्सपेक्ट किया था कि कोविड की वजह से लगातार तीन-तीन महीनों तक एक पैसा भी नहीं कमा पाएंगे। खर्चे लगातार हो रहे हैं लेकिन रेवेन्यू नहीं हो रहा है और यही सबसे बड़ी समस्या है। सरकार इसपर ध्यान दे तो स्थिति सुधर सकती है।"

सरकार से आपको क्या उम्मीदें हैं इसपर अग्रवाल कहते हैं, "अगर सरकार हमारी मॉनेटरी हेल्प नहीं कर सकती है तो कम से कम हमें अकेले आइसोलेट न करे। हम चाहते हैं कि सरकार बाकी सेक्टर्स को जैसे ट्रीट कर रही है, वैसे ही हमें करे।

क्या आपको बजट में सरकार से कुछ इंसेंटिव की उम्मीदें हैं, इसपर रियाज कहते हैं की कोविड के पिछली दो लहरों में कुछ इंसेंटिव नहीं आया, तो अभी क्या ही आएगा।

कोरोना की दो लहरों के बाद ऐसा लगा था कि ये इंडस्ट्री फिर से अपने पुराने स्तर पर पहुच रही है। लेकिन अचानक आई तीसरी लहर से इस सेक्टर की हालत उस प्यासे के जैसी हो गयी है, जिसके मुँह में पानी की एक बूंद गिरने से पहले ही ग्लास छटक जाए। गौरतलब है कि अगर कोरोना की तीसरी लहर जल्द काबू में नहीं आती है तो ये हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के ताबूत पर आखिरी कील साबित हो सकती है।