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भूला-बिसरा कलमकार

“कहानीकार अरविंद कुमार ने भोजपुरी जी की रचनावली निकाल कर नई पीढ़ी को उनके व्यक्तित्व और योगदान से...

जीवनियों से नया साक्षात्कार

हिंदी में सोलह दिग्गज लेखकों, कलाकारों की जीवनियां नामी-गिरामी लेखकों से लिखवाना एक नई परिघटना है।...

नाटक में गांधी

“हमारी चुनावी राजनीति जिस तरह महात्मा को आज भी कुचल रही है, उनके 150वीं जयंती वर्ष में नाटकों में नए...

संभावनाओं के नए सोपान

“नई किताबों और नए लेखकों ने जताईं उम्मीदें, लेकिन विदा हुए हमसे कई महत्वपूर्ण लेखक”

परंपरा का बोझ ढोते प्रेमचंद

प्रेमचंद राष्ट्रीय आंदोलन के लेखकों में उतने ही बड़े प्रतीक हैं जैसे आजादी की लड़ाई में गांधी।