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पंकज त्रिपाठीः प्रयोगधर्मी अभिनेता की पेशकदमी

“अभिनय की भारतीय और पाश्चात्य विधियों में दक्ष देसज पंकज जैसा कुशल अभिनेता जब किसी किरदार को निभाता...

यादें: एडवांस मैथ इश्क, रोटोमैक और 'सफर तो छोटा रहा तुम्हारे साथ पर तुम...'

राशियों के चरित्र में परिवर्तन होता रहता है। ग्रह भी अपने घर बदलते रहते हैं। आनंद के ग्रहों ने भी उस...

यादें: छीना जाना मासूमियत का, आर्किमिडीज की नाक और 'अच्छा सिला दिया तूने...'

उस रोज पंकज की हालत देखने लायक थी। उसकी हंफ़नी में हमें भींगा हुआ आर्किमिडीज़ निर्वस्त्र अवस्था में...

यादें: वह कहानी, जिसके अंत में शुरुआत थी- 'देखो तुम भी खत मेरा आते ही..."

ऐसा नहीं था कि इस तरह की यह पहली घटना थी पर अब तक किसी ने ऐसा नहीं किया था पर इस गाँव में ऐसा कुछ नहीं हुआ...

यादें: एक उड़नतश्तरी, 'हाथों में आ गया जो कल' और दोस्त की घर वापसी

वैसे वह दौर तो जादुई था। जब हवाओं में वायलिन बजाता कोई एक राज था और हवाओं में सूखे पत्ते, पीले फूल तैरते...

यादें: 'किताबें बहुत-सी पढ़ी' पर मिलना ज्ञान बरास्ते आर्केस्ट्रा वाला नाच

(डिस्क्लेमर : यह किस्सा नब्बे के दौर का एक जरूरी सच है। हम सबने सिनेमा और संगीत बदलते देखा, अन्य...

यादें: सिंसियर लड़का, ब्रूटस मामा और 'दिल तो पागल है' से 'इसे समझो ना रेशम' का सफर

मन का क्या है, किसी भी मौसम में मचल सकता है । दिल का क्या है बेवजह भी गुलाटियां भर सकता है। पंकज का मन...

सिर्फ तुम, दरबार सिनेमा और खाली दिल नहीं जान वी ये मंगदा

देखने में तो नहीं लगता है, पर सच यही है कि बड़ी मौसी के सबसे छोटे लड़के सुनील भैया मुझसे छह माह बड़े हैं।...

यादें: दो बाँके, एक फिल्म और जूही चावला की "मैं तेरी रानी तू राजा मेरा"

डिस्केलमर : ग्लोब के किसी हिस्से में नब्बे के दो दीवाने हुए। दो असल गंजहे। पर कानूनन यही कहना है कि इस...

एवन साइकिल वाली लड़की, 'रंग' की चिट्ठी और बेदर्दी से प्यार का...

नाम जानकर क्या कीजिएगा पर यह जरूर जानिए कि लड़कों से ठस्स भरे हुए स्कूल में वह जिस ताव और तेवर के साथ रहती...

यादें : दिलवाले और दिलवाले के आशिक की 'पूस की रात'

'जीता था जिसके लिए' की जनव्याप्ति उन दिनों चालीसा से थोड़ा ही कम थी। एक ओर हमारे गाँव के मंदिर से सुबह में...

यादें: "खता तो जब हो हम हाल-ए-दिल"-दिव्या भारती के लिए उपवास और दोस्ती में दरार

उसके मामा की एक ड्राईक्लीनिंग शॉप, सिनेमा रोड में थी। इंटर कॉलेज से जो समय बचता, वह वहीं पर बिताता। उसका...

यादें: रखना किताबों को गिरवी, देखना 'दलाल' और दोस्ती का लिटमस टेस्ट

जिले से बाहर "दलाल" खूब धमाका मचाकर आयी थी। उसके गीत पहले से सबकी ज़बान पर चढ़े हुए थे। अब इंतज़ार फ़िल्म का...

डब्ल्यू टी से सिनेमा देखने वाले लड़के और एक थी एवन वाली लड़की

(स्पष्टीकरण : किस्से के दो हिस्से हैं दोनों सच में घटित)

यादें: विजयपथ, दरबार और तब्बू का खोंइछा भरा जाना

उन दिनों दूरदर्शन और डीडी मेट्रो का जमाना था। बैट्री चार्ज करने की दुकानें जगह-जगह थी और हमारी उम्र के...

यादें: गुरुजी का 'दुख हरण', रवीना टण्डन और बालकनी का बदला

वह ऐसा दिखता था या नहीं पर उसके दोस्तों ने उसके दिमाग में भर रखा था और खुद हर्षवर्द्धन को भी ऐसा लगता था...


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