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“स्‍त्री लेखन में बिखराव चिंता की बात नहीं”

“समाज स्‍त्री और पुरुष दोनों से नि‍र्मि‍त है। अत: कि‍सी को कमतर मानना, समाज के संतुलन को कमजोर करना...