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निश्छल प्रेम का संबंध

MAR 25 , 2021


बेहया! उपन्यास आधुनिक भारतीय शिक्षित समाज का चरित्र चित्रण करता है। हमारे समाज में स्त्रियों की क्षमता को कम आंका जाता है और जब कोई महिला सामाजिक मापदंडों को तोड़ कर तरक्की करती है, तो उसकी उल्लेखनीय प्रगति को उसके चरित्र से आंका जाता है। ये माना जाता है कि उस महिला ने अपनी प्रगति में असामाजिक, अनैतिक और अस्वीकार्य तरीकों का इस्तेमाल किया है। जब भी कोई महिला अपने घर की जरूरतों या अपने सपनों को पूरा करने की खातिर, देहलीज को लांघती है, उसे समाज में बेशर्म या बेहया जैसे शब्दों से नवाजा जाता है। हद तब हो जाती है जब उसका परिवार भी उसे कटघरे में खड़ा कर देता है।

बेहया की मुख्य पात्र है सिया, जो पढ़ी-लिखी स्वावलंबी महिला है, इस पात्र में आप अपने आसपास की सफल और ममतामयी महिलों की छवि पाएंगे। स्त्री मन की छटपटाहट आप संवादों महसूस हैं, “पहले आदमी किसी आजाद खयाल औरत से प्यार करता है। औरत को लाड़ प्यार से रखता है। फिर वह उसके पंखों को काट देता है। वह प्यार के नाम पर उसकी आजादी का गला दबा देता है।” सिया और उसके पति यश की जिंदगी दूर से देखने वालों के लिए एकदम परफेक्ट है। सिया की तरक्की यश के शक का कारण है, अपनी छोटी सोच और कुंठाओं के चलते यश सिया को यथोचित प्रेम और सम्मान नहीं देता। जबकि वो खुद उसे नौकरी छोड़ने भी नहीं देता क्योंकि सिया की नौकरी उसके अपने स्टेटस और छवि के लिए अच्छी है।

सफल और स्वाबलंबी होने के बाद भी कैसे स्त्रियां घरेलू हिंसा को सहती है, परिवार न टूटे इसलिए कामकाजी महिलाओं को अक्सर घर और बाहर दोहरी लड़ाई लड़नी पड़ती है। बच्चों की खातिर बहुत बातें भूलकर उन्हें कैसे समझौता करना पड़ता है, ये कहानी के साथ-साथ आप समझते जाएंगे। कई बार महिलाएं अपने साथ होने वाले शोषण और दुर्व्यवहार के बारे में अपने परिवार को भी नहीं बता पाती, क्योंकि उन्हें डर होता है कि इसका इल्जाम भी उनके चरित्र पर ही आएगा और इसी वजह को रस्सी बनाकर उन्हें कैद कर दिया जाएगा, “काश, हर औरत अपने साथ होने वाली ज्यादतियों पर बात कर सके, बिना ये परवाह किए हुए कि लोग उसके चरित्र पर सवाल उठाएंगे।” उपन्यास में रोजमर्रा की परिस्तिथियों का बखूबी जिक्र है। 

सिया की मुलाकात, अभिज्ञान नाम के एक ट्रेनर से होती है और यहां से शुरू होता है उसकी जिंदगी में नया अध्याय। अभिज्ञान और सिया के संवाद कहानी का मुख्य आकर्षण है जो, सरल भाषा में समस्या ही नहीं उनके समाधान भी बताते हैं। बिना शारीरिक संबंध का निश्छल प्रेम, जिसे लेखिका ने 'प्लेटोनिक' प्रेम कहा है, पवित्र और दिल का रिश्ता है जिसमें शरीर के स्तर का संबंध बहुत पीछे छूट जाता है और प्रेम आत्मा के सर्वोच्च स्तर पर, निस्वार्थ और अत्यंत प्रगाढ़ होता है। उपन्यास बहुआयामी एवं रोचक है और शुरू से आखिर तक पाठक को इससे बांधे रखता है।

बेहया!

विनीता अस्थाना

148 रुपये  

155 पृष्ठ  

हिन्द युग्म

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