Home कला-संस्कृति सामान्य अपनी किताब में चिदंबरम ने कहा- भारत का विचार खतरे में, एक और महात्मा गांधी की पड़ेगी जरूरत

अपनी किताब में चिदंबरम ने कहा- भारत का विचार खतरे में, एक और महात्मा गांधी की पड़ेगी जरूरत

आउटलुक टीम - FEB 09 , 2019
अपनी किताब में चिदंबरम ने कहा- भारत का विचार खतरे में, एक और महात्मा गांधी की पड़ेगी जरूरत
किताब के विमोचन के मौके पर पी चिदंबरम, हामिद अंसारी, सलमान खुर्शीद आदि
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पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता पी चिंदबरम ने अपनी नई किताब Undaunted: Saving The Idea of India में कहा है कि आज देश में भय का शासन है और इस बात का डर है कि संविधान को हिंदुत्व से प्रभावित एक दस्तावेज से बदल दिया जाएगा। उन्होंने किताब में आरोप लगाया है कि इस स्थिति से ‘भारत का विचार’ नष्ट हो जाएगा, जो हमें सिखाया गया है। उसे दोबारा हासिल करने के लिए एक अन्य स्वतंत्रता संघर्ष और एक अन्य महात्मा गांधी की जरूरत होगी।

चिदंबरम के मुताबिक, अर्थव्यवस्था अगर पटरी से उतर जाए तो उसे वापस पटरी पर लाया जा सकता है। एक बंटा हुआ समाज भी दुरुस्त और एकजुट किया जा सकता है लेकिन एक चीज है जो सही नहीं की जा सकती, वह है संविधान और उसमें निहित संवैधानिक मूल्य।

'हर व्यक्ति डर में जी रहा है'

किताब में कहा गया है कि आज संवैधानिक मूल्यों- स्वतंत्रता, समानता, उदारवाद, धर्मनिरपेक्षता, निजता, वैज्ञानिक सोच पर हमला हो रहा है। किताब की भूमिका में वह लिखते हैं, ‘’मुझे यह कहने में कोई हिचक नहीं है कि आज भारत में भय राज कर रहा है। हर व्यक्ति डर में जी रहा है- पड़ोसी का डर, नैतिकता के स्वयंभू संगठनों का डर, बुरी नीयत से थोपे जा रहे कानून का डर और सबसे ऊपर भारतीय राज्य में ताक-झांक का डर।‘’

वह कहते हैं कि स्वतंत्रता पर अपने दावे के लिए डर को दूर भगाना होगा। यह आसान नहीं है लेकिन हम हार नहीं मान सकते। वह लिखते हैं, ‘’सामान्य नागरिकों ने उपचुनावों और विधानसभा चुनावों में हिम्मत दिखाते हुए पलटवार किया है। लेकिन अभी काम खत्म नहीं हुआ है और यह अगले 100 दिनों तक अधूरा ही रहना है। हमें आगे बढ़ते रहना है, निडर होकर, जब तक काम पूरा ना हो जाए।‘’

हामिद अंसारी ने लिखा किताब का फॉरवर्ड

पूर्व उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने किताब का फॉरवर्ड लिखा है, जिसमें वह संस्थाओं की बात करते हैं और कुछ उदाहरण देते हैं। हामिद अंसारी कहते हैं, ''अगर संसद में बजट बगैर स्क्रुटनी और बहस के पास होता है, और अगर विधायिका के महत्वपूर्ण विषयों को स्टैंडिंग कमेटी या सेलेक्ट कमेटी के बगैर बढ़ावा दिया जाता है तो यह संसद के विधायिका के तौर पर अपना कर्तव्य ना करने का सबूत है और आज की सरकार अपने प्राथमिक कर्तव्यों को पूरा करने में असफल है।''

वह आगे कहते हैं, ''ऐसा ही दूसरी संस्थओं के साथ भी है। कुछ नष्ट हो गई  हैं, कुछ अपना जरूरी काम करने में लड़खड़ा रही हैं। कुछ को पीछे के दरवाजे से कंट्रोल किया जा रहा है। इन सबको मिलाकर लोगों के मन में संशय पैदा होता है और एक खुली-सामान्य व्यवस्था में विश्वास को कमजोर करता है।''

वह कहते हैं कि एक विचारधारा की तरफ झुकाव संविधान मूल्यों की अनदेखी करता है, नागरिकों के बीच आस्था के नाम पर भेदभाव करता है और विविधता वाले समाज में एक संस्कृति थोपने की कोशिश करता है। वह धर्मनिरपेक्षता और भाईचारे के सिद्धांत की अनदेखी करता है।

भाजपा को जितना बहुमत मिला था, उससे हो सकते थे चमत्कार: चिदंबरम

चिदंबरम के मुताबिक, हालांकि भाजपा सारी विपक्षी पार्टियों को राजनीतिक दुश्मन मानती है लेकिन मैं भाजपा को दुश्मन नहीं मानता। वह कहते हैं, ‘’मेरे लिए भाजपा भारतीय राजनीति की एक धुर दक्षिणपंथी पार्टी है और किसी पार्टी को स्वीकार करना या अस्वीकार करना भारत के लोगों के ऊपर है।‘’

चिदंबरम यह भी कहते हैं कि पिछले लोकसभा चुनाव में जिस तरह का बहुमत भाजपा को मिला था, उससे चमत्कार किए जा सकते थे। वह लिखते हैं, ‘’यह सच है कि मिस्टर मोदी ने धमाकेदार शुरुआत की लेकिन अब अपने कार्यकाल के अंत में वह जिस तरह गिड़गिड़ा रहे हैं, इसके लिए वह खुद जिम्मेदार हैं।‘’

चिदंबरम की इस किताब में 2018 के निबंधों को अलग-अलग सेक्शन के तहत संकलित किया गया है। रूपा पब्लिकेशन से प्रकाशित यह किताब शुक्रवार को लॉन्च हुई।

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