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असगर वजाहतः नफरतों के शोलों में ठंडक देते अल्फाज

JUL 05 , 2018

आज जब नफरतों, अफवाहों का बाजार गर्म है। सांप्रदायिकता, असहिष्‍णुता का दौर है और किसी खास वर्ग का आम आदमी मॉब लिंचिंग के अंदेशे का शिकार है, ऐसे में कुछ लोग हैं जिनकी कलम इन सबके खिलाफ बेबाकी से रवां रही है। इन्हीं में से एक हैं वरिष्ठ साहित्यकार सैयद असगर वजाहत। इनका साहित्य भय, नफरत और उन्माद के बनाए हुए इस माहौल में आम इंसान की आहों से उपजा महसूस होता है और सच्चाई का अलमबरदार नजर आता है। आम जन के मुद्दों को उठाकर और अपनी विशिष्‍ट शैली में प्रभावकारी बात कह जाने वाले साहित्यकार सैयद असगर वजाहत का आज जन्मदिन भी है। इस मौके पर कला, साहित्य से जुड़े कितने ही लोग उन्हें शुभकामनाओं से नवाज रहे हैं।

अखिल भारतीय प्रगतिशील लेखक संघ के महासचिव राजेंद्र रंजन लिखते हैं-

ये ऐसे लेखक हैं जो श्रेष्ठता बोध की व्याधि से पीड़ित नहीं हैं। शीघ्र ही हर उम्र और तबके के लोगों से तादात्म्य स्थापित कर लेते हैं। देशकाल पर इनकी पैनी निगाह रहती हैं। केवल दृष्टा नहीं, स्रष्टा भी हैं ।

सोशल मीडिया पर भी निर्भीकता से संघियों, बजरंगियों की गालियों के बौछार के बीच अपनी बातें दमदार तरीके से प्रस्तुत करते हैं। जैसे इन की किताबें पढ़ता हूं उसी तरह सोशल मीडिया पर लिखी बातें भी।

कहानियां लिखते ही नहीं सुनाते भी रोचक ढंग से हैं। अपने पात्रो और कथानक की तलाश में नए इलाके में घुमंतू की तरह विचरण करते हैं। अपने पूर्वजों के भारत आगमन के बारे में इन्होंने रोचक ढंग से बताया था। बाद मे इसका विसतृत वर्णन पढने को भी मिला।

प्रियदर्शन ने लिखा है-

आज फेसबुक असग़र वजाहत का जन्मदिन बता रहा है। उनके लेखन में एक धोखादेह सादगी है। वे शिल्प के जाल में पांव उलझाए बिना बहुत सहजता से अपनी बात कहते हैं और इस क्रम में एक नया शिल्प गढ़ लेते हैं।

सबसे बड़ी बात-नफरत से लगभग खौलते हुए इस समय में वे विवेक की सबसे संयत आवाजों में हैं। उनकी सक्रियता बहुत आवश्यक और आश्वस्तीदायी है। 

जनवादी लेखक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष फारूक आफरीदी लिखते हैं-

हमारे समय के महत्वपूर्ण कथाकार, नाट्य लेखक और यात्रा वृतान्तकार जनवादी लेखक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष असगर वजाहत का आज जन्मदिन है। हमने कल ही उन्हें बधाई दी। असगर साहब सौभाग्य से कल जयपुर में थे।

बाबा हिरदाराम पुस्तक सेवा समिति द्वारा सांप्रदायिक सद्भाव पर उनके कहानी संग्रह 'हिन्दू पानी मुस्लिम पानी' का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर असगर साहब ने केक काटा जिस पर सभी साहित्यकारों ने उन्हें बधाई दी।


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