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सुनो कहानी

DEC 02 , 2017

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में इन दिनों कहानियां सुनाई जा रही हैं। ‘कथाकार’ का यह सातवां संस्करण है। अंतरराष्ट्रीय कहानी कहने वालो का यह उत्सव अपने आप में हमेशा अनूठा रहता है। कल से शुरू इस उत्सव में कल तक यानी 3 दिसंबर तक हर दिन शाम 4:30 से रात 8:30 तक कहानियों का लुत्फ लिया जा सकता है।

कहते हैं किस्सों से बढ़कर कुछ नहीं होता। कहानियां बच्चों को ही नहीं बड़ों को भी लुभाती हैं। कहानियां सुनाने वाला ‘कथाकार’ अपनी तरह का इकलौता उत्सव है। यह यूनेस्को के तहत शुरू किया गया था। कहानियां दिल्ली में ही नहीं ठहरेंगी। बल्कि अगले हफ्ते 9 और 10 दिसंबर को ये मुंबई चली जाएंगी।

कहानी सुनाने की परंपरागत कला को सहेजने और आगे बढ़ाने के लिए ‘कथाकार’ शुरू हुआ था। जब कलाकार पारंपरिक लोक कथाएं, महाकाव्य और किसी सामुदायिक इतिहास को पूरी भाव-भंगिमा के साथ सुनाते हैं तो लगता है वह वक्त उतर कर परदे पर चला आया है। आवाज के उतार-चढ़ाव का ऐसा जादू छा जाता कि कहानियां दर्शकों के मस्तिष्क पर छप जाती हैं। फिर बरसों बरस वह कहानियां वहीं रहेंगी सहेजी हुई यादों के बीच यह तय है।

बिलकुल ऐसा लगता है जैसे गांव की चौपाल पर कहानियां सुनाई जा रही हों। पीपल के पेड़ के नीचे किस्सागोई बहती है और श्रोता इन कहानियों में गुम हो जाते हैं। स्कूल और कॉलेज के छात्रों की संख्या देख कर लग रहा है कि कहानियां श्रोताओं को लुभा रही हैं। सुदूर बेल्जिमय की लोककथाओं से लेकर ब्रिटेन और भारत के हिमालय क्षेत्र से लेकर समुद्री तट के आंध्र प्रदेश तक की कहानियां सुनना हो तो आपके पास दो दिन हैं। 


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